नाम वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस ने अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी किया। घोषणा पत्र जारी किए जाने के पहले वर्तमान भाजपा सरकार के खिलाफ एक चार्जशीट भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें प्रदेश सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। उस आरोप पत्र पर भाजपा की प्रतिक्रिया बहुत ही तीखी थी। उसमें भाजपा सरकार के 10 साल के दौरान हुए घोटालों की चर्चा थी। भारतीय जनता पार्टी ने फैसला किया है कि वह इसके खिलाफ निर्वाचन आयोग से शिकायत करेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने चुनाव कार्यालय जाकर शिकायत दर्ज भी कर दी। उन्होंने कहा कि इस आरोप पत्र के लिए वे कांग्रेस के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा भी चलाएंगे।

आरोप पत्र मे 1,46,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है। इसमें 17 बड़े घपलों का जिक्र किया गया है।

उस सूची में नरेगा घोटाले की भी चर्चा है, जिसमें 30 करोड़ रुपये की अनियमितता का जिक्र है। 32,109 करोड़ रुपये का एक बिजली घोटाला भी इस आरोप पत्र में शामिल किया गया है। कहा गया है कि बिना उचित टेंडर के बिजली की खरीद हुई।

सवा तीन करोड़ रुपये की गेहूं खरीद में हुई धांधली का भी जिक्र इसमें है। पिछले तीन साल में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा मारे गए छापे में 1,031 करोड़ रुपये की संपत्ति की बरामदगी हुई थी। उस राशि को भी सरकारी घपले की राशि में शामिल कर दिया गया है।

लोकनिर्माण विभाग में हुए 20 करोड़ रुपये के एक घोटाले की बात भी उठाई गई है। कुपोषण के नाम पर 600 करोड़ रुपये काभी घोटाला हुआ। कहा गया है कि अवैध खनन और सरकारी खजाने में घपलेबाजी से 50 हजार करोड़ रुपये उगाहे गए और इसके कारण 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान सरकारी खजाने को हुआ। एक लाख करोड़ का घोटाला तो सिर्फ इसे ही बताया जा रहा है।

आरोप पत्र के अनुसार दीन दयाल उपचार योजना के लिए 65 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया था। यह राशि कहां गई, इसका कोई अता पता नहीं है। सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई खरीद में 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है। किसानों की कर्जमाफी में 108 करोड़ रुपये के घोटाले तो जल संसाधन विभाग में 5 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।

मुख्यमंत्री के स्वैक्षिक कोष में 76 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया है, तो गैमन इंडिया को किए गए भूमि आबंटन में 5,250 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया है। तेंदुपत्ता वितरण में 260 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप भी लगाया गया है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय सिंह ने बताया कि वित्तीय घोटाले किस रफ्तार से हो रहे हैं, इसका पता इसीसे लगाया जा सकता है कि इस साल के 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच सरकार के 1000 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने की बात सामने आई है। प्रोफेशनल संस्थानों में प्रवेश मंे हुए घोटाले को श्री सिंह ने मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया।

उन्होंने कहा कि व्यापम के निदेशक पंकज त्रिवेदी के फोन काॅल की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सही ढंग से जांच हुई तो इस घोटाले का सूत्र सीधे मुख्यमंत्री भवन और भाभीजी के पास पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्मीकांत वर्मा खान मंत्री थे, तो उन्होंने वहां खनन घोटाले का नेतृत्व किया था। वहां मिली सफलता के बाद उन्हें उच्च शिक्षा मंत्री बना दिया गया और फिर वहां व्यापम घोटाला हुआ। उन्होंने कहा कि लक्ष्मीकांत वर्मा मुख्यमंत्री के काफी नजदीकी हैं। भ्रष्टाचार आर उनके बीच के सबंधों का पता लगाया जाना चाहिए। अजय सिंह ने मुख्यमंत्री की पत्नी व अन्य रिश्तेदारों पर भी भ्रष्टाचार में लिप्त होने के अनेक गंभीर आरोप लगाए और उन आरोपों का ब्यौराबार जिक्र भी किया।

भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सत्ता में आने के लिए इस बार चुनाव लड़ रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की लोकप्रितया का लाभ पार्टी को मिल रहा है, लेकिन अनेक मंत्रियों और विधायकों को लोगों के रोष का सामना करना पड़ रहा है। जाहिर है, टक्कर कठिन है और सही तस्वीर का पता एक सप्ताह के बाद ही लगेगा। (संवाद)