लेकिन मात्र इतने से ही तेलंगाना की गुत्थी नहीं सुलझती। इसकी प्रक्रिया बहुत सरल साबित नहीं हुई है। इसका कारण यह है कि इस मसले पर सभी पार्टियों में दोफाड़ पैदा हो गया है। कांग्रेस भी आंध्र प्रदेश में इस मसले पर दोफाड़ है। पर कांग्रेस की असली समस्या मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी की ओर से आ रही है। वे अलग तेलंगाना राज्य का जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। इसके कारण वे इस समस्या के हल नहीं बल्कि इसे और भी बढ़ जाने का कारण बन रहे हैं। उन्होंने अलग राज्य के गठन का अंत अंत तक विरोध करने का अपना इरादा साफ कर दिया है और वे न तो केन्द्र सरकार और न अपनी पार्टी के आलाकमान के सामने झुकने और उनकी बात मानने को तैयार हैं।
कांग्रेस का आलाकमान इस तरह के विरोध का सामना करने का अभ्यस्त नहीं रहा है। सच कहा जाय तो किरण कुमार रेड्डी जैसे किसी हल्के मुख्यमंत्री से इस तरह के विरोध की उम्मीद तो कांग्रेस के अंदर की ही नहीं जा सकती। कांग्रेस के अंदर कभी भी किरण रेड्डी को एक बागी कांग्रेस के रूप में नहीं जाना गया है। 24 नवंबर 2010 को उन्होंने रोसैया का स्थान लेते हुए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और यह राजनीति में उनकी एक बहुत बड़ी छलांग थी।
लेकिन अब किरण कुमार रेड्डी अलग तेलंगाना राज्य के मसले पर कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व के साथ ही दो दो हाथ करने को तैयार दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के विभाजन करने के लिए निर्णय लेते समय और उसकी प्रक्रिया अपनाते समय सभी नियम कायदों और परंपराओं को ताक पर रखा जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व का पता नहीं चल पा रहा है कि वह किरण कुमार रेड्डी पर कैसे लगाम लगाए। उधर श्री रेड्डी केन्द्र की सभी योजनाओ ंपर पानी फेरने के लिए अपनी ओर से पूरी तरह तैयार हैं। किरण रेड्डी से कांग्रेस छुटकारा भी नहीं पा सकती, क्योंकि वे अपना पद छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं हैं। एक टीवी शो में उन्होंनंे हाल ही में कहा कि पद छोड़ना समस्या का समाधान नहीं है। वे इस मसले पर बहस करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे राज्य के लोगों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि प्रदेश का एक रहना क्यों जरूरी है। आंध्र प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी दिग्विजय सिंह हैं। वे रेड्डी को लगातार मना रहे हैं कि वे खुद भी लाइन पर आएं और विरोध कर रहे कांग्रेसियों को भी लाइन पर लाएं, पर इसके लिए रेड्डी मान नहीं रहे हैं।
किरण रेड्डी शुरू से ही साफ साफ कह रहे हैं कि वे इस विभाजन का पक्षकार कभी भी नहीं बन सकते। कहा जा रहा है कि सीमान्ध्र्रा क्षेत्र में हो रहे आंदोलन को मुख्यमंत्री ही उकसा रहे हैं। वे विभाजन के विधेयक को विधानसभा में पराजित करना चाहते हैं, क्योंकि सीमांध्र्रा क्षेत्र से आने वाले सभी 179 विधायक विभाजन के खिलाफ हैं और उनके द्वारा इस विधेयक के खिलाफ मत देने से यह विधेयक विधानसभा में पराजित हो जाएगा। हालांकि सच यह भी है कि इस विधेयक को विधानसभा की राय जानने के लिए वहां भेजा जाता है और विधानसभा की राय मानने के लिए केन्द्र सरकार और संसद बाध्य नहीं है। विधानसभा की राय के खिलाफ भी संसद से पारित करवाकर प्रदेश का विभाजन किया जा सकता है। अब कांग्रेस आलाकमान चाहती है कि विधानसभा में इस पर मतदान ही नहीं हो। दूसरी तरफ किरण कुमार रेड्डी इस विधेयक के खिलाफ विधानसभा के बहुमत को दिखाने के बाद सदन में ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके पास इस समय दो विकल्प बचे हुए हैं। वे या तो अपनी खुद की पार्टी का गठन कर सकते हैं अथवा वे जगनमोहन की पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
संसद के इसी सत्र में तेलंगाना विधेयक को पारित करवाना केन्द्र सरकार के लिए जरूरी है। यदि इस सत्र में यह पारित नहीं हुआ, तो फिर आगामी फरवरी महीने में होने वाले सत्र में तो उस पारित करवाना अनिवार्य ही होगा। यदि वैसा नहीं हो पाया, तो फिर लोकसभा चुनाव के पहले तेलंगाना का गठन हो ही नहीं पाएगा। (संवाद)
क्या कांग्रेस तेलंगाना की गुत्थी को सुलझा पाएगी?
किरण रेड्डी को संभालना आसान नहीं
कल्याणी शंकर - 2013-11-15 10:58
केन्द्र की यूपीए सरकार आगामी 9 दिसंबर को सोनिया गांधी के जन्म दिन पर तेलंगाना राज्य के गठन का विधेयक संसद में पेश करना चाहती है। सोनिया के निदेश पर कांग्रेस के नेताओं ने राज्य के गठन की प्रक्रिया की तिथियों को तय किया है। 18 नवंबर को तेलंगाना पर बने मंत्रियों का समूह विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप से स्वीकार कर लेगा। उसके बाद उसे मंत्रिमंडल में भेजा जाएगा। उसके बाद 21 नवंबर तक उसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाएगा। उसके बाद राष्ट्रपति उसे आंध्र प्रदेश विधानसभा में भेज सकते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को कहा गया है कि वह अपने प्रदेश की विधानसभा के सत्र को 25 नवंबर को आहूत करें और उसमें इस विधेयक पर विचार विमर्श किया जाय।