केरल में गुस्सा फैलना का मुख्य कारण कस्तूरीरंजन पैनल की रिपोर्ट को लागू करने में दिखाई गई हड़बड़ी है। उस पैनल ने पश्चिमी घाट के 37 फीसदी हिस्से पर रोक लगाने का सुझाव दिया था। उसकी रिपोर्ट आने के बाद केरल सरकार ने भी एक कमिटी का गठन कर डाला था, जो कस्तूररंजन रिपोर्ट पर किसानों अब अन्य प्रभावित लोगों की राय जानने की कोशिश कर रही थी। केन्द्र सरकार ने उस कमिटी की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करने की मांग भी ठुकरा दी और कस्तूरीरंजन रिपोर्ट को लागू कर दिया।

इस रिपोर्ट के अमल की घोषणा के खिलाफ केरल में हड़ताल का आयोजन किया गया और इस हड़ताल को उन जिलों में शतप्रतिशत सफलता मिली, जो इस रिपोर्ट के अमल से प्रभावित होने वाले हैं। वे जिले हैं- कोझिकोडे, वेनाड, इडुकी, पथनमथिट्टा, कोट्टायम और पलक्कड।

इसमें कोई शक नहीं कि केन्द्र सरकार के इस फैसले ने कांग्रेस नेतृत्व वाली केरल की यूडीएफ सरकार की परेशानियों को बढ़ा डाला है। प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रमेश चेनिंथाला ने इस फैसले पर राज्य की अप्रसन्नता से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अवगत कराने के लिए मिलने का समय मांगा है। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने भी बिना राज्य सरकार को विश्वास में लिए और इस रिपोर्ट में कुछ बदलाव करने की उसकी मांग को नजरअंदाज किए जाने पर अपना रोष व्यक्त किया है।

कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि उसके सहयोगी केरल कांग्रेस (मणि) ने इस मसले पर विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन का खुला एलान कर दिया है।

केसी(एम) के अध्यक्ष वित्तमंत्री के एम मणि के इस फैसले ने कांग्रेस की स्थिति प्रदेश में हास्यास्पद बना दी है। पहले से ही खबर आ रही थी मणि गुट विपक्षी एलडीएफ के नजदीक आ रहा है। लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ मणि गुट की विपक्ष के साथ बढ़ रही नजदीकी के खास मायने होते हैं।

यह किसी से छिपा हुआ तथ्य नहीं है कि केरल कांग्रेस (मणि) आजकल कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि उनके बेटे कोट्टायम के एमपी जोस के मणि को केन्द्र सरकार में मंत्री बनाने की उनकी मांग को पूरा नहीं किया जा रहा है।

मणि गुट कांग्रेस से कोट्टायम के अलावा एक और सीट भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए लेना चाहता है। केसीएम के जोसफ गुट इड्डुकी सीट पाने की मांग कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले केसी (जोसफ) का केसी(मणि) में विलय हो गया था। उसके पहले जोसफ गुट एलडीएफ का हिस्सा हुआ करता था। इस समय इड्डुकी सीट पर पी टी टाॅमस काबिज हैं। वे मुख्यमंत्री चांडी के बेहद करीबी हैं। कांग्रेस उन्हें मणि गुट को खुश करने के लिए बलि का बकरा बनाना नहीं चाहती।

मणि गुट का कस्तूरीरंजन रिपोर्ट के लागू किए जाने पर चिंतित होना स्वाभाविक है। पश्चिमी घाट की घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस रिपोर्ट के लागू होने से यहां के लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा और मणि गुट का मुख्य राजनैतिक आधार ही यही क्षेत्र है। पार्टी अपने जनाधार को प्रभावित करने वाली इस रिपोर्ट के अमल का पचा पाने की स्थिति में नहीं है।

कहने की जरूरत नहीं कि चांडी सरकार अब अपने आपको तलवार की धार पर पा रही है। यदि यह केन्द्र को इस रिपोर्ट पर अमल करने से रोक नहीं पाती है, तो केरल कांग्रेस (मणि) विपक्षी एलडीएफ के खेमे में दिखाई पड़ सकती है। (संवाद)