पिछले कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ कि कांग्रेस कार्यकत्र्ताओं का एक बड़ा जमावड़ा लखनऊ में था। उस जमावड़े में प्रदेश भर के कांग्रेस जन शामिल थे और सांसदों की भी भागीदारी थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरन्द्र राजपूत का कहना है कि उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में राहुल गांधी की रैलियां सफल हो रही हैं और प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री और प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री के नेतृत्व में पार्टी कार्यकत्र्ताओं के मनोबल बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि लखनऊ में खाद्य सुरक्षा विधेयक के अमल न किए जाने के खिलाफ इतना बड़ा प्रदर्शन लखनऊ में हुआ और अखिलेश सरकार के लाठी चार्ज के सामने भी प्रदर्शनकारी नहीं झुके।

लोकसभा चुनाव के पहले विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकत्र्ताओं का भारी पैमाने पर इकट्ठा होना खास मायने रखता है। यह बहुत जरूरी भी था, क्योंकि कांग्रेसियों के हौसले विधानसभा चुनाव की हार के बाद पस्त थे। अब उनके हौसले में आफजाई दिखाई पड़ रही है।

इस आयोजन की सफलता के लिए यदि किसी एक व्यक्ति को श्रेया दिया जा सकता है, तो वे हैं मधुसूदन मिस्त्री। जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का श्रेय उन्हीें को दिया जाना चाहिए। इस मजबूती के कारण ही यह विरोध प्रदर्शन सफल हुआ।

पिछले कुछ महीनों से मधुसूदन मिस्त्री उत्तर प्रदेश के अनेक इलाको ंका दौरा कर रहे थे। वे घूमघूम कर कांग्रेसियों से मिल रहे थे और उनसे सीधे संवाद स्थापित कर रहे थे। इसके कारण जमीनी स्तर से कांग्रेसियों को सक्रिय करने में सफलता मिली है।

श्री मिस्त्री ने अपनी कार्यशैली को अपने पूर्ववर्ती प्रभारियों से अलग रूप प्रदान किया है। पहले के प्रभारी किसी स्थान विशेष पर जाते थे। वहां एक सभा होती थी। प्रभारी सभा को संबोधित करके लखनऊ या दिल्ली लौट जाया करते थे।

पर मिस्त्री स्थानीय कार्यकत्र्ताओं से ही नहीं, बल्कि साधारण सदस्यों से भी बातचीत करते हैं। वे उनसे उनकी और पार्टी की समस्या पर विचार विमर्श करते हैं और सबको महत्व भी देते हैं। इसके कारण बूथ स्तर पर के कार्यकत्र्ताओं का मनोबल बढ़ रहा है।

राहुल गांधी और मधुसूदन मिस्त्री जिला स्तर पर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं। उन्होंने जिला स्तर पर संगठन में भारी फेरबदल भी किए।

लोकसभा उम्मीदवारों के चयन में भी इस बार जिला कमिटियों की सिफारिशों को महत्व दिया जा रहा है। ऐसा संभवतः कांग्रेस में पहली बार हो रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि पहली बार पार्टी ने निर्णय प्रक्रिय में स्थानीय नेताओं को महत्व देना शुरू किया है।

प्रदर्शन की सफलता से उत्साहित होकर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री का कहना है कि खाद्य सुरक्षा कानून को लागू नहीं किए जाने के खिलाफ किए जा रहे आंदोलन की तो यह शुरुआत मात्र थी।

वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक रमेश दीक्षित का कहना है कि इस प्रदर्शन में कांग्रेसजनों की बड़ी भागीदारी कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगी, क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस मरी दिखाई पड़ रही है।(संवाद)