विजय माल्या द्वारा दी गई वह जानकारी काफी विस्फोटक थी। इसमें एक दावा तो यह था कि माल्या पैसा वापस करना चाहता था, लेकिन अरुण जेटली ने उसके द्वारा पैसा वापस करने में कोई रुचि नहीं ली। दूसरा विस्फोटक दावा यह था कि वह अरुण जेटली को कहकर ही भारत से भागा था। माल्या के दोनों दावे वित्त मंत्री अरुण जेटली की देश के प्रति निष्ठा पर सवाल खड़े कर देते हैं। इनसे लगता है कि यदि चाहते तो अरुण जेटली बैंकों को पैसा वापस दिला सकते थे और यदि वे चाहते तो विजय माल्या को भारत छोड़कर भागने से रोक भी सकते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि भारतीय बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये का कर्जदार छेश से भागने वाला है।
विजय माल्या भगोड़ा है। उसकी बातों पर हम आंख मूंद कर विश्वास नहीं कर सकते। वह अपने को बचाने के लिए झूठ भी बोल सकता है। इसलिए उसके दावों पर अरुण जेटली क्या कहते हैं, यह जानना जरूरी था। लेकिन जब वित्त मंत्री जेटली की विजय माल्या के बयानों पर प्रतिक्रिया आई, तो इससे पता चला कि विजय माल्या पूरी तरह झूठ भी नहीं बोल रहा था। वित्त मंत्री जेटली ने विजय माल्या के दावों की प्रतिक्रिया में विरोधाभाषी बयान दे डाले। एक सुर में तो उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री बनने के बाद उन्होंने विजय माल्या को कभी भी घर मे या दफ्तर में मिलने के लिए अप्वाइंटमेंट ही नहीं दिया और इसलिए उसके साथ मुलाकात का कोई सवाल ही नहीं।
लेकिन दूसरे स्वर में उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि विजय माल्या संसद भवन में उनसे मिले थे और उनके हाथ में बैंकों से लिए गए लोन के सेटलमेंट को कोई प्रस्ताव पत्र भी था, जिस पर विचार करने से उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि बैंको के पास वह अपना प्रस्ताव ले जाय। अरुण जेटली की इतनी स्वीकारोक्ति भी विजय माल्या के दावे को पुष्ट करती है। अरुण जेटली एक तरफ तो कहते हैं कि उनकी मुलाकात ही नहीं हुई और दूसरी तरफ कहते हैं कि वह संसद मंे मिले थे। वित्त मंत्री को यह पता होना चाहिए कि मुलाकात आखिकरकार मुलाकात होती है। भले वह पहले से अप्वाइंटमेंट लेकर हो या बिना किसी अप्वांटमेंट के अकस्मात मुलाकात हो। वित्त मंत्री यह भी कह रहे हैं कि माल्या किसी सेटलमेंट की बात भी कर रहा था। सवाल उठता है कि जब भारतीय बैंकों का 9 हजार करोड़ डूबने की आशंका हो, तो उसे बचाने के लिए वित्त मंत्री की हैसियत से क्या जेटली का यह फर्ज नहीं बनता था कि उस प्रस्ताव को वह देखें?
विजय माल्या द्वारा लिया गया 9 हजार करोड़ रुपये का लोन किसी एक बैंक का नहीं था, बल्कि अनेक बैंकों का था और वित्त मंत्री होने के नाते अरुण जेटली का यह फर्ज बनता था कि यदि उसे चुकाने का कोई प्रस्ताव उनके पास आता है, तो उस पर वे विचार करें और बैंको के उच्च प्रबंधको की बैठक बुलाकर उस पर चर्चा करें। आखिर वे वित्त मंत्री हैं किसलिए? यह सच है कि बैंकों के दैनिक कामों मे दखल देना वित्त मंत्री का काम नहीं है, लेकिन जब मामला एक से अधिक बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये डूबने का हो, तो वित्त मंत्री को उसकी उगाही में दिलचस्पी तो लेनी ही चाहिए। जाहिर है, वित्त मंत्री ने मंत्री के रूप में अपने दावित्वों का निर्वाह नहीं किया, क्योंकि बैंकों का मामला वित्त मंलायय की जिम्मेदारी है।
जेटली पर दूसरा आरोप विजय माल्या के उस बयान के बाद यह लग गया है कि उन्होंने माल्या को भागने का मार्ग प्रशस्त किया। यदि वे चाहते तो माल्या को भागने से रोका जा सकता था, क्योंकि उन्हें पता था कि माल्या भागने वाला है। वित्त मंत्री कहते हैं कि माल्या से उनकी रास्ता चलते बातचीत हुई थी, लेकिन कांग्रेस के नेता राज्यसभा सदस्य पीएल पुनिया का दावा है कि 1 मार्च 2016 को जेटली और माल्या के बीच में हुई वह बात रास्ता चलते हुई बात नहीं थी, बल्कि संसद के सेंट्रल हाॅल में दोनों कुछ समय तक एक कोने में खड़े खड़े बात कर रहे थे और कुछ देर के बाद बेंच पर बैठकर बात करते रहे। पुनिया के अनुसार दोनों के बीच 15 से 20 मिनट तक बातचीत हुई। यदि पुनिया का यह दावा सही है, तो जेटली देश को माल्या के साथ हुई बातचीत के बारे में गुमराह कर रहे हैं।
पर सवाल उठता है कि हम पीएल पुनिया की बात को सच क्यों मानें? राजनेता एक दूसरे पर हमला करते समय गलतबयानी भी करते हैं। लेकिन पुनिया के दावे की पुष्टि या खंडन संसद के सेंट्रल हाॅल में लगे सीसीटीवी कैमरों से भी हो सकता है। पुनिया उसकी जांच की मांग कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि झूठ साबित होने पर वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अच्छा अवसर है। यदि उन्हें अरुण जेटली पर पूरा भरोसा है तो संेट्रल हाॅल के सीसीटीवी कैमरों के पुनिया द्वारा बताए गए समय के एक घंटा के सारे फुटेज सार्वजनिक कर दिखा दे कि जेटली उसमें नहीं है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो माना जाएगा कि पुनिया सच बोल रहे हैं और विजय माल्या को भगाने मे अरुण जेटली का हाथ है। (संवाद)
माल्या को देश से किसने भगाया?
सेंट्रल हाॅल की सीसीटीवी फुटेज में इसका सबूत हो सकता है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-15 11:41
बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये लेकर विदेश भागने वाले विजय माल्या पर चर्चा जोरो पर है। ताजा चर्चा का कारण इंग्लैंड की एक अदालत में चला वह मुकदमा है, जिसे यह फैसला करना है कि माल्या को भारत वापस भेजा जाय या नहीं। उस अदालत में अपने बचाव में माल्या ने हर संभव प्रयास किया। अदालत से बाहर भी वह अपना बचाव करता रहा और कहा कि वह बैंकों का सारा रुपया वापस करने के लिए तैयार था और इसके लिए उसने एक प्रस्ताव भी तैयार किया था। उस प्रस्ताव को लेकर वह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला भी था, लेकिन जेटली ने उसके प्रस्ताव पर विचार नहीं किया और फिर उसने उसी समय उन्हें कह दिया कि वे अब भारत छोड़कर इंग्लैंड जा रहे हैं।