जिस तरह से मायावती को चंद्रशेखर रावण ने बुआ कहा उससे इस युवा दलित नेता के मन में उनके लिए क्या भाव है इसका पता चलता है। उस युवा नेता ने साबित किया है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में वह खासा लोकप्रिय है और उसकी लोकप्रियता से मायावती डरी हुई हैं।

रावण द्वारा बुआ कहे जाने पर मायावती तिलमिला गईं। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर केवल अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने मे रुचि रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और गरीबों की एकमात्र नेता हैं।

जेल से रिहा होने के तुरंत बाद, चंद्रशेखर रावण ने कहा वह दलितों के लिए संघर्ष और भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए बुआजी (मायावती) का सम्मान करते हैं और उनके समर्थन की घोषणा करते हैं।

ऐसा लगता है कि मायावती चंद्रशेखर रावण के उदय से डरते हैं क्योंकि उन्हें न केवल दलितों बल्कि समाज के अन्य वर्गों और अन्य राज्यों में काम करने वाले नेताओं का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने पहले रावण को भाजपा-आरएसएस के एजेंट के रूप में खारिज करने की कोशिश की थी।

सहारनपुर जिले को मुख्यालय बनाकर भीम आर्मी के नेता के रूप में चंद्रशेखर रावण दलितों के हितों के लिए लड़ रहे हैं। भूमि वितरण और उनके सशक्तिकरण पर उनका ज्यादा जोर है। उन्होंने अन्य राज्यों के नेताओं के समर्थन से नई दिल्ली में जंतर मंतर पर एक प्रभावशाली रैली आयोजित करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। युवा दलितों के बीच चंद्रशेखर रावण की लोकप्रियता में वृद्धि का कारण बीआर अम्बेडकर की उनकी विचारधारा है और इसके अलावा सबकी उन तक पहुंच है।

उनकी रिहाई के तुरंत बाद चंद्रशेखर रावण ने घोषणा की कि वह न केवल बीजेपी का विरोध करेंगे बल्कि 2019 के चुनावों में केंद्र से भगवा पार्टी को हटाने के लिए काम कर रही ताकतों में खुद को शामिल करेंगे।

इसके विपरीत मायावती अपने अनुयायियों के लिए बिल्कुल सुलभ नहीं है। चाहे वह सत्ता में हों या सत्ता से बाहर, वह खुद को अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकत्र्ताओं की पहुंच से बाहर रखती है। वह केवल कुछ ही नेताओं के संपर्क में रहती हैं। उनकी जीवनशैली हमेशा विवादास्पद रही है।दलित कार्यकर्ता दारापुरी ने मायावती को अपने मतदाताओं के विश्वास को धोखा देने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए सत्ता में होने पर कुछ भी ठोस नहीं करने के लिए दोषी ठहराया।

जब से मायावती ने छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी का समर्थन करने और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की, तो यह लगने लगा कि भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने में उनकी दिलचस्पी नहीं है। राजनैतिक पर्यवेक्षक आने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाने के प्रयासों के लिए इसे एक गंभीर झटका मान रहे हैं। (संवाद)