हालांकि धोनी ने जनवरी 2017 में ही वनडे कप्तानी छोड़ दी थी किन्तु दोबारा मौका मिलने पर 696 दिनों के लंबे अंतराल के बाद मैदान पर कप्तानी करने उतरे धोनी ने एक नया रिकाॅर्ड कायम कर दिया। अपने वनडे कैरियर के 326वें मैच में धोनी ने यह रिकाॅर्ड कायम किया और इस नए रिकाॅर्ड के साथ ही वो सर्वाधिक वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले भारत के पहले और दुनिया के तीसरे कप्तान बन गए। पहले स्थान पर 230 मैचों के साथ आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और दूसरे स्थान पर 218 मैचों के साथ न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग हैं। हालांकि यह अलग बात है कि धोनी की कप्तानी में खेले गए इस मैच में टीम जीती नहीं बल्कि मैच टाई हो गया।

एक ओर जहां कुछ माह पहले तक धोनी के सन्यास लेने की अटकलें छाई हुई थी, वहीं धोनी एक बार फिर नए अवतार में सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन और इंग्लैंड से मिली करारी हार के बाद तो यह भी कहा जाने लगा है कि अगर धोनी कप्तानी नहीं छोड़ते तो भारतीय टीम को ये दिन नहीं देखने पड़ते। हालांकि धोनी का कहना है कि उन्होंने कप्तानी सही समय पर छोड़ी और विराट को मौका दिया लेकिन जिस तरह ओवल मैदान पर सीरिज के आखिरी टेस्ट मैच में कप्तान विराट कोहली रिव्यू लेने के मामले में खेल विशेषज्ञों द्वारा सवाल उठाए गए और दूसरी ओर अम्पायर के फैसले के बाद रिव्यू लेने के धोनी के शानदार रिकाॅर्ड को याद कर धोनी की सराहना हुई, उससे अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि धोनी की अभी टीम इंडिया की कितनी जरूरत है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वाॅन ने तो ट्वीट भी किया कि विराट दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं लेकिन दुनिया के सबसे घटिया रिव्युअर भी हैं जबकि इस मामले में धोनी की प्रशंसा करते हुए खुद विराट ने ही गत वर्ष कहा था कि रिव्यू के मामले में धोनी का योगदान अमूल्य है और वे डीआरएस को लेकर धोनी पर आंख मूंदकर भरोसा कर सकते हैं।

इंग्लैंड सीरिज के बाद पूर्व बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग ने कहा था कि 2019 के वल्र्ड कप तक विकेटकीपर बल्लेबाज धोनी का वनडे टीम में रहना जरूरी है। दरअसल भारतीय क्रिकेट जगत ने विश्व को अब तक कई ऐसे धुरंधर खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अपने जलवों से हर किसी को मंत्रमुग्ध किया है किन्तु इनमें से इक्का-दुक्का नाम ही ऐसे हैं, जो सदा खेल प्रेमियों के दिलों पर राज करते रहे हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हालांकि विराट कोहली और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर सर्वाधिक लोकप्रिय हैं और महेन्द्र सिंह धोनी उर्फ माही तीसरे नंबर पर आते हैं लेकिन पिछले दिनों ‘यूगव’ द्वारा कराए गए एक आॅनलाइन सर्वे के मुताबिक अपने कैरियर के आखिरी दौर में चल रहे धोनी भारत के सर्वाधिक पसंदीदा खिलाड़ी हैं और पसंदीदा क्रिकेटरों की होड़ में उन्होंने सचिन और विराट को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे में धोनी को 7.7 फीसदी, सचिन को 6.8 और विराट को 4.8 फीसदी मत मिले।

कभी छक्कों के बादशाह माने जाते रहे धोनी की गिनती सर्वाधिक सफल भारतीय कप्तानों में होती है। कभी वो विकेट कीपिंग के लिए सराहे जाते थे किन्तु उन्होंने अपने बल्ले से मैदान पर ऐसे जलवे दिखाए कि वो एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में उभरकर सामने आए। सट्टेबाजी के चलते दो वर्षों का निलंबन झेलने के बाद आईपीएल में चंद माह पहले चेन्नई सुपरकिंग्स को जिस प्रकार धोनी ने जीत दिलाई थी, उसके बाद तो वो अपराजेय माने जाने लगे हैं। यही नहीं, अपने उम्रदराज खिलाड़ियों के बल पर आईपीएल का खिताब जीतकर माही ने यह भी साबित कर दिखाया था कि खेल जगत में प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और मैदान में अच्छे प्रदर्शन का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता। धोनी द्वारा उम्र के बजाय बेहतर प्रदर्शन और फिटनेस को जीत को मूलमंत्र बनाया जाना चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए कारगर साबित हुआ था और अधिकांश बड़ी उम्र के खिलाड़ियों की इस टीम ने हैदराबाद की युवा खिलाड़ियों की टीम को धूल चटाकर इस मिथक को भी तोड़ डाला था कि एक उम्र के बाद खिलाड़ियों को खेल से सन्यास ले लेना चाहिए। जब-जब धोनी की रिटायरमेंट को लेकर चर्चाएं शुरू हुई, धोनी हर बार एक नए अवतार में सामने आए हैं।

क्रिकेट में अक्सर एक बात कही जाती है कि विकेटकीपर अच्छे बल्लेबाज नहीं होते। हालांकि विदेशों में इक्के-दुक्के ऐसे विकेटकीपरों के उदाहरण जरूर मिलते रहे हैं, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी से भी क्रिकेट प्रेमियों को हतप्रभ किया पर कम से कम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ सालों पहले तक कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि भारत में ऐसा कोई विकेट कीपर देखने को मिलेगा, जिसकी बल्लेबाजी की भी पूरी दुनिया कायल होगी। विकेट कीपर के तौर पर अपने कैरियर की शुरूआत करने वाले धोनी अपनी आतिशी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को चकाचैंध कर बहुत ही कम समय में दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों की श्रेणी में गिने जाने लगे और उन्हें ‘छक्कों का बादशाह’ भी कहा जाने लगा। किसी भी बल्लेबाज की आक्रामकता का अंदाजा खासतौर से उसके छक्कों से लगाया जाता है और धोनी तो इस मामले में सदैव कमाल करते रहे हैं। कई मौकों पर देखा गया कि जब मैच जीतना भारत के लिए असंभव सा प्रतीत हो रहा था, उन मैचों को अपने ताबड़तोड़ शाॅट्स के जरिये माही ने आसानी से भारत की झोली में डाल दिया। एक बार भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने भी यह स्वीकार किया था कि टीम में धोनी की मौजूदगी से ऐसा लगता है कि वह मैच का रूख आसानी से बदल सकते हैं।

घटना करीब 11 साल पुरानी है, जब 2007 में विश्व कप में बुरी तरह पराजित होकर स्वदेश लौटी टीम इंडिया के दिग्गजों सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीरेन्द्र सहवाग इत्यादि को देश में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था, जगह-जगह उनके पोस्टर जलाए जा रहे थे, उसी वर्ष टी-20 का पहला विश्व कप होना था और निराशा के दौर से गुजर रही टीम इंडिया के सभी दिग्गजों ने इस प्रतियोगिता का हिस्सा बनने से इन्कार कर दिया था, तब धोनी ने टी-20 के विश्व कप में टीम इंडिया की कमान संभाली थी और टीम इंडिया में तमाम नए खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद अपने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार कर विश्व कप पर कब्जा करने में भी सफल हुए थे। अपनी कप्तानी के दौर में अपनी कमाल की रणनीति और निर्णयों से अपने खिलाड़ियों को चैम्पियन बनने के आत्मविश्वास से लबरेज करते रहे ‘कैप्टन कूल’ धोनी सफल क्रिकेट कप्तानी की नई परिभाषाएं लिखते रहे हैं। दरअसल टीम प्रबंधन में माहिर महेन्द्र सिंह धोनी एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो बखूबी जानते हैं कि उन्हें अपने किस खिलाड़ी से कब और किस तरह काम लेना है। यही उनकी सफलता का मूलमंत्र भी है। बहरहाल, बतौर विकेट कीपर हो या बल्लेबाज अथवा कप्तान, हर मोर्चे पर महेन्द्र सिंह धोनी सफल रहे हैं। (संवाद)