हरित क्रांति के अंतर्गत बीजों की नई किस्मों, मशीनी खेती, पोषकों, कीट नाशकों और ज्ञानाधारित ईजादों को विभिन्न कृषि वातावरण क्षेत्रों के मद्देनजर विकसित किया जाता है।
इस पहल को कार्यान्वित करने के लिए नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान 18 मार्च 2010 को बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ,़ ओडिशा, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल के राज्य कृषि सचिवोंकृषि निदेशकों की शुरुआती बैठक बुलाई गई थी।
उक्त बैठक में यह बात उठाई गई थी कि पूर्वी क्षेत्र में मुख्यत: धान आधारित कृषि प्रणाली मौजूद है। इसलिए धान सहित चना, तिलहन और दलहन आधारित कृषि प्रणाली के तहत उत्पादकता बढा़ने के प्रयासों पर बल दिया जाना चाहिए। कम उत्पादकता वाले जिलों को ध्यान में रखकर इन राज्यों में फसल विकास कार्यक्रम तथा योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि उनके जरिए फसल बढा़ई जा सके।
इस बात को ध्यान में रखते हुए बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक राज्य एक रणनीतिक योजना तैयार करे जिसमें प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन को प्राथमिकता दी जाए ताकि विकास की अपार क्षमता होने के बावजूद कम कृषि उत्पादकता की रुकावटों को दूर किया जा सके।
इस स्वीकृत रणनीतिक योजना के आधार पर राज्य सरकारों ने एक कार्य योजना तैयार की जिसमें उन स्थलों को चिन्हित किया गया है जहां पहलों को कार्यान्वित किया जा सके। राज्य के मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली एसएलएससी ने कृषि मंत्रालय और योजना आयोग के प्रतिनिधियों के साथ कार्य योजना पर विचार किया। जो रणनीतियां अपनार्इं जा रही हैं आम तौर पर उन्हें पूर्वी क्षेत्र में उत्पादकता और पैदावार बढा़ने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
पूर्वी भारत में हरित क्रांति का विस्तार
विशेष संवाददाता - 2010-06-04 11:26
देश के पूर्वी क्षेत्र यानी बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ,़ ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक हरित क्रांति का फैलाव करने के लिए केंद्रीय बजट 2010 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि का आबंटन किया गया है।