ऐसे समय में जब कई मुख्यमंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी एकता का प्रदर्शन करने के लिए कार्यक्रम में भाग लिया, अखिलेश यादव की अनुपस्थिति ने न केवल कांग्रेस के साथ मतभेदों को प्रदर्शित किया बल्कि विपक्षी एकता के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला।
समाजवादी पार्टी यूपी में मुख्य विपक्षी पार्टी है, जिसका मुस्लिम समुदाय पर जबरदस्त प्रभाव है। 2022 के विधानसभा चुनावों में जिसका प्रदर्शन भी हुआ था, जब पार्टी को वोट प्रतिशत के साथ-साथ सीटों में भी बढ़त मिली थी।
समाजवादी पार्टी को यह अहसास है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ जगह साझा करने से अंततः मुस्लिम वोटों का नुकसान होगा।पहले समाजवादी और कांग्रेस में एक समझ थी कि उन्होंने श्रीमती सोनिया गांधी और मुलायम सिंह यादव के परिवार के सदस्यों के खिलाफ कभी उम्मीदवार नहीं खड़ा किया।लेकिन हाल ही में अपने अमेठी दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी वहां से चुनाव लड़ेगी।
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि अमेठी में श्रीमती स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हराया था।उन्होंने केरल से लोकसभा सीट वायानाडमें जीतकर अपनी जगह बनायी।
समाजवादी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ प्रयोग किया जब दोनों दलों ने "यूपी को ये साथ पसंद है" के नारे के साथ गठबंधन किया। उस चुनाव के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने कई संयुक्त सभाओं को संबोधित किया। लेकिन गठबंधन बुरी तरह विफल रहा और अंततःअखिलेश यादव को आशंका हुई की सत्ता में आने में यह गठबंधना मदद न करे। इसके परिणाम स्वरूप दोनों पार्टियों ने गठबंधन तोड़ दिया।
समाजवादी पार्टी के सहयोगी रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने बेंगालुरु में सिद्धारमैया के शपथ समारोह में भाग लेकर राजनीतिक परिपक्वता दिखायी।इससे पहले भी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जयंत चौधरी ने अपनी पार्टी के नेताओं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का स्वागत करने के लिए कहा था।कुछ जगहों पर रालोद के नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए यात्रा में शामिल भी हुए थे।
हालांकि अखिलेश यादव को कांग्रेस की ओर से भारत जोड़ों यात्रा में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया था लेकिन उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बनाये रखी। ऐसे समय में जब बसपा नेता मायावती का राजनीतिक ग्राफ गिर रहा है और पार्टी ने सबसे खराब प्रदर्शन देखा है। वह 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट ही जीत सकी।
जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रभाव रखने वाले युवा दलित नेता चंद्र शेखर रावण तक पहुंचे।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को जबर्दस्तसमर्थन मिला। जयंत चौधरी ने इन संकेतों को समझ लिया है। यही कारण है कि वह अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए अधिक इच्छुक हैं।
जयंत चौधरी इस बात से भी वाकिफ हैं कि रालोद-समाजवादी पार्टी का गठबंधन हाल के यूपी निकाय चुनावों के दौरान टूट गया था, जब दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े थे।
अब देखना यह होगा कि अगले कुछ महीनों में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में खुद को किस तरह से संचालित करती है।उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ता यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या राहुल गांधी पार्टी के भाग्य को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य में एक और यात्रा का नेतृत्व करते हैं या नहीं।
कर्नाटक विधानसभा चुनावों के विश्लेषण से यह भी पता चला कि पार्टी को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से मदद मिली थी।उत्तर प्रदेश कांग्रेस भविष्य में राहुल गांधी द्वारा रोड शो और यात्रा सहित पार्टी आलाकमान से पुनरुद्धार योजना का भी इंतजार कर रही है।(संवाद)
सपा प्रमुख अखिलेश उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को पटाने को बेताब
प्रदीप कपूर - 2023-05-23 11:51
लखनऊ: शनिवार को बेंगालुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अनुपस्थिति ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखे मतभेदों को उजागर कर दिया है। शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि वह पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण समारोह में शामिल नहीं होंगे।