दोनों मामले का संबंध किसी न किसी रूप में अमेरिका से है। भोपाल मामले में असली अपराधी अमेरिका का है तो मेक्सिको की खाड़ी हादसे के मामले में अमेरिका एक भुक्तभोगी। जाहिर है दोनों मामले में अमेरिका दो अलग तरीके से शामिल है और दोनों में उसका रवैया दो तरह का है। वह अपने लोगों के प्रति तो बहुत चिंतित है, लेकिन भारत के लोगों की उसे परवाह नहीं है। इससे यह साबित हो जाता है कि एक ही तरह की समस्या पर वह दोहरा मानदंड रखता है।
भोपाल गैस हादसा मेक्सिको के तेल हादसे से ज्यादा भयानक था। 15 हजार से ज्यादा लोग भोपाल हादसें में मारे गए थे। 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। 26 साल के बाद उसका असर अभी भी लाखों जिंदा लोगों पर है। उनमें हजारों अभी तक 25 साल पूरे होने के बावजूद अपने इलाज के लिए अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं।
यानी दुनिया के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा हादसा भोपाल की गैस त्रासदी है, जिसके लिए एक अमेरिकी कंपनी जिम्मेदार है। दूसरी तरफ मेक्सिकों की खाड़ी में हुए तेल हादसे को देखें। वह हादसा इसी साल हुआ है और तेल अभी भी फैल रहा है। उसमें 11 लोगों की जान गई है और उस लीक के कारण समुद्री जीवो और आसपास की वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचा है। तटीय इलाके के बंदरगाह भी प्रभावित हुए हैं और उसके कारण अमेरिका के अने लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।
हादसा तो हादसा है। दो हादसों के बीच में तुलना करना प्रायश् टीक नहीं होता, लेकिन फिर भी यदि देखें तो भोपाल का हादसा मेक्सिको की खाड़ी के हादसे से बहुत ही ज्यादा गंभीर है, लेकिन अमेरिका मेक्सिको की खाड़ी को लेकर तो बहुत ही ज्यादा हाय तोब्बा मचा रहा हैख् पर भारत के भोपाल हादसे पर उसका रवैया उदासीन है।
अमेरिकी हितों का नुकसान होते देख राष्ट्रपति ओबामा भी बौखलाए हुए हैं और उस हादसे के लिए ब्रिटेन की कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम को सीधे तौर पर जिम्मेदार बता रहे हैं। वे ब्रिटिश पेट्रोलियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को तो सीधे तौर पर बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिकी नागरिक एंडरसन को लेकर उनका रुख उदार है। भारत की सरकार एंडरसन को भारत लाने की बात कर रही है लेकिन अमेरिकी प्रशासन की भाषा कुछ और है।
यानी अमेरिका ब्रिटिश पेट्रोलियम और यूनियन कार्बाइड को एक नजरिए से नहीं देखता। वह दोनों के प्रमुखों को भी एक नजरिए से नहीं देखता। मेक्सिको की खाड़ी के तेल लकी हादसे के कारण अपने हितों की क्षतिपूर्ति के लिए वह भारी मुआवजे की उम्मीद कर रहा है और कह रहा है कि ब्रिटेन की उस कंपनी को वह मुआवजा चुकाना होगा। ब्रिटेन की कंपनी ने मुआवजे की पहली किश्त अदा भी कर दी है। लेकिन उसी पैमाने का मुआवजा भोपाल के गैस पीड़ितों को मिले, इसकी चिता अमेरिकी प्रशासन को 25 साल पहले भी नहीं थी और आज भी नहीं है।
इस तरह मेक्सिको तेल लीक और भोपाल गैस त्रासदी को लेकर अमेरिका के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश हो रहा है। (संवाद)
भारत
अमेरिका के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश
भोलाप गैस त्रासदी पर रवैया अपत्तिजनक
कल्याणी शंकर - 2010-06-18 12:25
वांशिंगटनः भोपाल गैस त्रासदी पर उघर भारत में कोर्ट का एक फैसला आया है और इधर मैक्सिको की खाड़ी में तेल लीक का एक हादसा हुआ है। भोपाल में गैस लीक का हादसा हुआ था। भोपाल के हादसे के लिए यूनियन कार्बाइड नाम की एक अमेरिकी कंपनी जिम्मेदार थी। और मेक्सिको की खाड़ी में हुए तेल लीक के लिए ब्रिटेन की एक कंपनी जिम्मेदार है।