मणिपुर में नगा समस्या तो बहुत पुरानी है, लेकिन ताजा समस्या उस समय २शुरू हुई, जब नगा नेता मुइवा ने मणिपुर स्थित अपने गांव जाने की घोषणा की। गौरतलब है कि मुइवा पिछले 40 साल से अपने गांव नहीं गए हैं और नगालैंड में रहकर ही वे अपना आंदोलन चलाते हैं। मणिपुर में अपने गांव आने की उनकी घोषणा के बाद मणिपुर प्रशासन सतर्क हो गया और उसने मुइवा को राज्य में नहीं घुसने देने का आदेश पारित कर दिया।
उस आदेश के बाद लगा कि नगालैंड और मणिपुर की पुलिस के बीच सशत्र संघर्ष हो जाएगा, क्योंकि नगालैड की पुलिस मुइवा को मणिपुर में अपनी सुरक्षा में ले जाने को तत्पर थी और मणिपुर पुलिस किसी भी सूरत में नगा नेता को अपने राज्य में प्रवेश नहीं करने देने के लि कृत संकल्प थी।
केन्द्र ने हस्तक्षेप किया और मुइवा ने मणिपुर में प्रवेश का अपना इरादा बदल दिया। लगने लगा कि एक संकट टल गया हैख् लेकिन संकट तो उसके बाद आरंभ हुआ, जब नगालैंड के कुछ छात्रों ने उस राजमार्ग को ही जाम कर दिया, जो नगालैड और मणिपुर को जोड़ता है। दोनों राज्यों की भौगालिक स्थिति ऐसी है कि मणिपुर २शेष भारत से उसी राजमार्ग के जरिए जुड़ा हुआ है।
यानी राजमार्ग का जाम कर देने के बाद मणिपुर की एक तरह से आर्थिक नाकेबंदी हांे गई और खाने का सामान व दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं का मणिपुर में भारी अभाव हो गया। मणिपुर को २शेष भारत से जोडऋने वाली एक सड़क और है, जो असम के सिलचर से होकर जाती है। लेकिन वह रास्ता काफी लंबा है और सड़क की हालत बहुत खराब है। उस पर बने पुल भी टूट रहे हैं।
नगालैंड की रोड को जाम करने के कारण सिलचर से गुजरने वाली सड़क का इस्तेमाल आरंभ हुआ, तो उसकी स्थिति और भी खराब होने लगी। केन्द्र सरकार को हवाई मार्ग का सहारा लेना पड़ा। हवाई मार्ग से दवाइयां भेजी गईं और पेट्रोल और किरासन तेल भी भेजे गए। पड़ोसी म्यान्मार से चावल खरीदकर मणिपुर के लोगों को उपलब्ध कराया गया। लेकिन करीब 24 लाख की आबादी के लिए आवश्यक सामान की आपूर्ति हवाई मार्ग से नहीं की जा सकती और असम के सिलचर से गुजरने वाली एक टूटी सड़क से भी उनकी समस्या का समाणान नहीं निकल सकता।
नगा छात्र जो कर रहे हैं उसकी मिसाल अन्य जगह मिलना मुश्किल है। यदि कोई एक देश दूसरे देश के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाना चाहता है, तो उसे संयुक्त राष्ट्र संध से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन यहां तो एक राज्य के छात्र दूसरे राज्य के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी कर रहे थे। राज्य की पुलिय चुपचाप तमाशा देखती रही और केन्द्र सरकार भी लंबे समय तक चुप रही। फिर असम में रहने वाले मणिपुर के छात्रों ने असम से नगार्लड में प्रवेश करने वाले राज मार्ग को जाम करने की धमकी दे डाली। यदि मणिपुर के छात्र वैसा कर देते, तो फिर नगालैंड की हालत भी वही हो जाती, जो नगालैंड के छात्रों ने मणिपुर की कर डाली थी।
जाहिर हैख् जो कुछ वहां हो रहा हैख् उसे हल्के से नहीं लिया जा सकता। केन्द्र सरकार को उस तरह की आर्थिक नाकंेबंदी के खिलाफ सख्त कदम उठाने ही होंगे। (संवाद)
मणिपुर की आर्थिक हालत खराब
केन्द्र को सख्त कदम उठाने होंगे
बरुण दासगुप्ता - 2010-06-19 10:20
कोलकाताः मणिपुर के खिलाफ लगाये गये प्रतिबंध को नगा छात्रों ने आंशिक रूप से हटाने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इससे हालात अभी सुधरे नहीं हैं। सड़क जाम करके नगा छात्रों ने मणिपुर के लोगों का जीना हराम कर दिया था। अभी भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है और केन्द्र को वहां की स्थिति से निबटने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।