इस तरह की सभी समस्या को नजरअंदाज किया जाता हो, वैसी बात भी नहीं है। गोरखालैड आंदोलन का मामला एक उदाहरण है। वहां गोरखा जनमुक्ति मोर्चा नगा छात्रों की तरह ही सड़क जाम कर देते हैं, जिसके कारण उत्तरी बंगाल और सिक्कम के लोगों के सामने भारी समस्या आ जाती है। वे वैसा कई बार कर चुके हैं। लेकिन जब वे वैसा करते हैं, तो उन्हें मार्ग से हटाने के लिए कार्रवाई की जाती है। यदि सरकार की ओर से कोई कमी होती है तो अदालत भी हस्तक्षेप कर सरकार को समस्या से निबटने के लिए कहती है।

लेकिन मणिपुर की उपेक्षा सरकार ही नहीं, बल्कि अदालत के द्वारा भी हो रही है। उसकी उपेक्षा से यह सवाल सहज ही उठता है कि क्या हमारे देश के नीति निर्माताओं और प्रशासकों को पूर्वात्तर राज्यों की फिक्र नहीं है? आखिर वे इस क्षेत्र की समस्या को इतनी संजीदगी से क्यों नहीं लेते, जितनी संजीदगी से दूसरे क्षेत्रों की समस्या को लेते हैं।

मणिपुर की वर्तमान समस्या नगा आंदोलन के कारण शुरू हुई है। नगा आंदोलनकारी लंबे समय से अलग राष्ट्र की मांग कर रहे थे। अब उन्होंने अलग राष्ट्र की मांग नहीं करने पर राजी हो गए हैं, लेकिन वे चाहतें हैं कि मणिपुर के उन इलाकों को नगालैंड मंे मिला दिया जायए जहां नगा जनजाति के लोग रहते हैं। यह तभी संभव हैख् जब इसके लिए मणिुपू राजी हो जाय। लेकिन मणिपुर इसके लिए कतई तैयार नहीं है। वह अपनी एक इंच जमीन भी किसी और राज्य को देना नहीं चाहता।

नगा आंदोलन के नेता मुइवा का जन्मस्थान मणिपुर में ही है। वे पिछले 40 साल से अपने गांव नहीं गए हैं। उन्होंने एकाएक घोषणा की कि वे अपने गांव मणिपुर में जानेवाले हैं। मणिपुर प्रशासन ने मुइवा को अपने राज्य में प्रवेश की इजाजत नहीं दी। मुइवा ने मणिपुर में प्रवेश की अपनी घोषणा वापस ले लीख् लेकिन उसके बाद नगा छात्रों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर मणिपुर के लोगों की जिंदगी हराम कर दी। समय बीतता गया और केन्द्र सरकार ने उस समस्या के हल के लिए कोई खास कोशिश नहीं की।

दूसरी तरफ अलग गोरखालैंड की मांग कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा त्रस्त उत्तरी बंगाल और सिक्कम के लोगों को राहत देने के लिए अदालत हरकत में आ गई है। उसने केन्द्र सरकार और पश्चिम बंगाल को नोटिस जारी करके आंदोलनकारियों द्वारा उठाए जा रहे गैरकानूनी कदमों पर कार्रवाई करने से संबंधित जानकारी मांगी है। क्या मणिुपेर की समस्या को भी इारी तरह गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए? (संवाद)