रमेश चेनिंथाला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष है। उनके खिलाफ पीसी चाको ने बयान दे डाले। श्री चाको का कहना है कि जब नए अध्यक्ष का चुनाव हो रहा है तो निवर्तमान अध्यक्ष को अपनी तरफ से पार्टी अध्यक्ष के रूप में ज्यादा सक्रियता नहीं दिखानी चाहिए।

चाको की उस सलाह का जवाब खुद प्रदेश अध्यक्ष चेनिंथाला ने नहीं दिया, बल्कि उनके समर्थकों ने कहा कि जबतब श्री चेनिंथाला प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, तबतक उन्हें अपने पद का इस्तेमाल कर पार्टी को मजबूत करने के काम से रोकने को कोई नहीं कह सकता।

कांग्रेस में एक और गुट है। वह गुट है उम्मेन चांडी का। श्री चांडी ने चेनिंथाला की सक्रियता पर श्री चाकों के अयान पर मध्यममार्गी रास्ता अख्तियार किया। उन्होंने श्री चेनिंथाला की कार्यशैली की प्रशंसा कीए लेकिन श्री चाको के बयान की आलोचना भी नहीं की। इस तरह श्री चांडी दोनों गुटों से अपने संबंध ठीक रखकर प्रदेश का अध्यक्ष बनना चाहतें हैं।

राज्य के 14 जिलों के कांग्रेस अध्यक्षों की भी नियुक्ति होनी है। उन पदों पर अपने अपने लोगों को बैठाने के लिए भी मारामारी हो रही है। श्री चांडी और श्री चेनिंथाला के गुट उे दूसरे से भिड़े हुए हैं, तो कांग्रेस के एक अन्य नेता करुणाकरण भी इस संघर्ष में शामिल हो गए हैं।

श्री करुणाकरण तीन जिलों के अध्यक्ष पदों पर अपने लोगों को बैठाना चाहते हैं। लेकिन अन्य गुट उनके दावों का विरोध कर रहे हैं। करुणाकरण अपने बेटे मुरलीघरण को फिर से कांग्रेस में वापस लाने की भी पुरजोर पैरवी कर रहे हैं। गौरतलब है कि उनके बेटे मुरलीधरण को पार्टी पिराधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कांग्रेस से निकाल दिया गया है। उनकी बेटी पद्माजा वेणुगोपाल उनके गुट का नेतृत्व कर रही हैं।

करुणाकरण की मांग को केरल के अंदर ज्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही है। उनके गुट की माग का जरूरत से ज्यादा बताया जा रहा है। जवाब में श्री करुणाकरण ने कांग्रेस आलाकमान का चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह केरल कांग्रेस के चुनाव में हस्तक्षेप करे।

प्रदेश स्तर पर चल रही गुटबाजी को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक चुनावों को संपन्न कराना शायद संभव नहीं हो पाएगा और सोनिया गांधी का हस्तक्षेप अपरिहार्य हो जाएगा। (संवाद)