केरल सरकार ने जो फैसला किया है उसके अनुसार फिलहाल सरकारी कंपनियों के निदेशक मंडलों में ही मजदूर नेताओं को जगह मिलेगी। उद्योग मंत्री एलामराम करीम ने इसकी घोषणा की। इससे संबंधित आधिकारिक अधिसूचना शीध्र ही जारी की जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि देश के अन्य राज्य केरल के नक्शे कदम पर चल कर इस तरह के कउम उठाएंगे। केरल मे मजदूर संगठनों द्वारा इस तरह की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम कर रहे कर्मचारियों की कार्यकुशलमा को बढ़ाने के लिए उनके विशेष प्रशिक्षण की व्ष्वस्था भी की जाने वाली है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की 6 नई कंपनियों का गठन करेगी।
2010 मे सार्वजनिक कंपनियों में राज्य सरकार के निवेश का परिमाण 450 करोड़ रुपए होगा। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार के कार्यकाल में 12 सरकारी कंपनियों की हालत खराब थी। अब वैसी कंपनियों की संख्या मात्र 5 रह गई है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सरकारी क्षेत्र की कंपनियो के स्वास्थ्य में खासा सुधार हुआ है और 20 अतिरिक्त कंपनियां फायदे में चलने लगी हैं।
उद्योग विभाग के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2009-10 में राज्य की सरकारी कंपनियों का लाभ 240 करोड़ रुपए दर्ज हुआ हैख् जिसके 2010-11 में बढ़कर 310 करोड़ रुपए हो जाने की संभावना है। गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल 2005-06 में सरकारी कंपनियां कुल मिलाकर घाटे में चल रही थीं और उनका कुल घाटा उस साल 69 करोड़ रुपए था। (संवाद)
केरल में औद्योगिक संबंध में नए आयाम
सरकारी उपक्रमों के निदेशक मंडल में होगे श्रमिक नेता
पी श्रीकुमारन - 2010-07-01 10:01
तिरुअनंतपुरमः केरल सरकार ने एक ऐसा फैसला किया है, जो न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि यह पूरे देश में अद्योगिक संबंधों को नए सिरे से पारिभाषित करने की क्षमता रखती है। वह निर्णय है कि कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन में श्रमिक नेताओं को शामिल करना। निदेशक मंडल में मजदूर नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित कराना कभी बौद्धिक बहस का विषय हुआ करता था, लेकिन अब तो उस पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती। इस माहौल में केरल सरकार ने यह फैसला किया है कि औद्योगिक कंपनियों के निदेशक मंडल में मजदूरों का भी प्रतिनिधित्व होगा।