निक्की भारतीय अमेरिकी समुदाय की बढ़ती राजनैतिक महत्वाकांक्षा का प्रतिनिधित्च करती हैं। कांग्रेस में प्रतिनिधित्व करने के लिए इस बार अमेरिकी भारतीय रिकार्ड संख्या में मैदान में हैं। निक्की के अलावा 6 अन्य भारतीय अमेरिकी भी राजनैतिक पद पाने के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। निक्की का राजनीति में उदय चौंकाने वाला रहा है। 2004 मे वह साउथ कैरोलिना के लैक्जिंगटन काउंटी का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। 2004 में वह दुबारा निर्वाचित हुईं और उन्हें रिकार्ड 83 प्रतिशत मत मिले।
निक्की का पूरा नाम निम्रता निक्की रंधावा है। वह पंजाब से अमेरिका आकर बसने वाले एक परिवार में पैदा हुई थीं। उनका परिवार साउथ कैरोलिना के बैम्बार्ग शहर में रह रहा था। उसके पिता अजित रंधावा जीव विज्ञान के प्रोफेसर थे। उनकी मां राज रंधावा ने एक गिफ्ट की दुकान खोली थी, जिसका नाम था- एक्जोटिका। आज वह करोड़ों रुपए की कंपनी बन गई है। निक्की ने 13 साल की उम्र से ही काम शुरू कर दिया था। वह उस उम्र में ही एक्जेटिका के एकाउंट की देखभाल करने लग गई थीं। बाद में उन्होंने एकाउंट में ही डिग्री हासिल की। उनकी शादी माइकल हेली से हुई। माइकल एक सरकारी आफिसर हैं और वे सेना मे हैं।
निक्की दो कारणों से चर्चा में हैं। पहला कारण तो यह है कि इस बार रिपब्लिकन ने भारी संख्या में महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। और दूसरा कारण निक्की का भारतीय मूल का होना है। निक्की भारतीय मूल के लोगों द्वारा रिपब्लिकन के पक्ष में लगातार होते जाने का प्रतिनिधित्व करती है। एक समय था, जब 1970 और 1980 के दशक में 100 फीसदी भारतीय मूल के लोग डेमोक्रेट का ही समर्थन करते थे।
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की ताकत बढ़ रही है। इसका पता तो इससे ही लगता है कि राष्ट्रपति बनने के बाद ओबामा ने यदि किसी विदेशी नेता को सबसे पहले डिनर पार्टी दी, तो वे नेता भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे। उस डिनर में आमंत्रित् लोगांे के एक तिहाई भारतीय मूल के अमेरिकी ही थे।
भारतीय मूल के लोगों के बढ़ते प्रभाव का कारण यह है कि उनकी आर्थिक ताकत भी बढ़ती जा रही है। उनका वर्चस्व बढ रहा है। (संवाद)
अमेरिकी राजनीति में भारतीयों की संख्या बढ़ी
बढ़ता आर्थिक प्रभुत्व एक बड़ी उपलब्धि
कल्याणी शंकर - 2010-07-02 10:34
वाशिंगटनः साउथ कैरोलिना के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी प्राप्त करने की होड़ में निक्की हैली और भी आगे बढ़ गई हैं। इसके साथ अब लोगों की नजर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के अमेरिकी राजनीति में बढ़ती पैठ पर नजर है। अगर निक्की नवंबर में होने वाले गवर्नर का चुनाव जीत जाती हैं, तो वह न केवल साउथ कैरालिना की पहली महिला गवर्नर होंगी, बल्कि अल्पसंख्यक रेस की पहली गवर्नर भी होंगी। उसके बाद 38 वर्षीय निक्की बाबी जिंदल के बाद अमेरिका के किसी राज्य की गवर्नर बनने वाली दूसरी भारतीय अमेरिकी होगी। बाबी जिंदल 39 साल के हैं और वे लुइसियाना के गवर्नर हैं।