पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि बड़ी साजिश के तहत उन पर और विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गये हैं। आशीष पटेल ने कहा कि 100 शिक्षकों की पदोन्नति में आरक्षण नीति लागू न करने तथा अन्य भ्रष्टाचार के आरोप जानबूझकर उनकी पार्टी तथा विभाग द्वारा किये जा रहे सामाजिक न्याय के कार्यों को पटरी से उतारने के लिए लगाये गये हैं।

आशीष पटेल ने कहा कि उनके विभाग में सभी निर्णय पारदर्शी होते हैं तथा वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इसकी जानकारी दी जाती है। अपना दल के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आरोप केवल उन पर ही लगाये गये हैं, जबकि प्रमुख सचिव शिक्षा सहित अन्य अधिकारियों के नाम छोड़ दिये गये हैं। उन्होंने आगे कहा कि पदोन्नति पाने वालों की सूची का अध्ययन करने पर पता चलेगा कि ओबीसी वर्ग के उन लोगों के साथ न्याय हुआ है, जिन्हें पहले वंचित रखा गया था।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में आशीष पटेल ने कहा कि वह तथा उनकी पत्नी केंद्रीय मंत्री तथा अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनीति में आने के बाद अर्जित की गयी अपनी संपत्ति की किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं।

इस बीच अनुप्रिया पटेल की बड़ी बहन तथा अखिलेश यादव के गठबंधन वाले प्रतिद्वंद्वी गुट (अपना दल कमेरावादी) की विधायक पल्लवी पटेल ने अपने देवर आशीष पटेल पर तकनीकी शिक्षा विभाग में 100 शिक्षकों की पदोन्नति में आरक्षण नीति लागू न करने का आरोप दोहराया। पल्लवी पटेल ने मंत्री पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की एसटीएफ जांच की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात भा की है।

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और उनके पति और उत्तर प्रदेश के मंत्री आशीष पटेल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश में उन पर लगाये जा रहे कथित आरोपों और उत्पीड़न में हस्तक्षेप करने की मांग की।

उत्तर प्रदेश के मौजूदा हालात से गठबंधन के एक और सहयोगी भी खुश नहीं हैं। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद भी अपना दल के नेता और मंत्री आशीष पटेल के समर्थन में खुलकर सामने आ गये हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसे तत्व हैं जो भ्रम पैदा करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गठबंधन सहयोगियों के कथित उत्पीड़न के लिए राज्य की नौकरशाही को दोषी ठहराया जाना चाहिए।

इससे पहले संजय निषाद ने भाजपा पर गठबंधन सहयोगियों को सम्मान न देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि भाजपा की हार लोकसभा चुनाव में ऐसे अहंकारी व्यवहार के कारण हुई। उन्होंने आगे कहा कि अगर समय रहते सुधारात्मक उपाय नहीं किये गये तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किल होगी।

संजय निषाद ने कहा कि भाजपा गठबंधन सहयोगियों को टिकट या सिंबल देने को तैयार नहीं है। उन्होंने संत कबीर नगर में प्रवीण सिंह निषाद की हार के लिए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गठबंधन सहयोगियों के बीच खींचतान दिल्ली और लखनऊ में भाजपा नेताओं के बीच चल रहे टकराव का नतीजा है। सरकार द्वारा अहंकारी नौकरशाहों को संरक्षण दिये जाने से गठबंधन सहयोगी ही नहीं बल्कि भाजपा विधायक भी काफी नाराज हैं।

लखीमपुर खीरी के आठ भाजपा विधायकों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे स्थानीय भाजपा नेताओं की बात सुनने को तैयार नहीं तथा वे पुलिस एसपी को तत्काल हटाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय एसपी लोगों की शिकायतों पर गौर नहीं कर रहे हैं।

गाजियाबाद के लोनी से भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि उनके जिले में गोहत्या और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर उनकी हत्या की आशंका है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने पार्टी के अन्य विधायकों के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। (संवाद)