अगर शहर के किसी स्विमिंग पूल पर सुबह या शाम के समय जाकर देखें, तो वहां का दृश्य बदला हुआ नजर आता है। पहले जहां अधिकतर बच्चे या प्रतियोगिता की तैयारी करने वाले युवा दिखाई देते थे, वहीं अब हर उम्र के लोग नजर आते हैं। कोई डॉक्टर की सलाह पर आया है, कोई वजन कम करने के लिए, कोई कमर दर्द से राहत पाने के लिए और कोई केवल इसलिए कि जिम की जगह उसे पानी में व्यायाम करना ज्यादा अच्छा लगता है। एक्वा योग, एक्वा मेडिटेशन, वॉटर एक्सरसाइज और हाइड्रो थेरेपी जैसी गतिविधियों ने तैराकी को एक नई पहचान दी है। पानी में योग करना, पानी में चलना, पानी में सांसों पर ध्यान देना—ये सब अब धीरे-धीरे शहरों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि तैराकी उन गिने-चुने व्यायामों में है, जिसमें पूरा शरीर एक साथ काम करता है, लेकिन शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। पानी में शरीर हल्का हो जाता है, इसलिए जिन लोगों को घुटनों में दर्द है, मोटापा है, कमर दर्द है या जो भारी व्यायाम नहीं कर सकते, उनके लिए तैराकी बहुत अच्छा विकल्प है। नियमित तैराकी से हृदय मजबूत होता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर की सहनशक्ति भी बढ़ती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी तैराकी को बहुत अच्छा माना जाता है, क्योंकि पानी में रहने से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है। कई लोग बताते हैं कि तैराकी करने के बाद उन्हें नींद भी अच्छी आती है और तनाव भी कम महसूस होता है।

प्रशिक्षक बताते हैं कि तैराकी सीखना आसान है, लेकिन पानी में उतरने से पहले कुछ सावधानियां बहुत जरूरी होती हैं। तैराकी हमेशा प्रशिक्षित कोच की निगरानी में ही सीखनी चाहिए। कई लोग यह सोचकर सीधे गहरे पानी में उतर जाते हैं कि वे सीख जाएंगे, लेकिन यही सबसे खतरनाक हो सकता है। तैराकी से पहले हल्का वार्मअप जरूरी है और तैराकी के बाद शरीर को आराम देना भी जरूरी है, ताकि मांसपेशियों में खिंचाव न आए। पूल की साफ-सफाई भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गंदे पानी से त्वचा, आंख और कान के संक्रमण हो सकते हैं। छोटे बच्चों को कभी भी अकेले पानी में नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे उन्हें तैरना आता ही क्यों न हो।

तैराकी शुरू करने से पहले कुछ लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। जिन लोगों को गंभीर हृदय रोग है, जिन्हें बार-बार चक्कर आते हैं, मिर्गी की समस्या है, अस्थमा का गंभीर रूप है या हाल ही में कोई बड़ी सर्जरी हुई है, उन्हें तैराकी शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसी तरह जिन लोगों को त्वचा का संक्रमण, कान में संक्रमण या कोई खुला घाव हो, उन्हें भी पूल में नहीं उतरना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए हल्की तैराकी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन उन्हें भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही तैराकी करनी चाहिए।

पुरुषोत्तम गौर तरण पुष्कर, भोपाल के प्रबंधक बृजमोहन धाकड़ बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में तैराकी सीखने आने वाले लोगों की प्रोफाइल में विविधता आई है। वे बताते हैं कि पहले ज्यादातर बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में तैराकी सीखने आते थे और युवा प्रतियोगिता की तैयारी के लिए आते थे, लेकिन अब बच्चों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, नौकरीपेशा लोग और बुजुर्ग भी तैराकी सीखने आ रहे हैं। तैराकी एक ऐसा व्यायाम है, जिसमें शरीर पर झटका नहीं लगता और पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाती है। महिलाओं में भी तैराकी का रुझान तेजी से बढ़ा है, क्योंकि यह फिटनेस के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास भी देता है। बुजुर्ग लोग अब वॉटर वॉकिंग और तैराकी के जरिए खुद को सक्रिय रख रहे हैं।

समाज में तैराकी को लेकर बढ़ता रुझान यह बताता है कि लोग अब ऐसी गतिविधियां चाहते हैं, जिसमें व्यायाम भी हो, आनंद भी हो और मानसिक शांति भी मिले। तैराकी शायद इन तीनों का संतुलन है—इसमें खेल भी है, व्यायाम भी है और पानी के साथ एक सुकून भरी शांति भी जुड़ी हुई है। तैराकी की असली खूबसूरती भी यही है कि यह आपको थकाती नहीं, बल्कि हल्का कर देती है। (संवाद)