यह बदलाव केवल लागत या सुविधा का परिणाम नहीं है। आज का उपभोक्ता ऐसी बाइक चाहता है जो ट्रैफिक में आसानी से चल सके, कम जगह घेरे, ईंधन की बचत करे, पर्यावरण पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव डाले और जरूरत पड़ने पर परिवार के साथ भी उपयोग में लाई जा सके। यही कारण है कि जहां कभी 100 सीसी मोटरसाइकिलें केवल माइलेज के लिए खरीदी जाती थीं, वहीं अब 125 सीसी श्रेणी को अधिक संतुलित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह श्रेणी पर्याप्त शक्ति, बेहतर स्थिरता और लंबी दूरी की सुविधा प्रदान करती है, जबकि संचालन लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है।

आज लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये की कीमत वाले 125 सीसी से 150 सीसी सेगमेंट में सबसे अधिक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। यह वह श्रेणी है जहां कंपनियां बेहतर माइलेज, कम उत्सर्जन, फ्लेक्स फ्यूल अनुकूलता,सुरक्षा, तकनीक, आराम और किफायत के बीच बेहतर संतुलन बनाने का प्रयास कर रही हैं। ड्यूल चैनल एबीएस, बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम, चौड़े टायर, उन्नत सस्पेंशन और भविष्य में ट्रैक्शन कंट्रोल जैसी तकनीकों का उपयोग अब इस वर्ग में भी होने लगा है। दूसरी ओर राइड-बाय-वायर, राइडिंग मोड्स, क्रूज कंट्रोल, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, डिजिटल डिस्प्ले और स्मार्ट नेविगेशन जैसी सुविधाएं धीरे-धीरे छोटे इंजन वाली मोटरसाइकिलों तक पहुंच रही हैं।

इन बदलती प्राथमिकताओं के बीच हीरो मोटोकॉर्प की दो मोटरसाइकिलें एक दिलचस्प अध्ययन प्रस्तुत करती हैं। हीरो ग्लैमर एक्स 125 और हीरो एक्सट्रीम 125आर एक ही श्रेणी की बाइकें होते हुए भी अलग-अलग दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ग्लैमर एक्स 125 का फोकस सुविधा, आराम और तकनीक पर अधिक दिखाई देता है। इसमें राइड-बाय-वायर, क्रूज कंट्रोल, राइडिंग मोड्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और सिंगल सीट जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जो इसे रोजमर्रा के उपयोग और पारिवारिक जरूरतों के लिए आकर्षक बनाती हैं।दूसरी ओर एक्सट्रीम 125आर सुरक्षा और राइडिंग डायनेमिक्स को प्राथमिकता देती है। ड्यूल चैनल एबीएस, ड्यूल डिस्क ब्रेक और अधिक स्पोर्टी चरित्र इसे अपने सेगमेंट में अलग पहचान देते हैं। यही कारण है कि इसे 125 सीसी श्रेणी की सबसे सुरक्षित मोटरसाइकिलों में से एक माना जा रहा है। अभीइसमें सिंगल सीट, ट्रैक्शन कंट्रोल और फ्लेक्स फ्यूल जैसी संभावित भविष्य की सुविधाओं की गुंजाइश दिखाई देती है।शहरी उपभोक्ता सिंगल सीट को अधिक व्यावहारिक मानते हैं, विशेषकर तब जब बाइक का उपयोग परिवार के साथ और शहरी क्षेत्र में भी किया जाना हो।

बदलती प्राथमिकताओं के बीच विभिन्न कंपनियां अपने-अपने तरीके से 125 सीसी सेगमेंट को नया स्वरूप देने का प्रयास कर रही हैं। किसी कंपनी का जोर सुरक्षा पर है, तो किसी का आराम और उपयोगिता पर। कहीं स्पोर्टी डिजाइन और ड्यूल चैनल एबीएस को प्राथमिकता दी गई है, तो कहीं राइड-बाय-वायर, क्रूज कंट्रोल, डिजिटल कनेक्टिविटी और सिंगल सीट जैसे फीचर्स को। टीवीएस रेडर, होंडा एसपी 125, यामाहा की एफजेड श्रृंखला तथा बजाज के विभिन्न कम्यूटर और स्पोर्ट-कम्यूटर मॉडल अपने-अपने क्षेत्र में अलग पहचान बना चुके हैं।

मोटरसाइकिल कंपनियां अपने विभिन्न मॉडलों को अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों, मूल्य श्रेणियों और बाजार रणनीतियों को ध्यान में रखकर विकसित करती हैं। यदि किसी निर्माता के 150 या 160 सीसी मॉडल में उपलब्ध सभी फीचर्स को वह 125 सीसी मॉडल में शामिल कर दे, तो उसके ऊपरी सेगमेंट के उत्पाद प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए कई बार सुरक्षा, आराम, तकनीक और प्रदर्शन से जुड़े फीचर्स को अलग-अलग मॉडलों में संतुलित रूप से वितरित किया जाता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो ग्लैमर एक्स 125 और एक्सट्रीम 125आर एक ही कंपनी की दो अलग रणनीतियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

फिर भी यह कहा जा सकता है कि यदि ग्लैमर एक्स 125 की विशेषताओं को एक्सट्रीम 125आर की विशेषताओं के साथ जोड़ा जाए या इसके उलट कर दिया जाए एवं भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उसमें ट्रैक्शन कंट्रोल और फ्लेक्स फ्यूल तकनीक भी शामिल कर दी जाए, तो ये भारतीय बाजार की सबसे संतुलित 125 सीसी मोटरसाइकिलों में से एक बन सकते हैं। यदि ऐसे उन्नयन के कारण कीमत में 10 से 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी भी होती है, तो संभावना है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता उसे स्वीकार करने के लिए तैयार होंगे, क्योंकि उन्हें एक ही मोटरसाइकिल में सुरक्षा, तकनीक, आराम, पर्यावरणीय अनुकूलता और उपयोगिता का समग्र पैकेज मिलेगा।

125 सीसी सेगमेंट में हो रहे ये बदलाव केवल मोटरसाइकिल तकनीक के विकास की कहानी नहीं हैं, बल्कि भारतीय उपभोक्ता की बदलती प्राथमिकताओं का भी प्रतिबिंब हैं। आने वाले वर्षों में यह श्रेणी देश के दोपहिया बाजार की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में से एक बन सकती है। यदि निर्माता सुरक्षा, तकनीक, पर्यावरणीय अनुकूलता, ईंधन दक्षता और उपयोगिता को एक ही मंच पर लाने में सफल होते हैं, तो 125 सीसी बाइकें केवल कम्यूटर वाहन नहीं रहेंगी, बल्कि शहरी भारत की बदलती परिवहन जरूरतों का महत्वपूर्ण समाधान बन सकती हैं। (संवाद)