जांच शुरू करने का फ़ैसला राज्य के महाधिवक्ता के. जाजू बाबू की सलाह पर लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है, जिसमें पिनराई, वीणा, रियास और कुछ अन्य लोगों पर मनी-लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर सकती है।

ईडी ने कुछ दिन पहले राज्य के पुलिस प्रमुख रावाडा ए. चंद्रशेखर को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें इस मामले में कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी। एजंसी इस नतीजे पर पहुंची थी कि पिनराई, वीणा और रियास, कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) के एमडी शशिधरन कार्था और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर मनी-लॉन्ड्रिंग में शामिल थे।

महाधिवक्ता ने सिफ़ारिश की है कि रिपोर्ट में नामज़द लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जाए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की जाए। सर्वोच्च न्यायालय के तय सिद्धांतों के अनुसार, पुलिस मनी-लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 की धारा 66(2) के तहत रिपोर्ट स्वीकार करने और एफआईआर दर्ज करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

चंद्रशेखर ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस शुरू में ईडी की जानकारी के आधार पर शुरुआती जांच करेगी। उन्होंने कहा कि अभी निगरानी विभाग द्वारा जांच शुरू नहीं की जाएगी और पुलिस पहले ईडी द्वारा दिए गए सुबूतों की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि यह तय करने के लिए शुरुआती जांच ज़रूरी है कि क्या कोई आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है या नहीं।

वहीं, मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने जांच का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का मकसद किसी को निशाना बनाना या बदला लेना नहीं है। सरकार ने सलाह मांगी थी। महाधिवक्ता और डायरेक्टर जनरल ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन की राय थी कि जांच का आदेश दिया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में आदेश दिया था कि संदिग्ध कमर्शियल धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज करना इस बात पर निर्भर करता है कि अनिवार्य शुरुआती जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है या नहीं। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

इस बीच, सीपीआई (एम) ने राज्य सरकार को चुनौती दी है कि वह उन मंत्रियों की जांच करे जिनके नाम सीएमआरएल द्वारा कथित तौर पर रखे गए 'स्लश फंड लेजर' में शॉर्ट-फॉर्म में लिखे गए हैं। सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि सीएमआरएल के खिलाफ आयकर विभाग का मूल मामला यह था कि इस पब्लिक लिमिटेड कंपनी को कई राजनेताओं - जिनमें मौजूदा यूडीएफ सरकार के मंत्री भी शामिल हैं - को संदिग्ध भुगतान करने के कारण 152 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने साफ़ तौर पर कहा था कि सीएमआरएल की अकाउंट बुक में 'पीवी' शुरुआती अक्षर उनके लिए इस्तेमाल नहीं किए गए थे। इसके उलट, मौजूदा गृह मंत्री और उद्योग मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माना था कि उन्होंने सीएमआरएल से चुनाव के लिए फंड लिया था। हालांकि, ईडी के पास यूडीएफ मंत्रियों के खिलाफ कोई मामला नहीं है। उसने राज्य पुलिस से राजनीतिक भुगतान के मामलों में आपराधिक जांच शुरू करने की मांग भी नहीं की है। इसके बजाय, ईडी ने सीएमआरएल मैनेजमेंट से दबाव में लिए गए और बाद में वापस लिए गए बयानों के आधार पर सीपीआई(एम) नेताओं के खिलाफ़ एक झूठा मामला बनाया है। यूडीएफ सरकार विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के साथ हुई समझ के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नियंत्रण वाली केंद्रीय एजंसी के इशारे पर काम कर रही है। सीपीआई(एम) नेता पी. राजीव ने सतीसन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस विवाद की पुलिस जांच का आदेश देकर भाजपा के राजनीतिक हितों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, सीपीआई(एम) को कमज़ोर करके राज्य में भाजपा को राजनीतिक फ़ायदा पहुंचाने की ज़मीन तैयार कर रहे थे।

ईडी ने आरोप लगाया था कि सीएमआरएल (एक केमिकल कंपनी जिसमें केरल सरकार की माइनॉरिटी हिस्सेदारी है) ने पिनाराई के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें गुप्त रूप से पैसे दिए थे। ये पैसे 2017-2021 के दौरान वीणा की अब बंद हो चुकी सॉफ़्टवेयर कंपनी 'एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस' को कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए 'रिटेनर' के तौर पर दिए गए थे, जबकि ऐसी कोई सेवा कभी दी ही नहीं गई थी।

राज्य के पुलिस महानिदेशक को सौंपी अपनी रिपोर्ट में ईडी ने कहा था कि मई में तिरुवनंतपुरम में पिनाराई के घर पर छापेमारी के दौरान उन्हें एक डायरी मिली थी, जिसमें कथित तौर पर गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा था।

पिनाराई ने डायरी में किसी भी आपत्तिजनक एंट्री के होने से इनकार किया था। वहीं रियास का कहना है कि डायरी में खाड़ी देशों में वीना के बिज़नेस प्लान के बारे में कुछ बातें लिखी थीं, जो उनके दावे के मुताबिक अभी तक हकीकत में नहीं बदल पाई हैं।

सीपीआई (एम) का कहना है कि ईडी की इस कार्रवाई का मकसद सीपीआई(एम) के शीर्ष नेताओं की छवि खराब करना था। यह सिर्फ़ पुराने आरोपों को फिर से उठाने जैसा था, जिन्हें केरल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुके हैं।

केरल सरकार को पंजाब और तमिलनाडु की सरकारों की तरह काम करना चाहिए था, जिन्होंने राज्य के पुलिस प्रमुखों से विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने की ED की अपील को ठुकरा दिया था। चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपों को खारिज कर दिया है, इसलिए पिनाराई, वीणा और रियास के ख़िलाफ़ मामला कानूनी जांच में टिक नहीं पाएगा। सीपीआई (एम) नेताओं का यही तर्क है। (संवाद)