ताइवान के एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई एक वार्ता में दोनों देशों के बीच खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोंग की संभावनाओं पर गौर किया गया। बैठक में दोनों देशों प्रतिनिधियों ने अपनी अपनी जानकारियों का आदान प्रदान किया। भारत की ओर से केंद्रीय खाद्य और प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि इस क्षेत्र में विकास और निवेश की असीम अवसर और संभावनाएं है क्योंकि भारत कृषि भूमि और उत्पादन व खपत के मामले में चीन के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है किंतु खाद्य पदार्थों को प्रसंस्कृत करने के मामले पिछड़ा हुआ है।इसकी वजह से फल सब्जी अनाज का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में दूसरी हरित क्रांति का आहवान किया है।भारत खाद्य उत्पादन में आगे है। ताइवान टेक्नालाजी में आगे है। दोनों देशों के पारस्परिक सहयोग से एग्रो फुड क्षेत्र का भारत लीडर हो सकता है।

ताइवान के राजदूत फिलिप वेनचाई ओंग ने कहा कि यहां फुड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज में सिर्फ एक प्रतिशत निवेश किया गया है जो बहुत ही कम है। उनका देश भारत में प्रसंस्करण उद्योग के क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहायता देगा। खाद्य प्रसंस्कारण मंत्री श्री सहाय ने विश्वास जताया कि शीर्घ ही दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में निवेश के लिए समझौता होगा।