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सीईसी के 'बिना अधिकार' और 'गैर-कानूनी' कामों के लिए प्रधान मंत्री मोदी ज़िम्मेदार

2023 के कानून के माध्यम से बनाया चहेते को सीईसी, अन्य चुनाव आयुक्तों को कमजोर
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-09-24 10:52 UTC
भारत के तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज की है और उन्हें 'गैर-कानूनी' और 'बिना अधिकार के' भी बताया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में पता चला है कि पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां उठाई गई थीं। हालांकि, यह मामला सिर्फ़ सीईसी की जवाबदेही से कहीं आगे का है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नियुक्त किए गए पसंदीदा व्यक्ति हैं। उन्हें सीईसी और अन्य ईसी की नियुक्ति के लिए 2023 में लाए गए कानून के तहत नियुक्त किया गया था, जिसने चुनाव आयोग को उनके नियंत्रण में ला दिया।

एसआईआर भारत के चुनावी लोकतंत्र में एक व्यवस्थित हेराफेरी

चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं
नीलोत्पल बसु - 2026-09-23 10:25 UTC
अभी हाल ही में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की वाक्पटु मितव्ययिता ने एक अत्यंत संक्षिप्त अवलोकन का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने राय दी है कि कुछ नागरिकों की 'थोड़ी असुविधा' के बावजूद, 'निष्पक्ष चुनाव' कराने के लिए मतदाता सूची को साफ करने के लिए देश भर में किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) आवश्यक था। इसे तथ्यों को कम करके बताने वाला सबसे खराब बयान माना जा सकता है।

उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत की धमाकेदार वापसी

भाजपा में घबराहट, काग्रेस में विरोधी गुट भी हतप्रभ
कुशाल जीना - 2026-09-23 06:55 UTC
नई दिल्ली: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की राजनीति में धमाकेदार वापसी करके सत्तानशीं भाजपा और कांग्रेस के भीतर अपने विरोधियों को अचंभित कर दिया है।

जेनरिक दवाएं भी कम असरदार नहीं होतीं

एस एन वर्मा - 2026-09-22 15:43 UTC
जेनरिक दवाएं लेने से अधिसंख्य मरीज हिचकते हैं। उन्हें लगता है कि बड़ी दवा कंपनियों की ब्रांडेड दवाएं न होने के कारण ये खास असर नहीं करती हैं। परन्तु ऐसी आशंका बिल्कुल ही गलत है। जेनरिक दवाएं ब्रांडेड की तुलना में बहुत ही कम मूल्य अर्थात सस्ती होनी हैं जिसके कारण कुछ विशेष मानसिकता वाले लोगों को आशंका होने लगती है कि कहीं बीमारी ठीक होने में काफी समय न लग जाए।

नगांव लोकसभा उपचुनाव: कांग्रेस, भाजपा, एआईयूडीएफ के बीच त्रिकोणीय लड़ाई

बदरुद्दीन अजमल के चुनाव मैदान में उतरने से अल्पसंख्यकों का मनोबल बढ़ा
रवीन्द्र नाथ सिन्हा - 2026-09-22 10:44 UTC
कोलकाता: असम में नगांव लोकसभा सीट के लिए 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में दिलचस्पी का मुख्य बिंदु यह है कि क्या इत्र के शीर्ष व्यापारी और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के नेता बदरुद्दीन अजमल एक बार फिर संसद में अपनी पारी शुरू कर पाएंगे। दूसरा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस, जिसने 2024 में यह सीट जीती थी, अपना प्रदर्शन दोहरा सकती है? सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने कद्दावर नेता हिमंत विश्व सरमा के मुख्यमंत्री रहते हुए उतनी मुखर नहीं है जितनी आम तौर पर होती है, लेकिन इसके उम्मीदवार की पसंद ने सबको आश्चर्यचकित कर दिया है।

इसरो का निजीकरण: वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता पर नव-उपनिवेशवादी हमला

भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों को निजी मुनाफे के लिए सौंपना गलत
डॉ. अरुण मित्रा - 2026-09-19 10:28 UTC
भारत की आज़ादी का मतलब सिर्फ़ ब्रिटिश राज से आज़ादी नहीं था। आज़ादी के आंदोलन का सपना एक ऐसा भारत बनाना भी था जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो, अपनी वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक क्षमताओं को विकसित कर सके, दुनिया की राजनीति में स्वतंत्र फ़ैसले ले सके, सभी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रख सके, और साम्राज्यवाद और युद्ध के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सके।

नंदीग्राम उपचुनाव, ममता बनर्जी, और पश्चिम बंगाल की राजनीति

अपनी जगह संचिता प्रधान डे को चुनाव मैदान में उतरना एक समझदारी का कदम
अरुण श्रीवास्तव - 2026-09-18 11:00 UTC
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी का नंदीग्राम उपचुनाव से दूर रहने का फैसला सिर्फ़ विरोधियों के बिछाए जाल से बचने की सोची-समझी चाल मानना राजनीतिक रूप से नादानी होगी। ममता के कदम के व्यापक मायने हैं। हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम उपचुनाव न लड़ने का उनका फैसला किसी "जाल" से बचने की साधारण कोशिश नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है। टीएमसी के बागी गुट के नेता रितब्रता बनर्जी का यह कहना कि अगर ममता चुनाव लड़ती हैं तो वे अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे और ममता का समर्थन करेंगे, केवल भगवा खेमे की साजिश को ही बेनकाब करता है।

देश में मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री रोकने में अक्षम हैं सरकारें

एस एन वर्मा - 2026-09-17 15:21 UTC
मानसून के जाते ही अगले कुछ महीनों तक देश में त्योहारों का मौसम रहेगा। त्योहारों के दिनों में हमारे घरों एवं रसोइयों में मिठाइयों व विभिन्न तरह के स्वादिष्ट पकवानों की खुशबू भरी होती है। लेकिन ये रुचिकर व सुगंधित भोजन से उबकाई तब लगने लगती है जब यह पता चलता है कि ये सब मिलावटी व दूषित खाद्य पदार्थो से बने हुए हैं। मानवाधिकार आयोग के अनुसार देश के प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जीने का अधिकार है लेकिन सरकार के ढिलमूल रवैये के कारण हमारे इस अधिकार का हनन हो रहा है।

मायावती की वापसी की योजना, लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी कई बड़ी चुनौतियां

राज्य के दलितों तक पहुंचने की कोशिश करने वाली बसपा प्रमुख अकेली नहीं
कल्याणी शंकर - 2026-09-17 10:52 UTC
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हालात बदल रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, सक्रिय राजनीति से पांच साल के ब्रेक के बाद वापसी की उम्मीद कर रही हैं। भले ही वह पूरी सत्ता वापस पाने की कोशिश न करें, लेकिन उनकी मौजूदगी विरोधियों के वोट खींचकर चुनावों पर असर डाल सकती है।

दो कदम आगे: ब्रिक्स दिल्ली बैठक के बाद मोदी का कद बढ़ा

ट्रम्प से निपटने में भारत की मोल-भाव करने की ताकत बढ़ी
नित्य चक्रवर्ती - 2026-09-15 10:55 UTC
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुई 18वीं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने भारत को वैश्विक दक्षिण में अपना खोया हुआ रुतबा वापस पाने में मदद की है। यह रुतबा 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही कम हो गया था। ठीक बारह साल बाद, उन्हीं नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स की विस्तारित बैठक की मेजबानी की और अपनी कूटनीतिक कुशलता दिखाई। उन्होंने आम सहमति के आधार पर संयुक्त घोषणा-पत्र सुनिश्चित किया, ईरान और पश्चिम एशिया में परस्पर विरोधियों के बीच सुलह कराई, बिना अमेरिका का नाम लिए डोनाल्ड ट्रम्प को वैश्विक दक्षिण की ओर से उनके एकतरफा टैरिफ कदमों और व्यापार युद्ध पर कड़ा विरोध जताया, और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिसमें आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देने के साथ-साथ भारत की अहम सीमाओं पर भी जोर दिया गया।