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ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव

भारत के लिए तत्काल हैं और भी कई तरह के जोखिम
नन्तू बनर्जी - 2026-03-10 11:43 UTC
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं, और जो इस क्षेत्र के 10 देशों में फैल गया है, से भारत पर बड़ा आर्थिक असर पड़ने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में भारत का 120 अरब डॉलर का व्यापार, भारी तेल आयात, कुल भुगतान संतुलन, बाहरी निवेश का आना, विदेश से भारत में धनप्रेषण और रुपये की विनिमय दर की स्थिरता जैसी कई दूसरी चीज़ें दांव पर लगी हैं। इसके कारण भारत सरकार को अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने सालाना बजट खर्च और आय के अनुमानों को फिर से लिखना पड़ सकता है।

एक गेमचेंजर होगी नेपाल चुनाव में जेन जेड समर्थित आरएसपी की शानदार जीत

मौजूदा हालात, भ्रष्टाचार और पुराने चेहरों के खिलाफ साफ था यह जनादेश
नित्य चक्रवर्ती - 2026-03-07 11:54 UTC
नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनावों में जेन जेड समर्थित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की शानदार जीत न सिर्फ इस छोटे से हिमालयी देश के राजनीतिक इतिहास में बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती राजनीति में भी एक गेमचेंजर है। नेपाल अब दक्षिण एशिया का दूसरा देश है जो सितंबर 2025 के दूसरे हफ्ते में बगावत के जरिए एक पारंपरिक राजनीतिक पार्टी की सरकार को हटाने वाले युवा आंदोलन के समर्थन वाली सरकार की स्थापना देख रहा है।

ईरान युद्ध के पांच दिन बाद, भारत को इसका असर महसूस होने लगा

बढ़ते जोखिम का सामना कर रहे हैं भारत को धनप्रेषण, ऊर्जा, और मुख्य निर्यात क्षेत्र
टी एन अशोक - 2026-03-06 11:16 UTC
जैसे-जैसे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच लड़ाई और गहरी होती जा रही है, भारत —जो लड़ाई के मैदान से हज़ारों मील दूर है— खुद को कई तरह के आर्थिक जोखिमों का सामना करते हुए पा रहा है जो तेल की बढ़ती कीमतों से परे कहीं ज़्यादा हैं।

सीबीआई, प्रकारान्तर से मोदी सरकार, की साख पूरी तरह खत्म

केजरीवाल का आज़ाद भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक साज़िश का आरोप गूंजेगा
के रवींद्रन - 2026-03-02 11:43 UTC
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य के खिलाफ दिल्ली आबकारी नीति मुकदमे को खारिज करने के एक सत्र न्यायालय के फैसले से एक राजनीतिक और संस्थागत महत्व की निर्णायक चर्चा शुरू हो गयी है, जो एक मुकदमे की किस्मत से कहीं आगे की बात है। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का प्रक्रियात्मक उल्लंघन, उसकी सुनी-सुनाई बातों पर निर्भरता और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की अनदेखी के लिए तीखी आलोचना करके, राउज एवेन्यू की अदालत ने न सिर्फ आरोपियों को बरी किया है बल्कि इसने भारत की सबसे बड़ी जांच एजंसी की साख पर भी एक लंबा साया डाल दिया है।

किसान यूनियन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे

एसकेएम ने 9 मार्च को संसद के सामने किसान-मज़दूरों की रैली का आह्वान किया
जग मोहन ठाकन - 2026-02-28 11:16 UTC
चंडीगढ़: भारतीय किसान यूनियन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए कमर कस रहे हैं। मुख्य किसान यूनियनों ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले बैठक की और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ पूरे भारत में एक साथ लगातार संघर्ष की योजना बनाई, जिसमें दूसरे ज़रूरी मुद्दे भी शामिल थे।

सर्वोच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी केंद्र की भाजपा सरकार की भूमिका पर केन्द्रित

लंबे समय से पाठ्यपुस्तकों के ज़रिए खराब किया जा रहा है बच्चों का दिमाग
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-02-27 11:30 UTC
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की एक किताब पर पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है, और एक पाठ के खास संदर्भ में “गहरी जड़ें और सुनियोजित साज़िश” शब्द का इस्तेमाल किया है, जिसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार और उसके कामकाज पर चर्चा की गई है। केवल एक निष्पक्ष जांच ही साज़िश के सभी आयामों को सामने ला सकती है, जो 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने के लिए खतरा बनी हुई है। सवाल यह है कि क्या इस साजिश में आरएसएस-भाजपा कुनबे की सरकार शामिल है और साज़िश की जड़ें कहीं उससे भी ज़्यादा गहरी हैं जितनी की अभी टिप्पणी की गयी है?

भाजपा का 'मिशन 2026': चुनाव से पहले बंगाल में एक आक्रामक अभियान

भगवा कैंप की 1 मार्च से होने वाली चुनाव रथयात्रा में हिंसा की संभावना
अरुण श्रीवास्तव - 2026-02-26 11:26 UTC
भाजपा के राष्ट्रीय नेता 1 मार्च को पश्चिम बंगाल में एक बड़ी रथयात्रा निकालेंगे, जो 25 सितंबर 1990 की लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा की याद दिलाती है, जो पूरे उत्तर भारत में आरक्षण विधेयक के खिलाफ़ हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों का फ़ायदा उठाने के लिए निकाली गयी थी। इस रथयात्रा को “परिवर्तन” रथयात्रा नाम दिया गया है, जिसमें हिंदी भाषी प्रवासियों और पिछड़ी जाति के मतदाताओं की बहुलता वाले इलाकों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

तारिक के प्रधान मंत्री बनने के बाद बांग्लादेश में अमेरिका-चीन की प्रतिद्वन्द्विता बढ़ी

दक्षिण एशिया सुरक्षा पर वाशिंगटन का आक्रामक रवैया भारत के लिए भी सिरदर्द
नित्य चक्रवर्ती - 2026-02-25 11:50 UTC
12 फरवरी के राष्ट्रीय चुनाव में अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान को बांग्लादेश का प्रधान मंत्री बने हुए सिर्फ़ एक हफ़्ता हुआ है। 60 साल के प्रधान मंत्री, जो ब्रिटेन में 17 साल के देश निकाला के बाद स्वदेश लौटे हैं, से उम्मीद की जा रही थी कि वे देश की खराब अर्थव्यवस्था और इसके प्रशासन को फिर से दुरुस्त करने को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देंगे, लेकिन उनके ध्यान का केन्द्र अचानक बदल गया है, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका प्रशासन बहुत ज़्यादा सक्रिय हो गया है और नई सरकार से चीन के खिलाफ़ रूख अपनाने के लिए कहकर बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों में दखल दे रहा है।

भारत को सुरक्षित और पारदर्शी रहने के लिए ‘भरोसेमंद’ एआई औजार अपनाने चाहिए

‘उच्च जोखिम’ कार्यों को विनियमित करने के पक्ष में हैं यूरोपीय यूनियन, चीन और जापान
नन्तू बनर्जी - 2026-02-24 11:37 UTC
पिछले हफ़्ते दिल्ली में जो वैश्विक एआई इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित हुए वह इससे ज्यादा सही समय पर नहीं हो सकता था, जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने, इसकी सीमाओं और संभावित नतीजों को लेकर कुछ हद तक शक में है। एनविडिया माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजॉन, मेटा, और एन्थ्रोपिक जैसी फर्मों की शुरुआती कोशिशों की वजह से, संयुक्त राज्य अमेरिका मुख्य रूप से आधारभूत अवसंरचना, जेनरेटिव एआई (जेन एआई) समायोजन और सम्पूर्ण उद्योग में उसे लागू कर वैश्विक एआई अपनाने को बढ़ावा दे रहा है। पिछले तीन सालों में एआई अपनाने में तेज़ी आई है। फिर भी, एआई अपनाने को लेकर बहुत ज़्यादा शक है, जिसे इसकी सीमाओं, नैतिक असर और लंबे समय के नतीजों को लेकर चिंताओं की वजह से सावधानी से, लगभग हिचकिचाते हुए अपनाया जा रहा है।

वैश्विक सम्मेलनों में विरोध प्रदर्शन के साथ भारत जीना सीखे, असहिष्णुता अनुचित

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में ‘शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन’ राष्ट्रविरोधी नहीं
के रवींद्रन - 2026-02-23 11:43 UTC
वैश्विक सम्मेलनों ने लंबे समय से न सिर्फ सरकार के प्रमुखों और कॉर्पोरेट के अगुवों के लिए बल्कि उनका विरोध करने वालों के लिए भी एक वैश्विक मंच दिया है। विरोध अभियानों ने सीखा है कि जहां टेलीविज़न कैमरे, राजनयिक और नीति निर्धारक इकट्ठा होते हैं, वहां इकट्ठा होना, उच्चस्तरीय बैठकों को राजनयिकता के साथ-साथ असहमति का अखाड़ा बना देता है। व्यापार वार्ताओं से लेकर पर्यावरण सम्मेलनों तक, संगठित विरोध प्रदर्शन भद्रलोक के विचार-विमर्श के लिए एक उम्मीद की जाने वाली साथी बन गए हैं, जिन्हें ध्यान खींचने के लिए आयोजित किया जाता है जो अन्यथा हाशिये पर काम करने वाले आन्दोलनकारी अभियान चलाने वालों के लिए उपलब्ध नहीं होता।