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चाबहार बंदरगाह भारत, ईरान और अफ़गानिस्तान के लिए एक रणनीतिक जरूरत

भारत और ईरान ने हाल के महीनों में तालिबान के साथ संबंधों को फिर से जोड़ा
गिरीश लिंगन्ना - 2024-06-01 11:51 UTC
भारत आज ईरान में लंबे समय से लंबित चाबहार बंदरगाह परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहा है। 13 मई को, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन ने 10 साल के समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह सौदा भारत को चाबहार बंदरगाह को विकसित करने और संचालित करने की अनुमति देता है।

इलेक्ट्रिक वाहन के लिए महत्वपूर्ण वर्ष होगा 2024

विशाल भारतीय बाजार की उत्साहजनक संभावनाएं
के रवीन्द्रन - 2024-04-08 11:06 UTC
वर्ष 2024 इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रांति में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित करने के लिए तैयार है। पर्यावरणीय चिंताओं, सख्त नियमों और तकनीकी प्रगति से प्रेरित, ईवी बाजार में विस्फोटक वृद्धि हो रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर परिवहन परिदृश्य बदल रहा है। इस परिवर्तन में सबसे आगे चीन खड़ा है, एक ऐसा देश जिसने रणनीतिक रूप से खुद को ईवी उद्योग में निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित किया है।

नेटो 75 वर्ष का हो गया, अब अधिक आक्रामक और विस्तार के लिए तैयार

इस साल यूरोपीय संघ और अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव तय करेंगे इसका भविष्य
सात्यकी चक्रवर्ती - 2024-04-06 10:57 UTC
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नेटो) इस वर्ष 4 अप्रैल को 75 वर्ष का हो गया, जिसने शीत युद्ध और सोवियत काल के बाद के दौर में कई उतार-चढ़ाव वाली यात्रा को चिह्नित किया। जब 1949 में नाटो का गठन हुआ, तो इसके शीत युद्ध समर्थकों ने दावा किया कि इसका मिशन "सोवियत आक्रामकता" को पीछे हटाना होगा, जो कि साम्यवाद-विरोधी झूठ है। यूरोप में तब और अब की तरह वास्तविक विस्तारवादी ताकत अमेरिका थी, जिसने सोवियत संघ को घेरने की अपनी नीति के तहत नेटो की शुरुआत की थी। नेटो का वास्तविक उद्देश्य यूएसएसआर को नष्ट करना था - एक जुनून जिसमें यूएसएसआर हमला करे उससे पहले ही परमाणु युद्ध की योजना भी शामिल थी।

सैन्य उपग्रहों की संख्या को लेकर भारत और चीन के बीच बड़ी प्रतिस्पर्धा

राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए भारत में नई संचार तकनीक अनिवार्य
गिरीश लिंगन्ना - 2024-03-06 11:33 UTC
तेजी से जटिल होते सुरक्षा परिदृश्य के बीच, चीन और भारत जैसे देश सहित एशिया के कई अन्य देश सम्पूर्ण क्षेत्र के भीतर सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए अपने उपग्रह नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की विश्व में शांति और सुरक्षा बनाये रखने में विफलता

केवल शीघ्र सुधार से ही संयुक्त राष्ट्र ‘लीग ऑफ नेशंस’ जैसी दुर्गति से बच सकेगा
नन्तु बनर्जी - 2024-03-05 10:52 UTC
पिछले वर्ष से चल रहे दो विनाशकारी युद्धों - एक यूक्रेन में और दूसरा गाजा पट्टी – में अब तक हजारों नागरिक मारे गये और घायल हुए हैं। कम से कम 10 अन्य देश और क्षेत्र हैं जहां गृह युद्ध, सशस्त्र हिंसा और आतंकवादी हमले वर्षों और यहां तक कि दशकों से मानवीय आपदाओं का कारण बन रहे हैं। इनमें अफगानिस्तान, बर्किना फासो और साहेल, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड और लेक चाड बेसिन, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमनी हौथी विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित लाल सागर शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव पर अपने वीटो के कारण अमेरिका अलग-थलग

इजरायल को और बढ़ावा मिलने से गाजा में नरसंहार खत्म होने की सारी उम्मीदें खत्म
सात्यकी चक्रवर्ती - 2024-02-23 11:27 UTC
गाजा पट्टी में इजरायली रक्षा बलों के युद्ध अपराधों को लगातार समर्थन देने के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका को अंततः अपने समर्थक देशों से बड़े अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। बाइडेन सरकार को मंगलवार रात अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना करना पड़ा जब उसके प्रतिनिधि ने गाजा में तत्काल मानवीय युद्धविराम की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को वीटो कर दिया।

जापान और ब्रिटेन में मंदी के साथ विश्व अर्थव्यवस्था में नयी अराजकता का दौर

लड़खड़ाता जर्मनी और निवेश से घुटा हुए चीन से बढ़ रही अव्यवस्था
अंजन रॉय - 2024-02-19 11:29 UTC
जापान, जो एक समय सबसे ऊंची रेटिंग वाली अर्थव्यवस्था थी, आधिकारिक तौर पर मंदी में है, तथा इसकी जीडीपी लगातार दो तिमाहियों से घट रही है। यूनाइटेड किंगडम, जो वर्तमान में अपने अतीत के गौरव की छाया में है और एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में लंबे समय से वंचित है, भी हाल ही में मंदी में आ गया है, जिससे प्रधान मंत्री ऋषि सुनक की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।

गाजा में हत्याएं 27,000 के पार, यूरोप का व्यवहार वाशिंगटन के सेवक की तरह

यूरोपीय देशों ने की इज़रायल को नरसंहार रोकने के आईसीजे के आदेश की अनदेखी
सात्यकी चक्रवर्ती - 2024-02-03 11:02 UTC
यूरोपीय संघ के देश जो स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बात करते हैं और मानवाधिकारों की रक्षा के मामले में खुद को अमेरिका सहित दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं, ने लगभग चार महीने से जारी इजरायल-हमास युद्ध में अपना असली रंग दिखा दिया है।

पाकिस्तान के चुनाव पूर्व परिदृश्य में पहले के प्रबंधित चुनावों से समानताएं

मतदाता विकल्प की तलाश में, जेल में बंद इमरान अभी भी एक बड़ी चुनौती
तीर्थंकर मित्र - 2024-02-01 16:06 UTC
8 फरवरी को पाकिस्तान में नयी संसद के चुनाव के लिए राष्ट्रीय चुनाव होंगे। लेकिन गणना के दिन तक की प्रक्रिया पिछले चुनावी अवसरों के समान उल्लेखनीय समानताओं और कुछ मतभेदों के साथ एक फीकी स्थिति बन गयी है।

पाकिस्तान में चुनाव से पहले आतंकवादी हमलों में वृद्धि की संभावना

2023 में देश में हुए घातक हमलों में 70 प्रतिशत की वृद्धि
गिरीश लिंगन्ना - 2024-01-06 07:40 UTC
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पाकिस्तान में हिंसा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। देश में हमलों की संख्या में लगभग 70% की वृद्धि देखी गयी। इन घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या में लगभग 81% की वृद्धि हुई, जबकि घायलों की संख्या में 62% की वृद्धि हुई।