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निवेश, कृषि और महिला सशक्तीकरण: वादों की निरंतरता

हंगामे के साथ शुरू हुआ मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र
राजु कुमार - 2026-02-16 11:38 UTC
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। इस बार प्रदेश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। अमानक कफ सिरप से बच्चों की मौत हो या फिर दूषित पानी से इंदौर में हुई मौत का मामला हो, विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है। सरकार इस वर्ष ‘किसान कल्याण वर्ष’ मना रही है, लेकिन प्रदेश में समर्थन मूल्य, फसल बीमा भुगतान और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान जैसे सवाल अभी भी मौजूद हैं। यदि विपक्ष इन मुद्दों को ठोस तथ्यों के साथ उठाता है तो वह अपनी कमजोर होती राजनीतिक छवि से बाहर निकल सकता है। सत्र के पहले दिन ही राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर हंगामा किया, जिससे यह संकेत मिल गया कि यह सत्र केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से टकरावपूर्ण होने वाला है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बिल्कुल अप्रत्याशित विजेता हैं राहुल गांधी

मोदी सरकार के मन में डर पैदा कर दिया है विपक्ष के इस नेता ने
के रवींद्रन - 2026-02-16 11:01 UTC
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के आस-पास चल रही राजनीतिक कहानी ने टैरिफ, बाजर में पहुंच और राजनयिक गठजोड़ पर बहस छेड़ने से कहीं ज़्यादा असर डाला है। इसने भारत के घरेलू राजनीतिक माहौल की रूपरेखा को बदल दिया है, खासकर राहुल गांधी का कद मुख्य विपक्षी नेता के तौर पर बढ़ाकर। मोदी सरकार ने व्यापार समझौते को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया है, जो 30 ट्रिलियन डालर के अमेरिकी बाजार में खास पहुंच की रणनीतिगत और आर्थिक मूल्य को दिखाता है। नई दिल्ली के नज़रिए से, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बेहतर प्रवेश पाना सिर्फ़ व्यापार क्षेत्र के अधिकारियों या उद्योग संघों जीत नहीं है; बल्कि इसे भारत के वैश्विक समेकीकरण के लिए एक बदलाव लाने वाला पल माना जा रहा है। फिर भी, इस नीति के ज़ोर के राजनीतिक झटके बहुत गहरे रहे हैं, और जो बात सबसे ज़्यादा सामने आई है, वह यह है कि कैसे आर्थिक राजनयिकता से जुड़ा एक मुद्दा राजनीतिक वैधता और नेतृत्व के लिए एक मुश्किल मुद्दा बन गया है।

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और निष्पक्षता का खत्म होना

विपक्ष संख्या में हार सकता है, लेकिन उसने अपनी वैधता की परीक्षा पास कर ली
टी एन अशोक - 2026-02-13 11:03 UTC
नई दिल्ली: भारत के संसद, जो लंबे समय से ज़ोरदार बहस और कभी-कभी हंगामे का मैदान रहा है, अब एक ऐसे युद्ध के मैदान में बदल गया है जहां "निष्पक्ष अंपायर" की अवधारणा ही खतरे में है। हाल ही में लगभग 120 विपक्षी सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास पेश करना सिर्फ एक प्रक्रिया से जुड़ी झड़प नहीं है, बल्कि यह एक ढांचागत दरार है। लोकसभा अध्यक्ष के इस दावे, जैसा पहले कभी नहीं हुआ, से शुरू हुए विवाद कि गुप्तचर सूचना से पता चला है कि विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "घेरने" की योजना बना रहे थे, स्वयं में एक ऐसी घटना है जो कार्यपालिका की सुरक्षा, विधायिका के विशेषाधिकार, और संसदीय स्वतंत्रता के क्रमबद्ध तरीके से खत्म होने के खतरनाक मेल को उजागर करती है।

भारी सब्सिडी से मुस्तैद अमेरिकी किसान भारतीय बाज़ार में अपने उत्पादनों की बाढ़ लाएंगे

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित होगा
नित्य चक्रवर्ती - 2026-02-12 11:42 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार में उनके मंत्री और वफादार विशेषज्ञों को जनता को यह समझाने में बहुत दिक्कत हो रही है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे हो रहे हैं, खासकर कृषि क्षेत्र को, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास लक्षित क्षेत्रों में से एक है।

भारत-अमेरिका समझौते के बाद भारत के वैश्विक संबंध दांव पर

विवादित हो सकते हैं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के वायदे
नन्तू बनर्जी - 2026-02-11 11:42 UTC
महीनों की बातचीत और अनिश्चितताओं के बाद पिछले सप्ताहांत भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले हिस्से के सम्पन्न होने पर जो उत्साह था, वह यदि जल्दबाजी में प्रकट नहीं हुआ हो तो शायद बेतुका है, क्योंकि यह अभी भी साफ नहीं है कि रूस और ईरान जैसे देशों को मिलाकर भारत की बहुपक्षीय संबंधों वाली वैश्विक व्यापार और आर्थिक रणनीति के प्रति संयुक्त राज्य अमेरिका का रवैया क्या होगा और यह व्यापार समझौते पर कैसे असर डाल सकता है।

टीएमसी से मुकाबले अभी काफी पीछे हैं पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता

मोदी-शाह के दौरों के बावजूद भगवा पार्टी का मनोबल अधिक मजबूत नहीं हुआ
तीर्थंकर मित्रा - 2026-02-10 11:14 UTC
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हराने की बात कहना भाजपा के लिए जितना आसान है, करना उतना आसान नहीं है, भले ही भाजपा नेता इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने की बात कर रहे हों। पूरी कोशिश करने के बावजूद लगातार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने में नाकाम रहने के बाद, भगवा पार्टी की 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने की उम्मीदें सत्ता विरोधी भावना, पूरे बंगाल में हिंदू एकजुटता, और टीएमसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली कहानी पर टिकी हैं। इन मुद्दों के आधार पर, इस चुनावी राज्य में भाजपा का प्रचार टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करिश्मे और उनकी सरकार के उन लोकप्रिय परियोजनाओं के खिलाफ होगा, जिनसे उन्हें चुनावी फायदा हुआ था। टीएमसी के इन चुनावी प्लेटफॉर्म से पार पाना भगवा खेमे के लिए अब तक की सबसे मुश्किल चुनावी परीक्षा होगी।

500 अरब डॉलर के भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में खनिज तेल मुख्य बिंदु

रूस से खनिज तेल आयात कम करना ही ट्रंप से टैरिफ में राहत पाने की कुंजी रही
के रवींद्रन - 2026-02-09 11:01 UTC
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ जारी संयुक्त घोषणा, जिसमें 500 अरब डॉलर के बड़े एजंडे में पहली चीज ऊर्जा है, और जिसके तहत अतिरिक्त टैरिफ हटाया गया है, स्पष्ट रूप से भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती से जुड़ा है। यह उस बदलाव को ठोस रूप देता है जो महीनों से बाजार के प्रवाह और नीतिगत विकल्पों में चुपचाप हो रहा था। लेकिन नई दिल्ली के लिए ऐसे बदलाव को स्वीकार करने में राजनीतिक संवेदनशीलता समझ में आती है।

मतदाताओं को सीधे कैश ट्रांसफर मामले की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार अनुचित

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के फैसले में कानूनी खोट और राजनीतिक रंग
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-02-07 11:36 UTC
सर्वोच्च न्यायालय का चुनाव के दौरान चुनावी आदर्श आचार संहिता (एससीसी) लागू होने के बाद मतदाताओं को सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा सीधे कैश ट्रांसफर, भारतीय चुनाव आयोग का इस तरह से चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर आंखें मूंद लेना, और मतदान के दिन लाभार्थियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करना अनुचित है क्योंकि इसमें पहचानने योग्य कानूनी कमजोरियां हैं और साथ ही राजनीतिक रंग भी, जिसने एक याचिकाकर्ता राजनीतिक पार्टी को चुनाव में उसकी विफलता के लिए उपहासपूर्ण टिप्पणी की, जबकि आरोप के गुणदोष में जाए बिना इसे न सुनने के लिए एक आधार बनाया भी बनाया।

केंद्र से मिलने वाले कर राजस्व से अधिक भुगतान करते हैं राज्य

16वें वित्त आयोग ने भारतीय संघवाद के अर्थशास्त्र को फिर से परिभाषित किया
आर. सूर्यमूर्ति - 2026-02-06 11:37 UTC
भारत के सोलहवें वित्त आयोग के क्षैतिज हस्तांतरण परिणामों को व्यापक रूप से एक तकनीकी पुनर्गठन के रूप में पढ़ा गया है जो अंततः राष्ट्रीय उत्पादन में राज्यों के योगदान को स्पष्ट रूप से पहचानकर आर्थिक प्रदर्शन को पुरस्कृत करता है। लेकिन अंकगणित के नीचे एक अधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक-आर्थिक बदलाव छिपा है, जिसमें भारत के संघीय राजकोषीय अनुबंध को समानता से दूर और सशर्त पुरस्कार की ओर फिर से पुनर्निर्धारित किया जा रहा है, भले ही केंद्र उन साधनों के माध्यम से कर आधार पर नियंत्रण मजबूत करना जारी रखे जो विभाज्य पूल से बाहर रहते हैं।
7 फरवरी जन्मदिवस पर विशेष

अहिंसा, सेवा और युवा चेतना का राष्ट्रवादी आदर्श थे सुब्बाराव

राष्ट्र-भक्ति और गांधीवादी मूल्यों के प्रतीक सुब्बाराव "भाईजी"
अनिल कुमार गुप्ता - 2026-02-06 11:28 UTC
मकान बना रहे दो राजमिस्त्रियों से एक ही प्रश्न पूछने पर मिले दो अलग-अलग उत्तर उनके दृष्टिकोण और कर्तव्यबोध को उजागर करते हैं। एक का कहना था—“परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहा हूँ”, जबकि दूसरे ने उत्तर दिया—“भारत माता की एक संतान के रहने के लिए भवन बना रहा हूँ।” प्रश्न केवल इतना था कि वे क्या कर रहे हैं। इस छोटे से उदाहरण के माध्यम से जीवन और राष्ट्र को देखने की व्यापक दृष्टि समझाने वाले व्यक्ति थे प्रख्यात गांधीवादी और सर्वोदयी नेता डॉ. एस.एन. सुब्बाराव, जिन्हें देशभर के युवा स्नेहपूर्वक ‘भाईजी’ कहकर संबोधित करते थे। उनका मानना था कि हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हम भारत माता की संतान हैं और अपने हर छोटे-बड़े काम को राष्ट्र-प्रेम और जिम्मेदारी की भावना से जोड़कर देखना चाहिए।