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मध्य प्रदेश में राममंदिर के चंदे के नाम पर हुड़दंग

पुलिस की मौजूदगी में अल्पसंख्यकों पर हमले
एल एस हरदेनिया - 2021-02-06 10:01 UTC
पिछले दिनों मध्यप्रदेश के कुछ स्थानों पर घटी साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं के दौरान बहुसंख्यकों के संगठनों के सामने पुलिस ने घुटने टेक दिए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को रोकने के बजाए मूकदर्शक की भूमिका अदा की। इस नतीजे पर वह स्वतंत्र जांच दल पहुंचा है जिसने अभी हाल में प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया।

सबकी स्वास्थ्य सेवा की ओर बजट का ध्यान नहीं

बच्चों के आहार पर खर्च में कमी चिंता का कारण
डॉ अरुण मित्रा - 2021-02-04 15:43 UTC
कोविड महामारी ने स्वास्थ्य सेवा में असमानताओं को उजागर किया है। समाज के गरीब और मध्यम आय वर्गों की देखभाल के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता बिलकुल स्पष्ट दिखी। आर्थिक रूप से अच्छी तरह से संपन्न वर्गों को निजी क्षेत्र से उपचार मिल सकता है। कॉरपोरेट अस्पतालों ने सरकार के नियमों का पालन नहीं किया। इसलिए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य पर बजट को व्यापक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा दी जानी चाहिए।

काँग्रेस ने मध्य प्रदेश में किसान रैली का आयोजन किया

जवाब में चौहान ने नये कार्यक्रमों की घोषणा की
एल एस हरदेनिया - 2021-02-03 10:59 UTC
भोपालः शिव कुमार शर्मा ‘कक्काजी’ के इस दावे के बावजूद कि मध्य प्रदेश के किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में बड़े उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

संकट काल का बजट

सरकारी संपत्तियों को बेचने की जगह रुपया छापा जाना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-02-02 10:07 UTC
निर्मला सीतारमण ने अपना यह बजट ऐसे समय में पेश किया है, जब देश अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और सरकार के सामने जबर्दस्त वित्तीय संकट मौजूद है। पिछला बजट पेश करते समय वित्तमंत्री ने केन्द्र सरकार के राजकोषीय घाटे का अनुमान सकल घरेलू उत्पाद के साढ़े तीन फीसदी लगाया था, लेकिन अब अनुमान है कि यह साढ़े नौ फीसदी हो गया है। अभी भी चालू वित्त वर्ष के दो महीने शेष हैं। इसलिए पूरी संभावना है कि वास्तविक राजकोषीय घाटा 10 फीसदी से ज्यादा ही होगा।

लाल किले पर हाय-तौबा

इस राष्ट्रीय गौरव को तो सरकार पहले ही ठेके पर दे चुकी है!
अनिल जैन - 2021-02-01 12:03 UTC
केंद्र सरकार के बनाए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन में दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला भी चर्चा में आ गया है। कृषि सुधार के नाम पर बनाए गए तीनों कानूनों को अपने लिए ‘डेथ वारंट’ मान रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली में 26 जनवरी को कुछ जगह उपद्रव होने की खबरों के बीच सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर रहा कि कुछ लोगों ने लाल किले पर तिरंगे के बजाय दूसरा झंडा फहरा दिया।

आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 ने सरकारी नीतियों का बचाव किया

अधिक सक्रिय राजकोषीय नीति की वकालत की
ज्ञान पाठक - 2021-01-30 16:26 UTC
आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में भारत की जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया गया है। यद्यपि सर्वेक्षण सभी प्रकार के तर्क देकर लोगों में आशा जगाने की कोशिश करता है, लेकिन वह पिछले साल के सर्वेक्षण की तरह बहुत आशावादी नहीं है, जिसमें 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। ताजा आर्थिक सर्वेक्षण इस मायने में रक्षात्मक है।

त्रिपुरा में भाजपा अपनी धूमिल छवि की परवाह करे

बर्खास्त शिक्षकों की समस्या का हल हो
सागरनील सिन्हा - 2021-01-29 10:54 UTC
3 मार्च, 2018 बीजेपी के लिए एक ऐतिहासिक दिन था, जब पार्टी- जो शायद ही कुछ साल पहले राज्य में दिखाई दे रही थी - 25 वर्षीय माकपा के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार को अपदस्थ करने में सफल हो गई। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता के आधार पर भाजपा सीपीआई (एम) के शासन के 25 वर्षों से उत्पन्न मजबूत एंटी-इनकंबेंसी का फायदा उठा सकी। नई सरकार से राज्य के हर कोने के लोगों को उच्च उम्मीदें थीं।

अखिलेश यादव ने छोटे दलों से गठबंधन के संकेत दिए

सपा प्रमुख कांग्रेस और बसपा से निराश हो चुके हैं
प्रदीप कपूर - 2021-01-28 11:03 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस कथन को बहुत महत्व दिया जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को हराने के लिए छोटे दलों और समूहों के साथ गठबंधन करेंगे।

बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है भारतीय गणतंत्र

गण और तंत्र के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है
अनिल जैन - 2021-01-27 10:33 UTC
भारतीय गणतंत्र की स्थापना का 72वां वर्ष शुरू हो गया है। किसी भी राष्ट्र या गणतंत्र के जीवन में सात दशक की अवधि अगर बहुत ज्यादा नहीं होती है तो बहुत कम भी नहीं होती। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय गणतंत्र ने अपने अब तक के सफर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसी अवधि में कई ऐसी चुनौतियां भी हमारे समक्ष आ खड़ी हुई हैं जो हमारे गणतंत्र की मजबूती या सफलता को संदेहास्पद बनाती हैं, उस पर सवालिया निशान लगाती हैं।

वार्ता की विफलता के लिए सरकार जिम्मेदार

अहंकार के कारण ही यह गतिरोध पैदा हुआ है
के रवीन्द्रन - 2021-01-25 09:44 UTC
कोविड महामारी के कारण मोदी सरकार को नागरिकता कानून के खिलाफ आंदोलन को समाप्त करवाने में सफलता मिली। सच कहा जाए तो वह आंदोलन अपने आप समाप्त हो गया। कोविड महामारी वैसे समय में आई, जब नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहा आंदोलन तेजी से विस्तार पा रहा था और सरकार के नियंत्रण से भी बाहर होता जा रहा था। लेकिन कोविड का किसान आंदोलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, क्योंकि यह महामारी के बावजूद चल रहा है। कह सकते हैं कि आंदोलन चरम संक्रमण बिंदु से बच गया है, जो कि सभी संकेत हमें दिख रहे है। किसान आंदोलन वैसे समय में शुरू हुआ, जब कोरोना के मामले कम होने लगे थे। आंदोलन जब शुरू हुआ, तो यह लग रहा था कि महामारी फिर से फैलने लगेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शायद इसका कारण यह हो कि हर्ड इम्युनिटी का एक संतोषजनक स्तर अब बन चुका है।