चुनाव आयोग का पतन: चुनाव प्रहरी से पिंजरे में बंद तोते तक
टी एन शेषन के बिल्कुल विपरीत हैं ज्ञानेश कुमार
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2025-08-25 10:47 UTC
भारतीय महाकाव्य हमें बताते हैं कि कभी भी कमज़ोर पर आक्रामकता उचित नहीं हैं। यह महाभारत में भी अंकित एक सबक है। द्रौपदी के अपमान में शामिल होने के बाद पछतावे से भरे कर्ण ने गलत दिशा में शक्ति का प्रयोग करने की शर्मिंदगी स्वीकार की थी। उस समय द्रौपदी न केवल महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थीं, बल्कि शक्तिशाली के विरुद्ध कमज़ोर की रक्षा के सिद्धांत का भी प्रतिनिधित्व करती थीं। आज के भारत के लोकतंत्र के साथ इसकी समानता आश्चर्यजनक है। भारत का चुनाव आयोग, जिसे चुनाव में कमज़ोर पक्ष की रक्षा करने का दायित्व सौंपा गया है, अपनी आक्रामकता को जहां सबसे आसान हो - विपक्ष के विरुद्ध - निर्देशित करता हुआ दिखाई देता है, जबकि वह सरकार के इर्द-गिर्द चुपचाप घूमता रहता है। जब टी एन शेषन चुनाव आयुक्त थे तब चुनाव आयोग प्रहरी था, और जब आज ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं तब चुनाव आयोग पिंजरे में बंद तोते के समान व्यवहार कर रहा है।