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कोरोना संकट के लिए जिम्मेदार कौन

केन्द्र सरकार ने दोष राज्य सरकारों पर मढ़ा
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-03-28 10:19 UTC
देश कोरोना वायरस कोविड 19 के मारक संकट के दौर से गुजर रहा है। देश के सभी लोगों को अपने अपने घरों में कैद रहने के लिए कहा गया है और उन्होंने अपने को कैद कर भी लिया है। पता नहीं यह संकट आगे कौन सा रूप लेता है और इस संकट के दौर में सबको मिलजुल कर इसका सामना करना चाहिए। पर आश्चर्यजनक रूप से केन्द्र सरकार ने इस मामले पर दोषारोपन करना शुरू कर दिया है। यह सरकारों की जिम्मेदारी थी कि वे समय रहते उचित कदम उठाते, जिससे इस अभूतपूर्व घरबंदी की जरूरत ही नहीं पड़ती, लेकिन उन्होंने अपना फर्ज नहीं निभाया। सबसे पहले अंगुली तो केन्द्र सरकार पर ही उठनी चाहिए, लेकिन केन्द्र सरकार पर कोई अंगुली उठाए, उसके पहले ही केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों पर अंगुली उठा दी है और कहा है कि 18 जनवरी से 18 मार्च तक विदेश से आए 15 लाख लोगों की सही तरीके से जांच प्रदेश सरकारों ने नहीं कराई, इसलिए यह संकट खड़ा हो गया।

कोरोनावायरस का घरबंदी संकट

सरकार ने विस्थापित मजदूरों की अनदेखी कर दी
बिनॉय विस्वम - 2020-03-27 10:35 UTC
ये किसी भी देश के लिए असामान्य दुख के दिन हैं। कोरोनवायरस के प्रकोप और प्रसार ने देश को बंद कर दिया है। यूरोप से गुजरते हुए चीन से उत्पन्न महामारी भारत में आई है। हालांकि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा पर्याप्त चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकार ने इसे हल्के में ले लिया। अब जब तबाही मची है, तो पूरा देश महामारी की चपेट में है। लेकिन एक देश और लोगों के रूप में हमें वास्तविकता का सामना करना होगा और इसे दूर करना होगा।

मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह की वापसी

कमलनाथ की नियुक्तियों को वे तेजी से कर रहे हैं रद्द
एल एस हरदेनिया - 2020-03-26 10:57 UTC
भोपालः विश्वास मत जीतने और चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ द्वारा इस्तीफा देने से कई घंटे पहले लिए गए कई फैसलों को रद्द कर दिया है। नाथ ने कई महत्वपूर्ण कांग्रेस नेताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया था। अधिकांश नियुक्तियां ऐसी थीं जो स्वभाव से अर्ध-न्यायिक थीं।

कोरोना से कैसे निबटें

यह भयावह है, पर हम असहाय नहीं
ज्ञान पाठक - 2020-03-25 10:08 UTC
लगभग पूरे भारत में कोरोनोवायरस रोग 2019 के खिलाफ एक रक्षात्मक उपाय के रूप में तालाबंदी की जा रही है, लेकिन रोगियों की बढ़ती संख्या और बीमारी के कारण होने वाली मौतों के मामले में देश को तत्काल ठीक करने के लिए एक निश्चित रणनीति भी चाहिए। पूर्ण लॉकडाउन के बाद कुछ नई चुनौतियां सामने आई हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत है। साथ ही बीमारी और आर्थिक संकट के खिलाफ ठीक-ठाक रक्षात्मक और आक्रामक कदम उठाने की जरूरत है ताकि मानवीय कष्टों को कम किया जा सके। नए परिदृश्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी अराजकता को रोकने के लिए कानून और व्यवस्था तंत्र को अब हाई अलर्ट पर रखा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश कोरोना की चुनौती का सामना करने को तैयार नहीं

कणिका प्रकरण पर प्रशासन की विफलता परेशानी का सबब
प्रदीप कपूर - 2020-03-24 09:55 UTC
लखनऊः कनिका कपूर प्रकरण ने घातक कोरोना वायरस कोविद 19 से निपटने के लिए केंद्रीय और साथ ही राज्य सरकार की खराब तैयारी को उजागर किया है।

अंदरूनी गुटबाजी कमलनाथ सरकार को ले डुबी

सिंधिया की नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ी
एल एस हरदेनिया - 2020-03-23 11:18 UTC
भोपालः कमल नाथ सरकार के पतन का कारण बने कारकों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम ऑपरेशन जारी है। विभिन्न कारकों को सूचीबद्ध किया जा रहा है, हालांकि कई लोगों को लगता है कि महीनों पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को खोदने का मन बना लिया था। कुछ सकारात्मक कदमों से उस त्रासदी को रोका जा सकता था। मीडिया के एक वर्ग द्वारा उल्लेख किए जा रहे कारकों में से एक यह है कि कमलनाथ मंत्रियों और विधायकों सहित सामान्य रूप से सत्ताधारी दल के लोगों और नेताओं के साथ तालमेल स्थापित करने में विफल रहे।

दीनदयाल उपाध्याय और दलबदल

भाजपा ने अपने संस्थापक के निर्देशों का उल्लंघन किया है
एल एस हरदेनिया - 2020-03-21 10:36 UTC
दलबदल एक ऐसा संक्रामक रोग है जो हमारी संसदीय व्यवस्था को खोखला कर रहा है। इस रोग की गंभीरता को अन्य लोगों के अलावा जनसंघ के संस्थापक और भारतीय जनता पार्टी के लाखों सदस्यों के प्रेरणास्त्रोत दीनदयाल उपाध्याय ने भी समझा था। उन्हांेने 27 फरवरी 1961 को लिखे एक लेख में कहा था कि ‘‘प्रजातंत्र में एक से अधिक पार्टी होना स्वाभाविक है। इन पार्टियों को एक प्रकार के पंचशील को अपनाना चाहिए तभी स्वस्थ परंपराएं कायम हो सकेंगी। यदि वैचारिक और सैद्धांतिक आधार पर दलबदल होता है तो वह कुछ हद तक न्यायोचित माना जा सकता है। अन्य किसी भी आधार पर या कारण से होता है तो उसे उचित नहीं माना जा सकता। यदि ऐसी स्थिति हो कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिले या बहुत कम अंतर से बहुमत मिले और राजनैतिक दल सत्ता हथियाने के लिए अनैतिक तरीके अपनाकर बहुमत हासिल करने का प्रयास करें तो यह बहुत गलत होगा।
मध्यप्रदेश का राजनीतिक संकट

क्या वाकई कमलनाथ की सरकार अल्पमत में थी?

कमलनाथ के इस्तीफे के बाद भी भाजपा की राह नहीं है आसान
राजु कुमार - 2020-03-20 11:23 UTC
पिछले 10 दिनों से मध्यप्रदेश में चल रही सियासी उठापटक का एक संभावित परिणाम सामने आ ही गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लाल जी टंडन को अपना इस्तीफा दे दिया। इस तरह मध्यप्रदेश में 15 महीने से सत्ता पर काबिज कांग्रेस आज सत्ता से बाहर हो गई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 20 मार्च को कांग्रेस को सदन में बहुमत साबित करना था, लेकिन विधायकों की संख्या कम होने से कांग्रेस के लिए सदन में अपना बहुमत साबित करना संभव नहीं था।

कोरोनावायरस से बचकर रहना ही एकमात्र विकल्प

भारत की स्वास्थ्य सेवा बड़े पैमाने पर इसका सामना करने में अक्षम
निपुण सक्सेना - 2020-03-20 11:16 UTC
रूढ़िवादी अनुमानों के अनुसार कोरोनावायरस से ग्रस्त लोगों की मृत्यु दर 2 से 3 फीसदी के बीच है। उच्च मृत्यु दर उनपर लागू होता है जो पहले से ही बीमारियों से ग्रस्त हैं या अधिक उम्र के हैं या जिनके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है।

राज्यसभा के लिए गोगोई का मनोनयन

एक बडे खतरे की आहट
अनिल जैन - 2020-03-19 11:22 UTC
भारतीय जनता पार्टी के दिवंगत नेता अरुण जेटली ने 30 सितंबर, 2012 को दिल्ली में वकीलों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए टिप्पणी की थी, "हमारे देश में दो तरह के जज होते हैं- एक वे जो कानून जानते हैं और दूसरे वे जो कानून मंत्री को जानते हैं। दूसरी तरह के जज रिटायर नहीं होना चाहते, इसलिए रिटायर होने से पहले दिए गए उनके फैसले रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले काम से प्रभावित होते हैं।"