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दक्षिण एशिया में कमजोर हो रही हैं धर्मनिरपेक्ष शक्तियां

भारत के लिए भी धर्मनिरपेक्षता का कमजोर होना चिंता का विषय
एल.एस. हरदेनिया - 2025-11-28 11:28 UTC
ऐसा लगता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में धर्मनिरपेक्षता की ताकतें पूरी तरह कमजोर हो गई हैं। जब भारत और पाकिस्तान आजाद हुए थे तब भारत में धर्मनिरपेक्ष ताकतें बहुत मजबूत थीं क्योंकि उस समय महात्मा गांधी भी थे, जवाहर लाल नेहरू भी थे और सरदार पटेल भी, जो सभी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखते थे। सरदार पटेल ने कहा था कि वे भारत में मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी देते हैं परंतु उनकी मुसलमानों से भी यह अपेक्षा थी कि वे भारत के प्रति वफादार रहें।

केंद्र की चार अधिसूचित श्रम संहिताएं करती हैं मज़दूरों की सुरक्षा को कमज़ोर

ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई ही उनके अधिकारों को सुरक्षित करने की एकमात्र गारंटी
नीलोत्पल बसु - 2025-11-28 10:47 UTC
बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की बड़ी चुनावी जीत और उसके साथ हुई खुशी के तुरंत बाद भारत सरकार ने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को अधिसूचित कर दिया है। मज़दूरी, औद्योगिक संबंध, काम से जुड़ी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर बनी ये संहिताएं देश के ‘29 श्रम कानूनों को आसान बनाने’ के नाम पर हावी हो गए हैं।

अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में डिजिटल छलांग के भरोसे उद्यमों का विकास संभव नहीं

एक गहरे ढंचागत बदलाव को छिपा रहे हैं आंकड़े, अभी बहुत कुछ करने की जरुरत
आर. सूर्यमूर्ति - 2025-11-27 11:20 UTC
भारत के अनौपचारिक क्षेत्र (अनइनकॉरपोरेटेड नॉन-एग्रीकल्चरल सेक्टर) के गत तिमाही के बुलेटिन, पहली नज़र में, वैश्विक झटकों से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए एक मामूली जीत की तरह लगते हैं: डिजिटल संरचना अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ रही है, उद्यम थोड़े आगे बढ़े हैं, और रोज़गार स्थिर बना हुआ है। लगभग 39% उद्यम अब किसी न किसी रूप में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह एक ऐसे सेक्टर के लिए एक चौंकाने वाला बदलाव है जो लंबे समय से खाता-बही और नकद लेन-देन पर टिका हुआ है। उद्यमों की संख्या बढ़कर 7.97 करोड़ हो गयी, रोज़गार 12.86 करोड़ पर बना रहा, और शहरी श्रमिकों को काम पर लेने में मज़बूती आयी।

भारत के बढ़ते विदेशी कर्ज़ के पीछे बढ़ता व्यापार घाटा

पिछले महीने का नया रिकॉर्ड केंद्र के लिए चिंता की बात होनी चाहिए
नन्तू बनर्जी - 2025-11-26 11:06 UTC
सरकार भले ही इससे सहमत न हो, लेकिन भारत का लगातार व्यापार घाटा देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रहा है, जबकि विकास दर शानदार है। पिछले महीने, आयात पर ज़्यादा ध्यान देने वाले भारत का व्यापार घाटा 41 अरब डालर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि निर्यात में एक साल में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। बदकिस्मती से, अक्टूबर के दौरान देश में सोने के आयात में भारी उछाल आया, जो बड़े व्यापार घाटा का एक कारण है। यह स्थिति तब है जब 2024 ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) के अनुसार, भारत में दुनिया के सबसे ज़्यादा (23.4 करोड़) लोग अत्यंत गरीबी में जी रहे हैं।

भारत उथल-पुथल भरे औद्योगिक संबंधों के एक नए दौर में दाखिल हुआ

नई श्रम संहिताएं लागू हुईं, मज़दूरों का 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-11-25 11:25 UTC
भारत सरकार द्वारा 21 नवंबर, 2025 को चार विवादित श्रम संहिताएं लागू करने की एकतरफ़ा घोषणा और 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) के जॉइंट प्लेटफॉर्म का 26 नवंबर को इसके खिलाफ़ पहले से तय अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज़ करने का निर्णय, देश में उथल-पुथल भरे औद्योगिक संबंधों के एक नए दौर का साफ़ संकेत हैं। सरकार का कहना है कि श्रम संहिताएं मज़दूरों के पक्ष में है, जबकि सीटीयू का आरोप है कि यह मज़दूरों के खिलाफ़ और कॉर्पोरेट के पक्ष में है।

एनडीए ने बिहार विधानसभा चुनाव में उठाया एसआईआर पर असुरक्षा की भावना का लाभ

इंडिया ब्लॉक को निष्पक्ष चुनाव के लिए संघर्ष करते हुए आत्मनिरीक्षण करना होगा
नीलोत्पल बसु - 2025-11-22 10:48 UTC
बिहार विधानसभा चुनाव हमारे देश के चुनावी इतिहास में एक अहम मोड़ है। 25 जून को घोषित मतदाता सूची का विशेष गहन पुरनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) (एसआईआर) की पृष्ठभूमि में हुए इस चुनाव में, वयस्क मताधिकार के लिए नए बुनियादी नियम बनाए गए।

सर्वोच्च न्यायालय के परामर्शी विचार के दूरगामी असर होंगे

राष्ट्रपति द्वारा मांगी गयी सलाह पर फैसले के फायदे और जोखिम
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-11-21 10:30 UTC
यद्यपि भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अगुवाई वाली सर्वोच्च् न्यायालय की पांच जजों की संविधान पीठ के परामर्शी विचार, जो भारत के संविधान की धारा 143 के तहत दिये गए हैं, बाध्यकारी नहीं है, इसके दूरगामी असर होने की संभावना है, जो कार्यपालिका, न्यायपालिका, राज्यपाल, और देश के राष्ट्रपति के भावी कार्यों के अलावा, राज्यों और केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टियों के कामों पर भी असर डालेगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के विचार एक आधिकारिक संवैधानिक विचार के तौर पर काफी अहमियत रखती है।

पंजाब के अधिकारों में कटौती से आ रही राजनीतिक प्रतिशोध की बू

केंद्र स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करे और छात्रों की भावनाओं का सम्मान करे
जग मोहन ठाकन - 2025-11-19 11:11 UTC
चंडीगढ़: पंजाब के लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि राज्य की शक्तियों, पकड़ और अधिकारों में कटौती की जा रही है? कौन से संकेत इस धारणा को दर्शा रहे हैं? क्या पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट के ढांचे को खत्म करना, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की भूमिका को कमज़ोर करना, चंडीगढ़ प्रशासन के संचालन में पंजाब की हिस्सेदारी को कम करके केंद्र द्वारा नियंत्रण करना महज़ एक संयोग है? शायद नहीं, ये सारी हरकतें अपने आप में किसी साज़िश की ओर इशारा करती हैं; राजनीतिक पर्यवेक्षक ऐसा ही मानते हैं। पंजाब के राजनीतिक नेता भी अपनी संबद्धता को दरकिनार करते हुए इसी तरह के आरोप लगा रहे हैं।

सरकार को छोड़कर सभी से अनुपालन की मांग करते हैं भारत के नए गोपनीयता नियम

डिजिटल जीवन को व्यक्तिगत गोपनीयता कायम रखकर नियंत्रित किया जाना चाहिए
आर. सूर्यमूर्ति - 2025-11-17 11:15 UTC
भारत ने आखिरकार अपनी लंबे समय से विलंबित डेटा सुरक्षा व्यवस्था को लागू कर दिया है, और पहली नज़र में, यह क्षण एक मील का पत्थर जैसा लगता है - 1.4 अरब लोगों का देश उन देशों की श्रेणी में शामिल हो रहा है जो डिजिटल अधिकारों को गंभीरता से लेते हैं। लेकिन आधिकारिक बयानों, अनुपालन की उल्टी गिनती और सावधानीपूर्वक तैयार की गई बयानबाजी को छोड़ दें, तो कुछ और भी परेशान करने वाले तथ्य सामने आते हैं। नए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 कंपनियों और व्यक्तियों से सख्त, लगभग यूरोपीय स्तर के अनुशासन की मांग करते हैं - जबकि भारत सरकार को जब चाहे कानून को दरकिनार करने का एकतरफा अधिकार देते हैं। यही असली कहानी है। नोटिस या समय सीमा नहीं। मूल तथ्य यह है कि सरकार ने अपने लिए एक ऐसा व्यापक रास्ता बना लिया है जो प्रभावी रूप से राज्य को भारत की अपनी गोपनीयता व्यवस्था की परिधि से बाहर कर देता है।

बिहार विधानसभा चुनावों में लगे बड़े झटके से इंडिया ब्लॉक को उचित सबक लेना चाहिए

भाजपा में आयी नयी जान, अगले साल चार राज्यों के विधानसभा चुनाव अगला लक्ष्य
नित्य चक्रवर्ती - 2025-11-15 16:09 UTC
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने बिहार विधानसभा चुनावों में भारी जीत हासिल की है और 243 सदस्यीय राज्य विधानसभा में एनडीए के घटकों की जीत ने राजद और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटकों को चौंका दिया है। एनडीए को 202 सीटें मिली हैं, जबकि महागठबंधन को 35 और अन्य को छह सीटें। 2025 के इस जनादेश को राजद के नेतृत्व वाले बिहार में इंडिया ब्लॉक के लिए एक बड़ी आपदा के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि 2020 के विधानसभा चुनावों में, महागठबंधन बहुमत के करीब पहुंच गया था। एनडीए को 122 सीटें मिलीं थीं, जबकि महागठबंधन को 114 और अन्य को सात सीटें। 2020 में राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा को 74 सीटें मिलीं। पांच साल पहले जद(यू) तीसरे नंबर की पार्टी थी।
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