लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव की प्रासंगिकता
इसका कोई औचित्य नहीं
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2018-08-23 11:24 UTC
देश के बदलते राजनीतिक हालात में जहां देशभर में राजनीतिक छोटे दलों की बहुतायत है, जहां आज भी आया राम गया राम की राजनीतिक प्रक्रिया हावी है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बने रहने की संभावनाएं सदैव बनी रहती है, लोकसभा के साथ विधान सभा के चुनाव कराने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। इस तथ्य को प्रायः सभी जानते है। देश में आज आम चुनाव कराना कितना कठिन हो गया जहां विधानसभा के चुनावों में प्रशासनिक व्यवस्था के चलते पूरे माह का समय लग जाता है। इस तरह के हालात भी देशभर में लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के सकरात्मक परिवेश नहीं उभार सकते फिर सत्ता पक्ष की ओर से एक देश एक चुनाव के तहत लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की प्रांसगिकता बनाने के प्रयास बार - बार किये जा रहे है। जहां सत्ता पक्ष के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा के राष्टीªय अध्यक्ष अमीत शाह ने विधि आयोग को चुनाव खर्च कम करने के हवाला देते हुए लोकसभा के साथ 14 राज्यों के विधानसभा चुनाव करने हेतु पत्र लिखा है ।