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ट्रंप की जीत का श्रेय हिलेरी को ही मिलना चाहिए

सांडर्स को गलत तरीके से पराजित करना डेमोक्रेट पर भारी पड़ा
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-11-12 10:56 UTC
डोलाल्ड ट्रंप की अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हुई जीत से दुनिया भर और खुद अमेरिका के अनेक लोग हैरान हैं। वे लोग ट्रंप की जीत की उम्मीद नहीं कर रहे थे और उनकी जीत की आशंका से डर भी रहे थे, क्योंकि राष्ट्रपति उस उम्मीदवार की कुछ बातें लीक से हटकर थीं। ट्रंप अमेरिका में दूसरे देशों के मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की बात कर रहे थे। इराक में शहीद हुए एक अमेरिकी मुस्लिम जवान के परिवार के साथ बहुत ही क्रूरता से पेश आए थे। महिलाओं के प्रति भी वे कुछ असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को वे एक नाटक बता रहे थे। अमेरिकी युवकों की बेरोजगारी के लिए वे आउटसोर्सिंग को जिम्मेदार बता रहे थे और राष्ट्रपति बनने पर उसपर रोक लगाने की घोषणा कर रहे थे। वे मुक्त व्यापार को अमेरिकी हितों के खिलाफ बोल रहे थे। जापान को अमेरिका द्वारा दी जा रही सुरक्षा का भी वे मजाक उड़ा रहे थे और कह रहे थे कि यदि जापान पर कोई हमला होगा, तो अमेरिकी सेना उसे बचाने जाएगी और जब अमेरिका पर हमला होगा, तो जापान के लोग अपने घरों में बैठकर सोनी टीवी देखेंगे। चीन के बारे में भी वे कुछ ऐसी बातें कर रहे थे, जिससे लगता था कि उनके राष्ट्रपति बनने से उस देश के साथ भी संबंध खराब होंगे। पाकिस्तान को वे दुनिया का सबसे खतरनाक देश बता रहे थे। भारत के अनेक लोगों को डर लग रहा था कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद आउटसोर्सिंग पर नियंत्रण लगेगा और भारत में उसका खराब असर पड़ेगा। अमेरिका में आ रहे विदेशी लोगों के प्रति भी उनके विचार अच्छे नहीं थे।

डोनाल्ड ट्रंप मानवता के लिए खतरा

इसे लेकर भारत को कोई भ्रम नहीं पालना चाहिए
नित्य चक्रबर्ती - 2016-11-05 09:13 UTC
अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 8 नवंबर को मतदान होंगे। यह चुनाव अमेरिकी इतिहास का सबसे घिनौने चुनाव प्रचार का साक्षी रहा है। मतदाताओं में 10 लाख से भी ज्यादा लोग भारतीय मूल के हैं। चुनाव में मुख्य मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिक पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच है, हालांकि दो अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं।

अगले कदम को लेकर पाकिस्तान संशय में

नवाज शरीफ को पीछे कर सेना प्रमुख ने कमान संभाली
अमूल्य गांगुली - 2016-10-05 11:13 UTC
पाकिस्तान को हमेशा भारत की तरफ से अपने अस्तित्व पर खतरा मंडराता दिखाई देता है। भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के कारण वह सदमे में है और उसे वह खतरा सच होता दिखाई दे रहा है।

संकट मे दक्षेस: पाकिस्तान नहीं जाएंगे मोदी

उपेन्द्र प्रसाद - 2016-09-28 11:46 UTC
आगामी नंवबर महीने में हो रहे दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन के पाकिस्तान में होने वाले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नहीं शामिल होने की घोषणा के बाद दक्षिण एशिया के इस क्षेत्रीय सहयोग संगठन के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। भारत की घोषणा के बाद बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भूटान ने भी उसके बहिष्कार के संकेत दे डाले हैं। इस संगठन में इस समय कुल 8 सदस्य हैं और उनमें चार यदि उसका बहिष्कार कर दें, तो फिर शिखर बैठक का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है।

समूह-20 शिखर सम्मेलन: कोई ठोस योजना उभर कर सामने नहीं आई

सुब्रत मजूमदार - 2016-09-09 06:47 UTC
हांगझाउ में समूह-20 के देशों का शिखर सम्मेलन संपन्न हो गया, लेकिन इसके नतीजे निराशाजनक हैं। इस समूह की स्थापना दुनिया के दो वित्तीय संकट के बाद हुई थी। जाहिर है, वित्तीय और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए इसका गठन किया गया। पहला संकट 1997 का करेंसी संकट था और दूसरा संकट लेहमान को 2008 में लगा झटका था, जिसके कारण पूरी दुनिया में ही आर्थिक संकट शुरू हो गया था। उसके बाद ही समूह-20 अस्तित्व में आया।

काबुल में गोरखा की मौत से नेपाल परेशान

कनाडा दूतावास के रवैये पर आपत्ति
आशीष बिश्वास - 2016-06-29 13:02 UTC
नेपाल के राजनीतिज्ञ कनाडा सरकार की आलोचना कर रहे हैं। इसका कारण काबुल में हुए एक आत्मघाती हमले में 14 गोरखा जवानों की मौत है। उस मौत को नेपाल कनाडा की लापरवाही का परिणाम बता रहे हैं।

वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक 2016: भारतीयों की खुशी पर 'विकास’ का ग्रहण!

अनिल जैन - 2016-04-17 04:30 UTC
हमारे देश में पिछले करीब दो दशक से यानी जब से नव उदारीकृत आर्थिक नीतियां लागू हुई हैं, तब से सरकारों की ओर से आए दिन आंकडों के सहारे देश की अर्थव्यवस्था की गुलाबी तस्वीर पेश की जा रही है और आर्थिक विकास के बडे-बडे दावे किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे सर्वे भी बताते रहते हैं कि भारत तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है और देश में अरबपतियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इन सबके आधार पर तो तस्वीर यही बनती है कि भारत के लोग लगातार खुशहाली की ओर बढ रहे हैं। लेकिन हकीकत यह नहीं है। हाल ही में जारी ’वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक 2016’ में भारत को 157 देशों में 118वां स्थान मिला है। यह प्रसन्नता सूचकांक संयुक्त राष्ट्र का एक संस्थान सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन नेटवर्क (एसडीएसएन) हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वे करता है, जिसमें अर्थशास्त्रियों की एक टीम समाज में उदारता, सहिष्णुता और अपनी पसंद की जिंदगी जीने या अपने बारे में फैसले लेने की आजादी, सामाजिक सुरक्षा, लोगों में स्वस्थ और दीर्घ की जीवन की प्रत्याशा, भ्रष्टाचार आदि पैमानों पर दुनिया के सारे देशों के नागरिकों के इस अहसास को नापती है कि वे कितने खुश हैं?

सीरिया में पुतीन की सफलता से अमेरिका परेशान

समझौता वार्ता का हल निकलना चाहिए
अरुण श्रीवास्तव - 2016-02-17 03:05 UTC
सीरिया समस्या का हल निकालने के लिए दुनिया की बड़ी हस्तियां बयानबाजी कर रही हैं और उसके लिए समझौता वार्ता भी हो रहा है। यह इसलिए हो रहा है, क्योंकि अब वहां का असद प्रशासन अपनी ताकत बढ़ा रहा है। सच तो यह है कि सीरिया के नये इलाकांे पर भी अब असद का कब्जा हो रहा है और इसके कारण अमेरिका और उसके अन्य समर्थक देश परेशान हो रहे हैं।

सऊदी ने मुस्लिम देशों को युद्ध की ओर धकेला

अमेरिका को जिम्मेदारी लेनी होगी
अरुण श्रीवास्तव - 2016-01-14 11:58 UTC
सऊदी अरब को पता था कि यदि उसने शिया के धर्मगुरू शेख निम्र को मौत की सजा दी, तो उसका परिणाम घातक होगा। उसके बावजूद ने उसने वैसा किया, तो इसके क्या कारण हो सकते हैं? यह मानने का कोई कारण नहीं है कि सऊदी को नहीं पता था कि उसका क्या परिणाम होगा। इसका मतलब है कि उसने जानबूझकर वैसा किया और उसके पीछे उसकी एक सोची समझी रणनीति थी। सऊदी सरकार जानबूझकर धार्मिक उन्माद पैदा करना चाहता था ताकि सऊदी लोगांे के बीच सत्तारूढ़ परिवार की स्थिति मजबूत बने। इस तरह का निर्णय सत्ताधारी लोग लेते रहते हैं। खासकर ऐसा वे तब करते हैं, जब देश में सामाजिक, राजनैतिक अथवा आर्थिक उथल पुथल का दौर रहता है।

दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग ले रहा है रूप

भारत और बांग्लादेश को होगा बहुत फायदा
आशीष बिश्वास - 2016-01-08 12:07 UTC
कोलकाताः दक्षिण एशिया में धीरे धीरे क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग रूप लेने लगा है। भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच हुए समझौते अब अमल भी किए जाने लगे हैं।