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क्या ब्रह्मपुत्र पर खतरे में है?

चीन द्वारा सुरंग बनाने की खबर
बरुण दास गुप्ता - 2017-11-07 13:03 UTC
हांगकांग से छपने वाले एक अखबार दक्षिण चीन माॅर्निंग पोस्ट में एक खबर छपी कि चीन एक हजार किलोमीटर लंबी सुरंग बना रहा है, जो ब्रह्मपुत्र के पानी को तिब्बत से शिनशियांग प्रांत में भेजने का काम करेगा। गौरतलब हो कि शिनशियांग चीन का पश्चिमी प्रांत है और वहां पानी की भारी किल्लत रहती है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में यारलंग त्सांगपो कहा जाता है।

शरणार्थी संकट पर एक जुट हो दुनिया

ग्लोबल संकट बनता पलायनवाद
प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-09-28 10:55 UTC
म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों आए संकट और पलायन के बाद पूरी दुनिया में एक बार फिर शरणार्थी समस्या बहस का मसला बन गयी है। पलायनवाद एक समुदाय विशेष की समस्या के बजाय एक वैश्विक विभीषिका के रुप में उभरा है। संयुक्तराष्ट संघ भी इस पर गहरी चिंता जता चुका है। लेकिन आतंरिक गृहयुद्ध, जातिय हिंसा के साथ आतंकवाद की वजह से सबसे अधिक लोगों का पलायन हुआ है। शरणार्थी समस्या मानवीयता से जुड़ा मसला है। इसे धर्म और जाति, समुदाय से जोड़ना गलत होगा।

रोहिंग्या संकट से दक्षिण एशिया में अस्थिरता

भारत बांग्लादेश और म्यान्मार के बीच फंसा
कल्याणी शंकर - 2017-09-28 10:30 UTC
राज्यविहीन रोहिंग्या की समस्या ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वे म्यान्मार से खदेड़े जा रहे हैं और बांग्लादेश और भारत जैसे पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने रोहिंग्या की समस्या पर संयुक्त राष्ट्र संघ मे चिंता जताई है।

परमाणु हथियारों से स्वास्थ्य संकट

परमाणु संपन्न देशों को प्रतिबंध के समझौते पर दस्तखत करना चाहिए
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-09-26 10:11 UTC
7 जुलाई 2017 का दिन दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक दिवस है। उस दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पास कर परमाणु हथियारों को अवैध घोषित कर दिया। उसके बाद 20 सितंबर से परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक संधि पत्र पर सदस्य देशों द्वारा दस्तखत किए जाने का दिन शुरू हो गया है। इस संधि के तहत परमाणु हथियारों का विकास, परीक्षण, उत्पादन, भंडारन और से किसी तरह हासिल करना अवैध होगा। इस संधि के अनुसार परमाणु हथियारों को किसी अस्त या शस्त्र पर तैनात करना भी गैरकानूनी होगा।

रोहिंग्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है

इसे सुलझाने के लिए भारत को पहल करनी होगी
उपेन्द प्रसाद - 2017-09-22 12:18 UTC
रोहिंग्या की समस्या बद से बदतर रूप ले रही है और इधर भारत में इस पर गंदी राजनीति हो रही है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत इस समस्या हो हल करने के लिए कोई ठोस पहले करे, लेकिन सरकार सिर्फ इस बात पर अड़ी है कि यहां आए हुए शरणार्थियों को वापस भेज दिया जाएगा। अब तो केन्द्रीय गृह मंत्री ने उन रोहिंग्या शरणार्थियों को शरणाथी मानने से भी इनकार कर दिया है और उन्हें घुसपैठिया कह रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका

हिलेरी क्लिंटन ने अपनी हार का कारण गिनाया

डेमोक्रेटिक नेता में अभी भी ध्रुवीकरण की ताकत
कल्याणी शंकर - 2017-09-20 18:10 UTC
राष्ट्रपति चुनाव हारने के 10 महीनों के बाद हिलेरी क्लिंटन एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में हैं। इसका कारण उनके द्वारा लिखी गई एक किताब है। 494 पृष्ठों की इस किताब में हिलेरी ने राष्ट्रपति चुनाव का अपना विश्लेषण लिखा है। इसमें उन्होंने अपनी हार के कारणों की समीक्षा की है। नई किताब आने के बाद एक बार फिर अमेरिकी समाज में विभाजन देखने को मिल रहा है। कुछ लोग हिलेरी के पक्ष में खड़े हैं, तो कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।

रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या

विश्व समुदाय को इसे हल करना चाहिए
एल.एस. हरदेनिया - 2017-09-18 12:46 UTC
म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों के निष्कासन ने अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों को जन्म दिया है। इस संदर्भ में सबसे बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किसी देश की सरकार मनमाने ढंग से यदि वहां बरसों से बसे नागरिकों को देश निकाला कर दे तो वे कहां जाएं?

जरूरी है रोहिंग्या समस्या का समाघान

विश्व समुदाय को कुछ न कुछ करना होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-09-12 12:36 UTC
रोहिंग्या मुसलमानों का मसला अब भारत के लिए भी सिरदर्द साबित होने लगा है। यहां भी करीब 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं और उनको यहां से निकाले जाने को लेकर राजनीति हो रही है। हिन्दू संगठन उन्हें यहां से बाहर करने की मांग कर रहे है, तो मुस्लिम संगठन उन्हे शरण देने की फरियाद कर रहे हैं। मामला कोर्ट तक में पहुंच चुका है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक इस मामले मे कूद चुका है। कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रावधानों के तहत भारत उन शरणार्थियों को यहां से जबर्दस्ती मरने के लिए बाहर नहीं भेज सकता।

आतंक पर अमेरिकी नीति से बेनकाब चीन

प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-08-21 19:21 UTC
वैश्विक आतंकवाद पर भारत और अमेरिका की दोस्ती गांठ काफी मजबूत हो चली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तीसरी दुनिया के सबसे ताकतवर राष्टपति डोनाल्ड टंप की नजदीकियां पाकिस्तान और चीन को मुश्किल में डाल रही हैं। भारत दुनिया के अधिकांश मुल्कों को वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक मंच पर लाने में कामयाब हुआ है। जिसकी वजह है कि आज अमेरिका, ब्रिेटेन और फ्रांस का अच्छा सहयोग मिल रहा है। अमेरिका ने कश्मीर में आतंकवाद की जड़ हिजबुल मुजाहिदीन को अंतरर्राष्टीय आतंकवादी संगठन घोषित किया है। कूटनीतिक तौर पर आतंकवाद के खिलाफ यह भारत की बड़ी जीत और पाकिस्तान के साथ चीन की पराजय है। जबकि दो महींने पहले संबंधित आतंकी संगठन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को अमेरिका ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया था। इसके साथ ही अमेरिका की तरफ से मिलने वाली आर्थिक मदद पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मोसुल फतह और उसके बाद

आईएसआईएस का खतरा बना रहेगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-07-11 12:06 UTC
इराक के प्रधानमंत्री जब मोसुल फतह की घोषणा कर रहे थे, उसी समय टिगरिस नदी के किनारे आईएसआईएस के लड़ाकों द्वारा चलाई जा रही गोलियों की आवाज भी सुनी जा रही थी। यानी जीत के जश्न के बीच पराजित पक्ष के इरादे की गूंज भी सुनी जा सकती थी। जाहिर है, मोसुल फतह का जश्न कोई स्थाई जश्न नहीं है। अभी भी इस्लामिक स्टेट के फिर से उभर आने का खतरा बना हुआ है।