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भारत-म्‍यांमार: आपराधिक मामलों पर आपसी कानूनी सहायता संबंधी समझौते की पुष्टि

विशेष संवाददाता - 2010-12-31 12:21 UTC
नई दिल्ली: भारत और म्‍यांमार के गृह सचिवों के बीच 16वीं राष्‍ट्र स्‍तरीय बैठक कल शाम यहां सम्‍पन्‍न हो गई है। भारतीय शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व गृह सचिव श्री जी के पिल्लई ने और म्‍यांमार संघ की सरकार के उपगृह मंत्री श्री यू फोन स्‍वे ने म्‍यांमार शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व किया। दोनों नेताओं ने आदान-प्रदान के दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर करके आपराधिक मामलों पर आपसी कानूनी सहायता के समझौते की पुष्टि की।

संयुक्‍त स्‍वच्‍छ ऊर्जा अनुसंधान एवं विकास केन्‍द्र की स्‍थापना के लिए भारत-अमेरिका समझौता

विशेष संवाददाता - 2010-12-30 11:31 UTC
नई दिल्ली: ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता, स्‍वच्‍छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और अमरीका के ऊर्जा विभाग ने संयुक्‍त स्‍वच्‍छ ऊर्जा अनुसंधान एवं विकास केन्‍द्र की स्‍थापना के लिए समझौता किया है।

भारत-म्‍यांमार गृह सचि‍व स्‍तरीय वार्ता सोमवार से

विशेष संवाददाता - 2010-12-24 18:54 UTC
नई दिल्ली: भारत और म्‍यांमार के बीच 16वीं गृह सचि‍व स्‍तर की वार्ता 27 से 30 दि‍सम्‍बर, 2010 के बीच नई दि‍ल्‍ली में आयोजि‍त होगी। गृह सचि‍व श्री जी.के.पि‍ल्‍लई भारतीय प्रति‍नि‍धि‍मंडल का नेतृत्‍व करेंगे और म्‍यांमार के प्रति‍नि‍धि‍मंडल का नेतृत्‍व उप गृह मंत्री यू.फॉन स्‍वई करेंगे।

भारत और मलेशि‍या ने राजमार्ग प्रबंधन और वि‍कास के क्षेत्र में समझौते कि‍ए

विशेष संवाददाता - 2010-12-22 12:59 UTC
नई दिल्ली: भारत और मलेशि‍या ने भारत में राजमार्ग प्रबंधन और वि‍कास के क्षेत्र में तकनीकी सेवाओं के संवर्द्धन हेतु समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर कि‍ए। समझौते पत्र पर मंगलवार को क्‍वालालंपुर में भारत की ओर से सड़क परि‍वहन और राजमार्ग मंत्री श्री कमलनाथ और मलेशि‍या की ओर से कार्य मंत्री दातो शाजीमन बि‍न अबु मानसर ने हस्‍ताक्षर कि‍ए। इस अवसर पर मलेशि‍या के प्रधानमंत्री दातो श्री मौ.नाजि‍ब बि‍न तुन अब्‍दुल रजाक भी उपस्‍थि‍त थे।

भारतीय निर्वाचन आयोग एवं रूसी संघ कल एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे

विशेष संवाददाता - 2010-12-20 17:46 UTC
नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग और रूसी संघ के केन्द्रीय निर्वाचन आयोग 21 दिसम्बर, 2010 को नई दिल्ली में चुनावों के क्षेत्र में पारस्परिक समझ एवं सहयोग पर एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।

कानकुन जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन के निहितार्थ

सुरेश प्रकाश अवस्‍थी - 2010-12-19 05:31 UTC
मेक्‍सिको के कानकुन शहर में दो सप्‍ताह तक चले जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन में तीखे मतभेदों के बावजूद अंतत: एक सर्वमान्‍य समझौता हो ही गया। संयुक्‍त राष्‍ट्र के तत्‍वाधान में हाल ही में सम्‍पन्‍न हुए इस समझौते का लाभ भारत जैसे विकासशील देशों को किस प्रकार और किस सीमा तक मिल सकता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। कानकुन सम्‍मेलन के दौरान वास्‍तव में विकासशील देशों की घेराबंदी करने की ही कोशिश हुई है। यह ठीक है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इस समझौते को आगे की दिशा में एक सार्थक और सकारात्‍मक कदम कहा जा सकता है। कोपेनहेगन के अनुभव के कारण यह आशंका व्‍यक्‍त की जा रही थी कि कानकुन में भी कोई नतीजा नहीं निकलेगा, लेकिन संतोष की बात है कि सम्‍मेलन की समाप्‍ति एक आम सहमति के साथ हुई।

भारत और इटली सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर करेंगे

विशेष संवाददाता - 2010-12-16 11:33 UTC
भारत और इटली सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग बढ़ाने एवं भारत में राजमार्ग क्षेत्र में इतालवी अवसंरचना कंपनियों की अधिक भागीदारी के लिए एक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर करने को सहमत हुए हैं।
भारत-बांगलादेश

राजनीति पर अर्थनीति की विजय

भारत को बांगलादेश ने ट्रांजिट अधिकार दिए
आशीष बिश्वास - 2010-12-16 11:12 UTC
कोलकाताः आखिरकार बांग्लादेश भारत को ट्रांजिट अधिकार देने पर सहमत हो ही गया। राजनीति के कारण वह भारत को इस सुविधा से वंचित कर रहा था, लेकिन इसके कारण उसको भारी वित्तीय नुकसान हो रहा था। जब उसे अहसास हुआ कि राजनैतिक कारणों से भारत को परिवहन के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देने से उसे भारी नुकसान हो रहा है, तो उसने आखिरकार अपनी नीति में बदलाव कर ही लिया।

बांग्लादेश भारत के प्रति उदार नहीं

पर भारत से वह रियायतें चाहता है
आशीष बिश्वास - 2010-11-28 16:43 UTC
कोलकाताः बांग्लादेश नेपाल और भूटान से रोड के मार्फत जुड़ना चाहता है और इसके लिए भारत की सड़कों का इस्तेमाल करना चाहता है। इसका प्रस्ताव उसने भारतीय अघिकारियों के समक्ष पेश कर रखा है। पर दूसरी और वह खुद भारत को इस तरह की सुविधा नहीं देना चाहता।

अल कायदा के कमजोर होने के अमेरिकी दावों पर मत जाइए

सच पहले के समान ही भयावह है
अवधेश कुमार - 2010-11-08 18:23 UTC
आतंकवाद के मामले पर अमेरिका की ओर से जो बयान या सूचनाएं सामने आ रहीं हैं उनसे राहत की बजाय चिंता ज्यादा बढ़ती हैं। अमेरिका ने हाल में जेहादी आतंकवाद के मुख्य प्रेरक संगठन ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व वाले अल कायदा के बारे में अपना जो आकलन दिया है उसका मुख्य स्वर तो यही है कि सघन कार्रवाई के कारण वह कमजोर हुआ है। किंतु इसमें ही ऐसे तथ्य हैं जिनसे उसके व्यापक विस्तार का पता चलता है।
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