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शहंशाह-ए-शतक

कैलाश धूलिया - 2010-08-09 12:58 UTC
सचिन और कीर्तिमान, इन दोनों में मानो चोली दामन का साथ है। सचिन कितने कीर्तिमान बना चुके हैं, यह याद रखना अब कठिन हो चला है। वे जब भी मैदान पर उतरते हैं कोई न कोई कीर्तिमान या तो बनता है या फिर टूटता है। गत् 26 जुलाई को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे मैच की पहली पारी में जब सचिन ने सैकड़ा बनाया तो वह टैस्ट मैचों में शतकों का अर्धशतक बनाने की ओर एक कदम और बढ़ गए। यह उनका 48वां शतक था। अब वे शतकों के अर्धशतक से मात्र दो कदम पीछे हैं। इस वर्ष उन्हें अभी काफी मैच खेलने हैं और उम्मीद की जाती है कि वे 2010 में ही इस कीर्तिमान को भी स्थापित कर देंगे। वे एकदिवसीय मैचों में भी सर्वाधिक 46 शतक बना चुके हैं और शीघ्र ही यह अर्धशतक भी पूरा होगा। हो सकता है कि इससे पहले शतकों का शतक पूरा हो जाए।
राष्ट्रमंडल खेल

महान देश का महान खिलाड़ी—कलमाडी

कैलाश धूलिया - 2010-08-09 12:54 UTC
कॉमनवेल्थ खेलों की आड़ में खेले जा रहे खेल की असलियत अब सामने आने लगी है। अभी तो खेल होने में लगभग तीन माह बाकी हैं और उससे पहले ही घोटालों की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। खेल अभी खेले भी नहीं गये और पारितोषिक के रूप में करोड़ों के वारे न्यारे हो गए। दिल थाम के बैठिए यह पारितोषिक अरबों में पहुंचनेवाला है। अधिकतर लोगों का मानना है कि देश में बड़े खेल आयोजन होने से देश में बाहर का पैसा आता है, देश के बुनियादी ढांचे का विकास होता है, दुनिया में देश का नाम रोशन होता है.... ये तीनों बातें अपनी जगह ठीक हैं। देश में बाहर से खूब पैसा आया है, बुनियादी ढांचे का विकास— बनने के साथ ही उखड़ती टाइलें, रिसते स्टेडियम और न जाने क्या... बेहतरीन ढंग से हो रहा है। रही बात देश के नाम रोशन की, वह तो हो ही रहा है। खेलों से पहले देश दुनियाभर में चर्चा में आ गया है। वैसे भी खेल खत्म होने के बाद कौन-सा चर्चा में आ जाता। पदकों के लिए हम तरसते ही रहते हैं अगर इस बार भी तरस गए तो कौन-सी आफत आ जाएगी।

बांग्लादेश भारत से अनाज खरीदेगा

आशीष बिश्वास - 2010-07-30 12:17 UTC
कोलकाताः ढाका स्थित सूत्रों के अनुसार बांग्लादेश आने वाले दिनों में भारत से चावल और गेहूं की खरीद करेगा।

पाकिस्तान ने सार्क पुलिस का प्रस्ताव रखा

सदस्य देशों में इस प्रस्ताव पर मतभेद
आशीष बिश्वास - 2010-07-27 12:32 UTC
कोलकाताः आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, और देह व्यापार के रैकेट जैसे अपराधों को रोकने के लिए दक्षिण एशियाई देशों का संगठन एक साझा पुलिय बल तैयार करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

आतंकवाद पर अमेरिका को नीतियां बदलना जरूरी

ओ.पी. पाल - 2010-07-25 11:54 UTC
भारत में 26/11 आतंकी हमले को लेकर भले ही अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बनाने की बात करता हो, लेकिन पाकिस्तान या अफगानिस्तान के मामले में जिस प्रकार की अमेरिकी नीतियां बनाई जा रही हैं, वह आतंकवाद से निपटने में नाकाफी हैं और नही मौजूदा नीतियों से अमेरिका तालिबान को समाप्त कर पाएगा? दरअसल पाकिस्तान को अपने साथ रखना इसलिए भी अमेरिका की मजबूरी है कि उसे इस बात का डर है कि कहीं पाकिस्तान पूरी तरह चीन की गोद में न चला जाए। यही कारण है कि अमेरिका यह सब जानते हुए भी कि पाकिस्तान आतंकवाद और तालिबानी संगठन अलकायदा जैसे कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन और उनके लिए मददगार है, फिर भी अफगान में जारी अपने संघर्ष को दृष्टिगत रखते हुए पाकिस्तान को आर्थिक और हथियारों जैसी सहायता को लगातार बढ़ा रहा है।

अफगानिस्तान सम्मेलन एवं क्लिंटन की पाक यात्रा

दक्षिण एशिया में शांति के लिए पाकिस्तान का बदलना आवश्यक
अवधेश कुमार - 2010-07-24 12:24 UTC
लगभग एक सप्ताह तक दक्षिण एशिया भारी कूटनीतिक हलचलों का क्षेत्र बना रहा। अफगानिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, उसके पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का पाकिस्तान दौरा, इसके पहले भारतीय विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा की पाकिस्तान यात्रा एवं उसके बाद पाकिस्तानी नेताओं के शांति प्रयासों पर पानी फेरने वाले वक्तव्यों के कारण यह क्षेत्र लगातार सुर्खियों में रहा है। जाहिर है, इन सारी घटनाओं का कुछ न कुछ परिणाम आना चाहिए।

अमेरिकी कॉर्पोरेट के सामने विश्वसनीयता का संकट

विशेषज्ञ चाहते हैं ज्यादा सरकारी हस्तक्षेप
नन्तु बनर्जी - 2010-07-12 13:04 UTC
वाशिंगटनः अमेरिका में पूंजीवादी व्यवस्था कभी भी लोगों की आलोचना का इतना बड़ा शिकार नहीं थी, जितना वह आज है। अमेरिका तो मुक्त बाजार की अर्थव्यवस्था का स्वर्ग रहा है। आज ओबामा प्रशासन अपने देश के शिक्षाविदों, आर्थिक एवं राजनैतिक चिंतको के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं और उनपर दबाव है कि राज्य आर्थिक मामलों में ज्यादा से ज्यादा हस्तक्षेप करे ताकि सटौरिए, लालची बैंकर लेखापाल और कॉर्पारेट एक्जक्यूटिव्स पर लगाम लग सके।

विश्व जनसंख्या दिवस 2010- हरेक की गणना आवश्यक

वी मोहन राव - 2010-07-12 08:03 UTC
हरेक की गणना आवश्यक है- यह विश्व जनसंख्या दिवस, 2010 का ध्येयवाक्य है जो ग्यारह जुलाई को है। यह एक ऐसा वार्षिक समारोह है जो विश्व जनसंख्या के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष का ध्येयवाक्य लोगों को आधिकारिक जनगणना या जनसंख्या पर आंकड़े जुटाए जाने वाली अन्य प्रकियाओं में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने वाला है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने सन् 1989 में इस दिवस का शुभारंभ किया था जिसका लक्ष्य परिवार नियोजन का महत्व, महिला-पुरूष समानता, गरीबी, मातृत्व स्वास्थ्य, यौन एवं प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य और मानवाधिकार जैसे जनसंख्या संबंधी मुद्दों के बारे में लोगों की जागरूकता में वृद्धि करना था। इन सभी तत्वों का विश्व के विकास एवं पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ता है।

ट्राईफेड - जनजातियों का आर्थिक सशक्तिकरण

विशेष संवाददाता - 2010-07-07 12:03 UTC
जनजातीय दस्तकारों के उत्पादों और कौशल, खासतौर पर हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए तथा अंतत: टिकाऊ बाजारों के सृजन के जरिए उनकी आय बढा़ने के उद्देश्य से भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राईफेड) पिछले कुछ वर्षों से अपनी गतिविधियों का निरंतर विस्तार कर रहा है।

भारत और स्लोवेनिया ने पीएसई प्रबंधन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए

विशेष संवाददाता - 2010-07-07 11:57 UTC
नई दिल्ली: भारत सरकार के सार्वजनिक उद्यम विभाग और स्लोवेनिया के अंतर्राष्ट्रीय उद्यमी प्रोत्साहन केन्द्र, ल्जुब्लजाना ने आज एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की क्षमता बढ़ाने के लिए यह सहमति पत्र तैयार किया गया है। सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव श्री भास्कर चटर्जी और स्लोवेनिया के उच्च शिक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उप मंत्री डॉ. जोस़फ ग्योरकोश ने नई दिल्ली में इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। केन्द्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री श्री अरूण यादव भी इस अवसर पर मौजूद थे।
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