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झारखंड के सबक

छोटे राज्यों की स्थिरता निश्चित नहीं
कल्याणी शंकर - 2010-05-28 10:35 UTC
झारखंड में राजनैतिक अस्थिरतर बरकरार है और यहां जल्द ही राष्ट्रपति शाषण लगाया जा सकता है। इस स्थिति के लिए भाजपा और कांग्रेस को बहुत हद तक जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिन्होंने सत्ता के लालच में राज्य को इस मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

भारत: जनगणना 2011 - क्या आप जानते हैं?

विशेष संवाददाता - 2010-05-27 09:06 UTC
पिछले दशकों में देश की प्रगति की समीक्षा और सरकार की मौजूदा योजना की निगरानी करने का आधार जनगणना होती है। जगणना 2011 देश की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना है।

जाति जनगणना पर माथापच्ची, खतरे काल्पनिक नहीं हैं

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-05-27 08:59 UTC
पिछले बजठ सत्र के दौरान लोकसभा में जाति आधारित जनगणना को लेकर आम राय बनी थी। सभी पार्टियों के वक्ताओं ने एक सुर मंे जाति को भी जनगणना में शामिल करने की मांग की थी। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि वे संसद की भावना को ध्यान में रखते हुए इस पर निर्णल लेंगे। वरिष्ठ सांसदों से निजी बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जाति को जनगणना में शामिल करने का भरोसा दिलाया था। बाद में वित्त मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि जनगणना में जाति को शामिल किया जाएगा।

हम भूख से मरें और आप गुलछर्रे उड़ायें !

कुमार अमिताभ - 2010-05-27 08:55 UTC
जिस देश में एक तरफ भूख से लोग मरें, मेहनतकश इंसान सूदखोरों व दलालों के भय से आत्महत्या पर मजबूर हों, वहीं सरकारी गोदामों में रखा अनाज सड़े और आई पी एल क्रिकेट तथा कामनवेल्थ गेम जैसे खेल-तमाशों में अरबों रूपये उड़ाए जाएं तो किसको रोएं, यह प्रश्न, यक्ष प्रश्न को भी मात दे सकता है। ऐसा क्यूं है? देश की संपत्ति पर कुंडली मारे लोग सरकार व उसकी प्रबंध व्यवस्था पर इस कदर काबिज हैं कि घृतराष्ट्र दृष्टि भी शरम खाए। देश के कई राज्यों से लगातार आती ऐसी रपटें दिल दहला देती हैं। जब बच्चे मिट्टी खाने को मजबूर होते हैं। तो कोई आम की गुठली पर जिंदगी बिता रहा है। कहीं जंगली पत्तो से क्षुधा का शमन किया जा रहा है। ऐसा क्यूं है कि संपन्न्ता के विराट प्रतिमान सामने होते हुए भी लोग, मूल आवश्यकता की पूर्ति के अभाव में मर जाएं, ऐसे भी स्थल है, जहां मात्र 20 रूपये का भोजन 200 से 20,000 तक रूपये चुकाकर खाने वाले हैं, तो दूसरी तरफ दिनभर खटकर मात्र 20 रूपये हासिल कर पाने में अक्षम और उस पर जीवित नागरिकों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत है।

5 हजार किलोमीटर तक की मारक क्षमता की अग्नि-5 मिसाईल का परीक्षण अगले वर्ष

विशेष संवाददाता - 2010-05-26 12:01 UTC
नयी दिल्ली: डीआरडीओ प्रमुख डॉ.वी.के.सारस्वत ने कहा है कि जटिल रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता एक मात्र रक्षा और अनुसंधान संगठन द्वारा प्राप्त नही की जा सकती है। आज डीआरडीओ प्रौद्योगिकी दिवस पुरस्कार समारोह में अपने वक्तव्य में उन्होंने तीनों सेनाओं से नवीनतम हथियारों की कमी को विदेशों से पूरा करने का आहवान किया।

भारत के 49 हजार मलिन बस्तियों में से 24 % नालों एवं नालियों के किनारे तथा 12 % रेलवे लाइनों के किनारे

विशेष संवाददाता - 2010-05-26 11:54 UTC
नयी दिल्ली: राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) ने अपने 65वें दौर में शहरी मलिन बस्तियों पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर न्न शहरी मलिन बस्तियों की कुछ विशेषताएं, 2008-09 न्न नामक रिपोर्ट सं. 534 जारी की है । इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण का क्षेत्रीय कार्य जुलाई, 2008 से जून, 2009 के दौरान किया गया था । यह रिपोर्ट सर्वेक्षण किए गए 4738 शहरी खंडों में पाए गए 365 अधिसूचित तथा 365 गैर-अधिसूचित मलिन बस्तियों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है ।

माओवाद की समस्या: रणनीति को लेकर कांग्रेस भ्रमित

अमूल्य गांगुली - 2010-05-26 11:06 UTC
वर्तमान माओवादी आंदोलन और पूर्ववर्त्ती नक्सलवादी आंदोलन में बहुत फर्क है। माओवादियों को किसी विदेशी ताकत का सहयोग मिलता नहीं दिखाई पड़ रहा है, जबकि नक्सलवदी आंदोलन को चीन का समर्थन प्राप्त था। माओवादियों को नेपाल के माओवादियों का भी समर्थन हासिल नहीं है, क्योंकि नेलाल के माओवादी तो चुनावी राजनीति में अपना कदम रख चुके हैं। बाहर से किसी प्रकार का समर्थन नहीं मिलने का फायदा माओवादियों को यह हो रहा है कि वे अपनी नीतियों को तैयार करने के लिए किसी विदेशी ताकत की ओर नहीं निहारते।

यूपीए सरकार का एक साल

विश्वास से भरे हैं प्रधानमंत्री
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-05-25 09:23 UTC
नई दिल्लीः अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरा होने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो कुछ कहा उससे यही पता चलता है कि उनका आत्म विश्वास बढ़ा है और अपन तय प्राथमिकताओं के आधार पर वे अपनी सरकार चलाना चाहतें हैं।

हिन्दु संसकृति को समझने और सुरक्षा की जरूरत

विकसत संसकृति पर विकृत मानसिकता हावी
डॉ. अतुल कुमार - 2010-05-24 10:57 UTC
भारत की मूल सभ्यता आर्य- द्रविड़ या सिन्धु घाटी की है जो आधुनिक काल में हिन्दु कहलायी। जाति प्रथा इसी हजारों सालों पुरानी सभ्यता सनातन धर्म की पहचान है, जिसका मूल आधार वर्ण व्यवस्था है। मनुवादी वर्ण-व्यवस्था ने समय के काल में वशंवादी स्वरूप ले लिया।

प्रधानमंत्री के प्रेस कांफ्रेंस में अनुत्तरित रह गए गांव,गरीबी और अल्पसंख्यक से जुड़े सवाल

एस एन वर्मा - 2010-05-24 10:19 UTC
नई दिल्ली।यूपीए टू सरकार के कार्यकाल में आयोजित प्रधानमंत्री के प्रथम राष्ट्ीय प्रेस कांफ्रेंस में गांव,गरीबी,पिछड़ापन के श्राप से जुझता भारत की नाम मात्र चर्चा हुई।राष्ट्ीय मीडिया से राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने,विदेश नीति से जुड़े नाजुक मुद्े जैसी चटपटी और बिकाउ खबरों से संबंधित प्रश्न पूछे गए।क्षेत्रीय अखबार अपनी बारी की ताक मे लगे रहे।उर्दू मीडिया केा प्रश्न पूछने के मात्र दो अवसर मिले,बाकी उर्दू के खबरनवीस संचालन कर रहे प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहाकार हरिश खर्रे का मुंह ताकते रह गए ,और इसी बीच पत्रकार सम्मेलन समाप्त होने की घोषणा कर दी गयी।देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुस्लिमों से जुड़े कई अहम सवाल अनुत्तरित ही रह गए।
उर्दू अखबार के एक पत्रकार के प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि मुस्लिमों के तालिम के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।उन्होंने कहा कि मुस्लिमो के शिक्षा के लिए काफी कम कार्य हुआ है।यह प्रश्न नेशनल सेंपल सर्वे की उस रिपोर्ट को आधार मान कर पूछा गया था जिसमें यह कहा गया है कि मुसलमान शिक्षा के मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से पिछडें हुए हैं।