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कहां हैं सरकार और हमारे कृषि मंत्री शरद पवार?

शशिकान्त सुशांत - 2010-05-13 08:12 UTC
पिछले साल किसानों ने आलू नहीं बोया परिणामतः 45 रुपये किलो आलू बिक गया यह अनमोल रत्न, इस देश में। इसी भाव के लालच में किसानों ने इस बार कुछ ज्यादा बुआई कर दीं परिणाम 25 पैसे किलो भी किसी बहुराष्ट्रीय चिप्स बनाने वाली कंपनी के लिए खरीदना गवारा नहीं रहा। देश की राजधानी और इसके सटे इलाकों के बाजारों में आलू के भाव 7-8 रूपये से कम नहीं हुए। कस्बों और गांवों में इसके भाव 5 रूपये पर टिके रहे। खेत में आलू का भाव 50 पैसा किलो था हद से हद एक रूपये किलो और बाजार में कम से कम 5 रूपये किलो यह राष्ट्रीय औसत है।

बटाइदारी बिल के अखाड़े में बिहार के महारथी राजनीतिज्ञ

शशिकान्त सुशांत - 2010-05-13 08:09 UTC
बिहार को ऐसे ही देश की राजनीतिक प्रयोगशाला का ‘उत्प्रेरक’ नहीं कहा जाता क्योंकि वहीं पर क्रांतिकारी राजनीतिक फार्मूलों का ईजाद होते आया है। आजादी के बाद देश में जितनी भी क्रांतियां हुई हैं, उसकी जन्मभूमि, प्रयोग भूमि और कर्मभूमि कहीं न कहीं पृष्टभूमि भी बिहार की धरा ही रही है। आजादी के पहले गांधीजी का असहयोग आंदोलन और बिनोवा भावे का भूदान आंदोलन की प्रयोगस्थली भी बिहार ही रहा है। देश में राजनीति को नई दिशा देने का मामला हो या फिर बिहार को ही गर्त में ले जानी राजनीति की मिसाल हो, सब तरह का मसाला आपको बिहार में मिल जाएगा।

‘हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे’

कुमार अमिताभ - 2010-05-13 08:05 UTC
भ्रष्टाचारी अपना एक घर भरने के चक्कर में जाने कितने घरों का चिराग गुल कर देता है, उस एक की जेब भरने की हवस के लिए सैकड़ों हजारों परिवारों को बदहाली, कंगाली की कगार पर ला खड़ा कर सकती है । इसका ज्वलंत उदाहरण बीते सप्ताह उजागर हुए भ्रष्टाचार के मामलों से मिल जाता है।

मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति

के.आर. सुदामन - 2010-05-12 10:13 UTC
विकसित देशों में, समय-समय पर जो मौद्रिक नीति उनके केंद्रीय बैंकों द्वारा घोषित की जाती है, उसका लक्ष्य मुद्रास्फीति की दर को निम्न स्तर पर बनाए रखना होता है। भारत और अन्य अनेक विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंकों के दो लक्ष्य होते हैं-मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और विकास को गति देना।

सत्ता पर पकड़ के लिए जाति गणना

Dr Atul Kumar - 2010-05-11 10:05 UTC
प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह अर्थ शास्त्र के डॉ हो सकते है, प्रधानमंत्री हो सकते है लेकिन हिन्दुस्तान और हिन्दुओं पर उनके कथन असहज ही रहे है। देश के संसाधनो पर मुसलमानों का हक पहले बताना एक धक्का देने वाला बयान था। वित्त मंत्री के रूप में उनकी नीतियों ने देश के लघु उद्यमी को खत्म कर दिया नौबत यहाँ तक आ गयी थी कि रुपये की कीमत कौडी हो गयी। उनके विश्व बैंक की नौकरी के बाद भी अमेरिका के साथ का विशेष प्रेम हमारे विश्वसनीय मित्र रूस से दूर कर चुका। परमाणु करार के लिए कितनी निचले स्तर तक संसद में कारनामे हुऐ सब जानते है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कबाड़ के सौदे में देश को शामिल करा कर वाह वाही लेने वाले हवाई नेता की पहचान बनाई है। इस करार के बाद भारत को क्या मिला एक बंधन। हमारी सारी सुरक्षा में सेंध लगाने का अमेरिका को आमत्रण। बहुत कम लोगों ने एम एम सिंह के परमाणु विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी को विदेशी समझौते के लिऐ अधिकृत करने का निर्णय वाली बात को तवज्जो दी होगी। अब जाति को जनगणना में शामिल करने का मतलब भी देश को गर्त में ले जाना है। फूट डालो राज करों की गोरों की नीति का नया बीज बोना है। जाति जनगणना अंग्रेजों के जमाने में शुरु हुई थी।

गहलौत सरकार ने सस्ते अनाज की योजना शुरू की

सही अमल के लिए सतर्कता जरूरी
अहतेशाम कुरेशी - 2010-05-11 09:44 UTC
जयपुरः राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने एक साहसपूर्ण निर्णय लिया है। उसके तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों को प्रत्येक महीने 2 रुपए किलो की दर से 25 किलो गेहू उपलब्ध कराएगी। यह योजना गांवों के साथ साथ शहरों में भी लागू होगी।

जाति आधारित जनगणना: सही दिशा में उठाया गया कदम

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-05-11 09:40 UTC
प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह साहसपूर्ण कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने बहुत ही साहसपूर्ण कदम उठाया था। उन नीतियों ने देश को ही बदल दिया। अमूेरिका के साथ परमाणु करार करने के लिए तो उन्होंने अपनी सरकार को ही जोखिम में डाल दिया था। उस करार के बाद अमेरिका के साथ तो अभी तक कोई परमाणु रिश्ता नहीं बना है, लेकिन परमाणु व्यापार में भारत भागीदारी करने में सक्षम हो गया है। अप्रार संधि पर दस्तखत किए बिना भारत इस व्यापार में शामिल होने वाला एकमात्र देश है।

भारी पड़ सकता है जयराम को अन्य मंत्रालयों से पंगा लेना

एस एन वर्मा - 2010-05-10 09:38 UTC
नई दिल्ली। दस जनपथ के करीबी मंत्रियों को लगता है कि उन्हें बेलगाम बोलने की आजादी मिल गयी है।मणिशंकर अयैर के नक्शे कदम पर अब जयराम रमेश चलने लगे हैं।पहले वह देश मे बोलते थे लेकिन इस बार वह विदेश ,वह भी चीन में अपने ही देश के एक मंत्रालय के खिलाफ बोल गए हैं। जयराम रमेश को इसी तरह का बड़बोलापन एक दिन भारी पड़ सकता है।शशि थरूर को फालतू बोलने की सजा सुनंदा प्रकरण के साथ जुड़ कर मिल चुका है।अब जयराम रमेश की बारी आ रही है।बीजेपी ने उनसे इस्तीफा मांगा है। कांग्रेस भी उनके साथ नहीं है। सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री भी उनको झिड़की लगा चुके हैं।

आईपीएल यानी लूट का आयोजन

भारत को सम्पूर्ण लूट से बचाने के लिए संघर्ष की आवश्यकता है
अवधेश कुमार - 2010-05-08 08:25 UTC
पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रिय शशि थरुर की मंत्रिमडल से विदाई एवं उसके बाद आईपीएल के जन्मदाता माने जाने वाले ललित मोदी का निलंबन। इन दोनों व्यक्तियों को अलग करने मात्र से आईपीएल विवाद का अंत हो जाएगा, ऐसा मानना बेमानी है। हां, सरकार एवं क्रिकेट तंत्र से जुड़े नेताओं, व्यवसायियों, अधिकारियों एवं सितारों ने इन दोनों की बलि चढ़ाकर विवाद का अंत मान लेने का संदेश देने की अवश्य कोशिश की। वैस भी इन दोनो के खिलाफ कार्रवाई में खेल की भूमिका कहीं नहीं है।

आरबीआई का मध्यमार्ग

अशोक हांडू - 2010-05-08 08:11 UTC
नीतिगत दरों में बहुत अधिक वृद्धि से बचते हुए और उसी के साथ थोड़ी सी वृद्धि कर भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आर्थिक वृद्धि पर बगैर कोई प्रभाव डाले मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए तत्पर है। सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता हाल के महीनों में मुद्रास्फीति में बहुत अधिक वृद्धि रही है क्योंकि मुद्रास्फीति दहाई अंक तक पहुंच गयी है जो 17 महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर है। खाद्य मुद्रास्फीति की दर तो 17 फीसदी तक पहुंच गयी है।