Skip to main content

View Articles

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

ठेकेदार की धमकी से उठा बवंडर

झारखंड में कोड़ा का राज चलेगा
System Administrator - 2007-11-11 05:41 UTC
झारखंड की राजनीति में ‘कोड़ा’? यह कोई नयी बात नहीं, फर्क सिर्फ इतना है कि उसका स्वरुप बदला हुआ होगा। पहले सत्ता में बने रहने और निर्बाध लूट-खसोट जारी रखे रहने के लिए धमकियों का कोड़ा चलता था पर अब वहां की राजनीति में मधु कोड़ा ही चलेगा और वह भी मुख्य मंत्री के रुप में।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

भूल-भुलैयों का मजा भी लीजिए

प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह के साथ
System Administrator - 2007-11-11 05:30 UTC
सबकी जिंदगी मजे में कटे। डा. मनमोहन सिंह जी की तो कट गयी। उनके साथ सबकी जिंदगी मजे में कट सकती है। उनके साथ गर्दन तक बड़े प्यार से कट जाती है। उनके साथ तो हल्ला हंगामा से भी बचकर साफ निकल जाना आसान हो जाता है। पुरानी कहावत है – जैसा देवता वैसी पूजा। उसमें डाक्टर साहब को महारत हासिल है। हर तरह के देवता को वे मजे में रखना जानते हैं।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

राजस्थान में गुज्जर आन्दोलन

System Administrator - 2007-10-20 07:31 UTC
राजस्थान में गुज्जर आन्दोलन के चलते राज्य सुलग रहा है। राज्य के 30 में से 26 जिलों में हिंसा और उपद्रव का वातावरण है। आन्दोलन के तीसरे दिन तक पुलिस फायरिंग और भीड़ की हिंसा में 20 लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हैं।

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

प्रधान मंत्री ने डलवायी नकेल

System Administrator - 2007-10-20 07:26 UTC
भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर, जो कल तक इस समझौते को भारत के लिए नुकसानदेह बता रहे थे, अचानक बदल गये और कहने लग गये हैं कि वे अंतिम प्रारुप से संतुष्ट हैं।

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

बदलता मौसम और ...

System Administrator - 2007-10-20 07:21 UTC
दुनिया के बदलते मौसम को रोकने के लिए ग्रुप-8 देशों की बैठक में फिर एक बार अपने पुराने संकल्प और आह्वान को दोहराया। इसका सभी ओर स्वागत हुआ है। विश्व बैंक ने भी इसका स्वागत किया है क्योंकि यह भी तो उन्हीं देशों के कब्जे में रहने वाली संस्था है। सबों ने कहा कि

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

आरक्षण, राजनीति, अन्याय ...

System Administrator - 2007-10-20 07:17 UTC
सर्वोच्च न्यायालय की एक खंड पीठ के कल के आदेश से यह साफ हो गया है कि इस अध्ययन सत्र से देश के उच्च शिक्षा के संस्थानों में अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 27 प्रति शत आरक्षण लागू नहीं हो पायेगा। यह अलग बात है कि अब तक केन्द्र सरकार इसे लागू करने पर आमादा रही है।

राष्ट्रीय पुनर्निर्माण ...

एक कार्यक्रम की पहल

समाज का कोई भी वर्ग भविष्य के प्रति आश्वस्त नहीं
राजकिशोर - 2007-10-20 07:09 UTC
देश इस समय एक भयावह संकट से गुजर रहा है। उदारीकरण के मुट्ठी भर समर्थकों को छोड़ कर समाज का कोई भी वर्ग भविष्य के प्रति आश्वस्त नहीं है। किसान, मजदूर, मध्य वर्ग, छात्र, महिलाएं, लेखक, बुध्दिजीवी सभी उद्विग्न हैं। राजनीतिक दल न केवल अप्रासंगिक, बल्कि समाज के लिए अहितकर, हो चुके हैं। नेताओं को विदूषक बने अरसा हो गया। हर आंदोलन किसी एक मुद्दे से बंधा हुआ है।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

धन कमाइये और सेक्स का मजा ...

भारत का बदलता मिजाज
System Administrator - 2007-10-20 07:05 UTC
केन्द्र सरकार आपकी सेवा में हाजिर मिलेगी
धन कमाइये और सेक्स का मजा लीजिए
पिछले लगभग एक दशक से भारत की पूरी राष्ट्रीय सोच की दिशा बदल गयी लगती है। किसी भी कीमत पर धन कमाना और सेक्स के पीछे भागना ही सर्वत्र दिखायी देने लगा है। हमारे समाचार माध्यम और सरकारें इसमें जनता की भरपूर मदद कर रही हैं।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

पिछड़ों की पहचान ...

System Administrator - 2007-10-20 06:59 UTC
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कल अपने एक फैसले में आखिर 1931 के आंकड़ों के आधार पर 2007-08 में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के लिए आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्चतर शिक्षा के संस्थानों में आरक्षण लागू करने पर रोक लगा दी।

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

राष्ट्रपति चुनाव से उभरे सवाल

सांसदों और विधायकों के मत
System Administrator - 2007-10-20 06:54 UTC
कुछ मतदान प्रक्रिया से अलग रहे और कुछ ने मानसिक दिवालियेपन का परिचय दिया
भारत में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव संपन्न हो गये परन्तु इसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर सांसदों और विधायकों की भी मति क्यों मारी गयी? वे मतदान करने और नहीं करने के अपने मौलिक अधिकार की बात तो करते रहे, लेकिन क्या लोकतंत्र में मतदान करना उनका मौलिक कर्तव्य नहीं था? अनेक सांसदों और विधायकों ने मानसिक दिवालियेपन की हद तक जाकर उन कारणों के आधार पर मत क्यों दिया जिनका राष्ट्रपति चुनाव से कोई लेना देना नहीं? ऐसे और भी अनेक सवाल हैं जो जवाब मांगते हैं।