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अभिनय

मन के विभिन्न भावों को प्रकट करने के लिए जो आंगिक चेष्टाएं की जाती हैं उन्हें अभिनय कहा जाता है। अभिनय के माध्यम से विषय, व्यक्ति या प्रकृति का अनुकरण कर निहित भावों को प्रकट किया जाता है। वास्तव में किसी बाह्य स्वरुप नहीं बल्कि मन के भावों को अभिव्यक्त करना ही इसका प्रधान उद्देश्य होता है। परन्तु ध्यान रहे कि व्यक्ति के अपने ही अन्दर के भावों का प्रकटीकरण अभिनय नहीं है, परन्तु उस भाव का प्रकटीकरण करने की चेष्टाओं को ही अभिनय कहा जायेगा जो उसके अन्दर नहीं हैं बल्कि वे भाव कहीं और हैं।

अभिनय का प्रयोग व्यक्ति विशेष रूप से तब करता है जब लोगों को धोखा दिया जाना अभिहित हो। जैसे किसी के मन में प्रेम है ही नहीं परन्तु विभिन्न चेष्टाओं के माध्यम से प्रेम का अभिनय करना।

परन्तु नाटकों या फिल्मों आदि में अभिनय का उद्देश्य कला के माध्यम से दर्शकों को किसी भाव से परिचित कराना होता है।

अभिनय के चार अंग हैं - कायिक, वाचिक, आहार्य तथा सात्विक।

कायिक या आंगिक अभिनय वह है जिसमें नेत्र, मुख, हाव-भाव, हाथ, पैर या शरीर के किसी अंग या एकाधिक अंगों की चेष्टाओं के माध्यम से भावों का प्रकटीकरण किया जाता है। इसमें किसी प्रकृत विषय का अनुकरण होता है।

वाचिक अभिनय वह है जिसमें शब्दों का प्रयोग कर कुछ बोला जाता है। बोलने की शैली वाचिक अभिनय का ही अंग है। इसमें प्रेम करुणा, वीभत्स, रौद्र जैसे रसों को अभिव्यक्त किया जाता है।

वस्त्र तथा आभूषण आदि साज-सज्जा के साथ किये जाने वाले अभिनय को आहार्य की श्रेणी में रखा जाता है। इसमे तत्कालीन जीवन-शैली आदि को अभिव्यक्त किया जाता है।

सात्विक भावों, जैसे स्तम्भ, स्वेद, रोमांच आदि को अभिव्यक्त किया जाता है। अश्रुपात, हस्तपाद आदि का सहारा लेना इसका प्रमुख लक्षण है।

श्रेष्ठ अभिनय के लिए सटीक अनुकरण ही मानदंड है।

अभिनय मूलतः दो कारणों से की जाती है। पहला यह कि अभिनय के समय वास्तविक अनुभूति के समान ही अनुभूति प्राप्त होती है। दूसरा यह कि इससे दूसरों के समक्ष अनुभूतियों को प्रकट करने का अवसर प्राप्त होता है।

अभिनय कला के सिद्धान्त संसार भर में लगातार विकसित होते चले गये। भरतमुनि का नाट्यशास्त्र प्राचीन नाट्यशास्त्रों में है। सभी प्राचीन सभ्यताओं से लेकर अब तक नाट्यशास्त्र का काफी विकास हुआ है।

18 वीं तथा 19 वीं शताब्दी में अभिनय के कई सिद्धान्त आये। 20वीं शताब्दी में भी नये सिद्धान्तों की कमी नहीं रही।

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अभिनेता, अभिनेतृ, अभिव्यंजनावाद, अभिव्यंजनावादी आलोचना, अभिसारिका

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