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अभिव्यंजनावादी आलोचना

अभिव्यंजनावादी आलोचना वह आलोचना प्रणाली है जिसका आधार अभिव्यंजनावाद होता है। इसमें देखा जाता है कि कवि, कलाकार या साहित्यकार आदि को अभिव्यंजना की अभिव्यक्ति में किस हद तक सफलता मिली है।

इस आलोचना प्रणाली में माना जाता है कि कृति रचनाकार की भावनाओं का ही प्रकटीकरण है, इसलिए आलोचना का मूल आधार यही होना चाहिए।



Page last modified on Tuesday July 22, 2014 17:37:12 GMT-0000