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अर्थ-दोष

जिन दोषों का सम्बंध अर्थ से होता है उन्हें अर्थ-दोष कहा जाता है। किसी अभिव्यक्ति में मुख्य अर्थ का ही अपकर्ष होता हो तो उसे दोष माना जाता है।

मम्मट ने 33 प्रकार के अर्थ-दोषों का उल्लेख किया है जो निम्न प्रकार हैं।
अपुष्ट, कष्टार्थ, व्याहत, पुनरुक्त, दुष्क्रम, ग्राम्य, संदिग्ध, निर्हेतु, प्रसिद्धि विरुद्ध, विद्या विरुद्ध, अनवीकृत, साकांक्ष, अपदयुक्त, सहचरभिन्न, प्रकाशित विरुद्ध, निर्मुक्त पुनरुक्त, अश्लील, नियमपरिवृत्त, अनियमपरिवृत्त, विशेषपरिवृत्त, सामान्यपरिवृत्त, विधि अयुक्त तथा अनुवाद अयुक्त।

निकटवर्ती पृष्ठ
अरंगशेखर, अरध-उरध, अरविंद दर्शन, अराजकतावाद, अर्थालंकार


Page last modified on Tuesday October 17, 2023 15:31:45 GMT-0000