गन्ना
गन्ना एक फसल है, जिसका तना डंडे की तरह होता है, और जो मीठा तथा रसीला होता है। इसे पेरकर रस निकाला जाते है जिससे गुड़ और चीनी बनाया जाता है। इसके रस को स्वास्थ्यवर्द्धक एवं पौष्टिक माना गया है। रक्त की कमी, अम्लपित्त, रोगों में गन्ने का ताजा रस काफी फायदेमंद है। गन्ना शीतल पेय पदार्थ है यह एनीमिया, जौण्डिस, हिचकी आदि में परम उपयोगी है।औषधीय गुण: आयरन एवं कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर मात्रा होने के कारण गन्ने का रस तुरन्त शक्ति एवं स्फूर्ति प्रदान करता है। इसमें खनिज तत्व एवं ऑर्गेनिक एसिड होने के कारण उपयोगी है। यह आंखों, दिल, दिमाग के लिए विशेष लाभदायक है।
- गन्ने को चूसकर खाने से पीलिया रोगी को लाभ होता है तथा गन्ने के रस में नीबू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है।
- गन्ने के रस में अदरक का रस एवं नारियल पानी मिलाकर सेवन करने से पाचन क्रिया सुधरती है साथ ही गले के विकारों का निवारण होता है।
- गन्ने का रस दुबले पतले लोगों के लिए विशेष लाभदायक होता है, इसमें आंवला व अनार का रस मिलाकर पीने से रक्ताल्पता दूर होती है।
- बुखार में भी गन्ने के रस का सेवन कर सकते हैं। साथ ही हिचकी एवं उल्टी में गन्ने का रस उपयोग में लिया जा सकता है।
- नकसीर आने पर गन्ने का रस पीने से रक्तस्त्राव बंद हो जाता है।
- गन्ने के रस में ए, बी, सी विटामिन 15 प्रतिशत शर्करा पाया जाता है।
- इसके अतिरिक्त इसमें कैल्शियम, कार्बनिक लवण, लौह मैगनीज, फॉस्फोरस मिलते हैं। जो कि स्वास्थ्य को समृद्ध बनाते हैं।
- सुबह के नाश्ते में प्रतिदिन गन्ने का रस पीने से स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
- गन्ने के रस में जल, सुक्रोज, फाइबर लिग्नस, सैलुलोज, नाइट्रोजिंस तथा वसा जैसा पदार्थ होता है, जो स्वास्थ्य के लिए गुणकारी है।
- गन्ने का रस हमेशा ताजा एवं छाना हुआ पीना चाहिए। भोजन के पहले गन्ने का रस पीने से पित्त विकार नष्ट होता है, भोजन के बाद पीने से वायु विकार नष्ट होता है।
- गन्ना चूसकर खाने से दांत एवं मसूढ़े मजबूत होते हैं।
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