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चकवा

चकवा

चकवा एक पक्षी है जो में जाड़े के दिनों में उत्तर भारत के नदियों तथा जलाशयों के किनारे झुंड में दिखायी देता है। यह हंस जाति का पक्षी है। ये बैशाख के महीने तक दिखाई देते हैं तथा उसके बाद अधिक गर्मी पड़ने के कारण भारत से अन्यत्र चले जाते हैं। दक्षिण भारत में ये नहीं दिखायी देते।

भारतीय संत साहित्य में चकवा को जीव के रूप में चित्रित किया गया है। यह प्रेम का प्रतीक है तथा चकवा-चकवी के प्रेम पर अनेक कथाएं लोक जीवन तथा साहित्य में प्रसिद्ध हैं। परन्तु एक विचित्र बात यह मानी जाती है कि ये जोड़े रात्रि में एक दूसरे से विलग हो जाते हैं। संतों ने इसे ही विधि का विधान कहा है तथा संत कबीरदास तो यहां तक कहते हैं -

चकवा चकई दो जने, इन मारी मति कोय।
ये मारे करतार के, रैन बिछोहा होय।

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चक्रासन, चंचरी, चंचला, चंडाग्नि, चतुर्भुजदास

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