मछरी
मछरी शब्द मछली का ही पर्यावाची देशज रूप है। भारतीय संतों ने मन को मछरी कहा है क्योंकि मन भी मछरी की तरह अत्यंत चंचल है। मीन शब्द का प्रयोग संतों ने अज्ञानी जीव के लिए भी किया है। संत कबीरदास की एक उलटबांसी में कहा गया है - “जल बीच मीन रहत पियासी, मोहे सुन-सुन आवत हाँसी”। भोजपुरी और मगही भाषाओं में मछरी शब्द का काफी उपयोग किया गया है।निकटवर्ती पृष्ठ
मंडलचक्र, मणि, मणिपुर, मतंग, मति