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मछरी

मछरी शब्द मछली का ही पर्यावाची देशज रूप है। भारतीय संतों ने मन को मछरी कहा है क्योंकि मन भी मछरी की तरह अत्यंत चंचल है। मीन शब्द का प्रयोग संतों ने अज्ञानी जीव के लिए भी किया है। संत कबीरदास की एक उलटबांसी में कहा गया है - “जल बीच मीन रहत पियासी, मोहे सुन-सुन आवत हाँसी”। भोजपुरी और मगही भाषाओं में मछरी शब्द का काफी उपयोग किया गया है।

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मंडलचक्र, मणि, मणिपुर, मतंग, मति

Page last modified on Tuesday September 8, 2026 14:03:42 UTC