हेला की उत्पत्ति हाव से होती है इसलिए हेला अलंकार हाव अलंकार का ही एक भेद है। शारीरिक चेष्टाएं हाव कहलाती हैं, परन्तु जब इन शारीरिक चेष्टाओं कों स्वाभाविक नहीं, बल्कि ललित अभिनय द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है तो उसे हेला कह दिया जाता है। इस प्रकार हेला अलंकार के माध्यम से भाव को ही प्रकट किया जाता है।