पिछला विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल भाजपा के साथ मिल कर लडा था। दोनों पार्टियों में वैचारिक मतभेद है। इसके बावजूद दोनों मिलकर लड़े थे। इसका कारण यह था कि दोनों दलों को पता है कि अलग अलग चुाव लड़कर राज्य की सत्ता में वे नहीं आ सकते। अकाली दल की स्थिति गांवों में बहुत अच्छी है, तो भारतीय जनता पार्टी की स्थिति शहर में बेहतर है। दोनों दल मिलकर गांव और शहर दोनों में कांग्रेस पर भारी पड़ने की सोच सकते हैं।
इस बार भी दोनों मिलकर ही लड़ेगे। पर समस्या यह है कि इस बार शहरी मतदाता वर्ग में भाजपा की स्थिति पहले की अपेक्षा कमजोर हो गई है। अकाली दल के नेतृत्व वाली सरकार ने गांवों को बहुत सुविधाएं उपलब्ण करा दीं और उनका भार शहरों को उठाना पड़ा। इसके कारण शहरी मतदाता राज्य सरकार से खफा हैे और इसका खामियाजा भाजपा उठाना पड़ रहा है, जिसकी स्थिति अब शहरों मे ंपहले जैसी नहीं रह गई है।
इसके अलावा अकाली दल में भी फूट पड़ी है। अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल के भाई दल से बाहर हो चुके हैं। उनकी एक भतीेजे भी पार्टी से बाहर हो गए हैं। दोनों की राज्य के कुछ इलाके में अच्छी पकड़ है और उनके कारण सत्तारूढ़ दल को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा एक और घटना घटी है, जिसके कारण प्रकाश सिंह बादल परेशान हैं। वह घटना है पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्दर सिंह का कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बन जाना। कैप्टन सिंह एक बड़े योद्धा हैं। इन दोनों घटनाओं से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनका दल परेशान है।
यही कारण है कि अब अकाली दल अपने गठबंधन के दायरे को बढ़ाना चाहता है। उसे साफ दिखाई दे रहा है कि जमीनी स्तर पर वह और उसका गठबंधन उतना मजबूत नहीं रहा, जितना पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान था। इसलिए जीत के लिए वे कुछ और दलों को अपने गटबंधन में साथ लेना चाहते हैं।
प्रकाश सिंह बादल की नजर अब बहुजन समाज पार्टी पर है। एक समय यह पार्टी बहुत मजबूत हो गई थी। आज यह कमजोर है। लेकिन पंजाब में अनुसूचित जाति के लोगों का राज्य की आबादी में 29 प्रतिशत का योगदान है, जो देश के किसी भी प्रदेश में अनुसूचित जाति की प्रतिशत आबादी से ज्यादा है। इसलिए यदि बहुजन समाज पार्टी से अकाली दल का समझौता हो जाता है तो प्रकाश सिंह बादल अपनी पार्टी के फिर से सत्ता में आने की उम्मीद कर सकते हैं।
वैसे भ्रष्टाचार और विकास के अभाव के कारण अकाली दल और भाजपा दोनों की स्थिति खराब है। राज्य में भ्रष्टाचार का भारी बोलबाला रहा है। यह सर्वव्यापी हो गया है और इसके कारण राज्य का विकास भी अवरूद्ध हो रहा है। नए उद्योग लग नहीं पा रहे हैं और पुराने उद्योग बंद होने लगे हैं। पर्यावरण बोर्ड भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए हैं, जिनके कारण राज्य में औद्योगिक विकास ठहर गया है। भारी घूस देने पर ही नए उद्योगों को हरी झंडी मिल पाती है और पुराने उद्योगों पर भी पर्यावरण बोर्ड की तलवार लटकती रहती है।
विकास के अभाव के बावजूद अकाली दल के नेताओं को लगता है कि उन्होंने लोगों को जो मुफ् सरकारी सेवाएं प्रदान की हैं, वे चुनाव में उनके काम आएंगी। वे लोगों के लिए किए गए जन कलयाणकारी कार्यो की एक लंबी लिस्ट सुना देते हैं। पर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह के लोकप्रियतावादी कदम हमेशा काम नहीं आते। (संवाद)
अकालियों के सामने विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती
भ्रष्टाचार और विकास का अभाव चिंता के मुख्य विषय
बी के चम - 2011-06-29 05:22
चंडीगढ़ः अगले साल पंजाब विधानसभा का आमचुनाव होना है और उसके कारण अकाली दल की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पंजाब में सत्ताधारी पक्ष की हार और विपक्षी दल की जीत का इतिहास रहा है। अकाली दल की चिंता इसके कारण बढ़ी हुई है। इसके अलावा राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की कमी के कारण भी अकाली दल के नेता काफी परेशान हैं।