सरकार अधिकारियों का भारी पैमाने पर तबादला कर रही है और तबादलों की गिरफ्त में वे सरकारी अधिकारी भी आ रहे हैं, जो राज्य सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार व कदाचार के मसलों की जांच कर रहे थे। उन तबादलों से राज्य सरकार की मंशा शक के घेरे में आ गई है और आलाचकों को यह कहने का मौका मिल गया है कि सरकार अपने भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। निजी मेडिकल कॉलेजों के नामांकन का मसला भी तूल पकड़ रहा है। नामांकन के फार्मूले के अनुसार 50 फीसदी सीटें प्रबंधन कोटा का मानी जाती है, जबकि शेष 50 फीसदी सीटें सरकारी कोटा का मानी जाती है। प्रबंधन कोटा की सीटों पर कॉलेज का प्रबंधन डोनेशन लेकर नामांकन करता है, जिससे उसकी कमाई होती है। सरकारी कोटे में नामांकन योग्यता के आधार पर होती है, जिसमें छात्रों को डोनेशन नहीं देना पड़ता।
इस साल सरकार की कमजोरी अथवा साजिश के कारण सरकारी कोटे पर नामांकन नहीं हो सका और उसके कोटे का 50 फीसदी भी प्रबंधन के पास चला गया है। उन सीटों पर भी प्रबंधन ने मोटी राशि लेकर छात्रों का नामांकन कर लिया। इस तरह सरकारी कोटे की सीटें डोनेशन के हवाले कर दी गई। इसके कारण गरीब और मेधावी छात्र नामांकन से वंचित रह गए। यही कारण है कि छात्रों में सरकार के खिलाफ काफी रोष है।
सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने यह सब साजिश के तहत किया और उसने जानबूझकर निजी प्रबंधन को करोड़ों रुपए का फायदा उठाया। इसे सरकार द्वारा किया गया नामांकन घोटाला तक कहा जा रहा है।
असल में सरकारी कोटे के तहत आवेदन की तिथि 31 मई तक होती है, लेकिन नप गठित सरकार ने समय रहते छात्रों के आवेदनों को तवज्जो नहीं दी। नामांकन के निजी कॉलेज के प्रबंधकों को तय समय पर सरकारी कोटे के छात्रों की सूची नहीं दी गई। समय पर सूची नहीं मिल पाने के कारण निजी कॉलेज के प्रबंधको ने सरकारी कोटे की सीटों को भी डोनेशन दाताओं से भर दिया।
उसके बाद हंगामा शुरू हो गया। राज्य सरकार ने सरकारी कोटे पर मेधावी छात्रों के नामांकन सुनिश्चित करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। छात्रों की ओर से आरोप लगा कि राज्य सरकार ने अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रखा था, और उसी के कारण उसकी हार हुई।
छात्रों के गुस्से को देखते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर दी। अपील स्वीकार कर ली गई है। इसके बाद छात्र और भड़क गए हैं और वे राज्य सरकार पर निजी मेडिकल कालेज के प्रबंधको संे मिली भगत का आरोप लगा रहे हैं। अनेक छात्र संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है। आंदोलनकारी छात्रों के एक समूह पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी और उसके कारण राज्य भर में भारी तनाव पैदा हो गया है।
इस तनाव के मद्देनजर विपक्षी पार्टियां भी सक्रिय हो गई हैं। जो छात्र संगठन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, वे विपक्षी दलों से ही सबंध रखते हैं। इस तरह राज्य का राजनैतिक माहौल गरम हो गया है और सरकार व विपक्ष के बीच में टकराव तीव्र से तीव्रतर होता जा रहा है। (संवाद)
केरल में सरकार और विपक्ष टकराव की ओर
छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से माहौल तनावपूर्ण
पी श्रीकुमारन - 2011-07-05 04:30
तिरुअनंपुरमः नई सरकार गटन के कुछ महीने बाद ही केरल में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी है। चुनाव के बाद आमतौर पर विपक्ष कुछ समय के लिए विश्राम की मुद्रा में चला जाता है और वह राज्य सरकार के अलोकप्रिय होने का थोड़ा इंतजार करता है, पर केरल में सरकार बनने के साथ ही विपक्ष टकराव की मुद्रा में आ गया है और सरकार ने भी उसे अपने खिलाफ आंदोलनरत होने के लिए मौका दे दिया है।