भाजपा के उच्च नेतृत्व को लग रहा है कि यह सरकार अपना उत्साह खो चुकी है और एक प्रकार के लकवे की शिकार हो गई है। राजनैतिक स्तर पर कांग्रेस पार्टी के नेता आपस में लड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। भाजपा को लगता है कि केन्द्र सरकार को पटकनी देने का यह अच्छा मौका है। वह इस सरकार को आर्थिक नीतियों पर भी कुछ अच्छा करने का श्रेय लेने का मौका नहीं देना चाहती है।
यही कारण है कि भाजपा की राज्य सरकारें गुड्स एंड सेल्स टैक्स का विरोध कर रही हैं। भाजपा नेताओं ने यह भी संकेत दिए हैं कि उसकी पार्टी की राज्य सरकारें खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगी और उसका हर तरह से विरोध करेंगी। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के मसले पर राज्य सरकारों की राय मागी है। उनकी राय आने के बाद केन्द्रीय मंत्रिमंडल के लिए नोट तैयार किया जाएगा।
बीमा कानून (संशोधन) विधेयक पर भी भाजपा कांग्रेस के साथ खेल खेल रही है। पार्टी कांग्रेस से बदला लेना चाहती है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यह विधेयक संसद के मानसून सत्र में पास न हो सके। वाशिंगटन में हाल ही में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमेरिका ने निवेशक बैंको को कहा था कि सरकार उस विधेयक को पारित कराने के लिए गंभीर है और उसके लिए राजनैतिक आमराय बनाने की कोशिश की जा रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता बीमा विधेयक पर अपनी राय बनाने के लिए बैटक करने वाले हैं। वह विधेयक वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति के पास है और इस समिति के नेता भाजपा के यशवंत सिन्हा हैं। इस विधेयक पर समिति की ड्राफ्ट भी तैयार है और अगली बैठक में उसपर अंतिम सहमति भी होनी है, ताकि वह मंत्रिमंडल के पास भेजी जा सके।
पर भाजपा अब कह रही है कि वह इस विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा करेगी। विधेयक में सरकार ने विदेशी निवेशक संस्थानों का शेयर वर्तमान 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने का किया है। भाजपा कह रही है कि इस पर सहमत होने के लिए वह देश के बीमा सेक्टर के वर्तमान स्वरूप पर पूरी तरह चर्चा करना चाहेगी। दरअसल भाजपा को इस बात का मलाल है कि संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी का कांग्रेसी सांसदों ने अपमान किया था और उस समिति की रिपोर्ट को लोकसभा स्पीकर ने भी काग्रेसी सांसदों के समर्थन नहीं होने के कारण वापस कर दिया। अब भाजपा लोकलेखा समिति में उसके नेता की हुई किरकिरी का बदला वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति में कांग्रेस की मंशा को विफल करके लेना चाहती है।
भारतीय जनता पार्टी कह रही है कि विपक्षी सदस्यों ने वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति में सरकार द्वारा पेश किए गए विधेयक के प्रारूप में अनेक बदलाव किए हें और केन्द्र सरकार को उन बदलावों को उचित सम्मान देना चाहिए। भाजपा यह भी कह रही है कि पिछले सालों में अमीर देशों के अनेक वित्तीय संस्थान दिवालिया हो गए। वहां मंदी की स्थिति पैदा हो गई। इसलिए भारत में कानून बनाते समय उसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। भारत को यह देखना चाहिए कि कहीं विदेशी निवेशक बैंक भारत की जमा राशि को अपने देश की खराब हालत होने के समय यहां से वहां न पहंुचा दें।
अबतक प्राप्त सभी संकेतो से यही पता चलता है कि वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति में भाजपा बहुत ही कठोर रुख अपनाएगी। उसके इस रुख को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि केन्द्र सरकार और भाजपा के बीच आपसी सौदेबाजी ही इस विधेयक को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है। (संवाद)
आर्थिक सुधार कार्यक्रमों में अडंगा लगाएगी भाजपा
मानसून सत्र के हंगामापूर्ण होने के आसार
नित्य चक्रवर्त्ती - 2011-07-15 09:05
नई दिल्लीः अगले मानसून सत्र में मनमोहन सिंह की सरकार भाजपा की टकराव की नीति का सामना करती दिखाई पड़ेगी। इस सत्र के दौरान केन्द्र सरकार आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के दूसरे दौर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कानूनों को तैयार करना चाहेगी। लेकिन भाजपा केन्द्र सरकार को इस सत्र के दौरान चैन की सांस नहीं लेने देगी और वह दूसरे दौर के उसके कार्यक्रमों से संबंधित विधेयकों को पारित कराने में हर संभव अड़ंगा डालती रहेगी।