छोटा सत्र अब आम हो गया है। यदि विधानसभा सत्र बुलाने की सांवैधानिक अनिवार्यता नहीं हो, तो सत्तारूढ़ दल विधानसभा का सत्र बुलाए ही नहीं। सत्र को कितनी गंभीरता से लिया जाता है, इसका पता इसीसे चलता है कि मानसून सत्र के दौरान लोकहित के किसी मुद्दे पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं की गई।
सत्र के पहले दिन विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया। किसी तरह का काम सदन में नहीं हो सका। दूसरे दिन एक सनसनीखेल मुद्दे को उठाया गया। यह इंदौर में कुछ डॉक्टरों द्वारा मरीजों पर प्रयोग करने से संबंधित था। स्वास्थ्य मंत्री महेन्द्र हरदिया ने इसे स्वीकार किया कि इन्दौर के चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के डॉक्टर हेमंत जैन ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से कुछ दवाइयों के मरीजों पर परीक्षण के एवज में 1 करोड़ 44 लाख रुपए प्राप्त किए।निर्दलीय विधायक पारस सखलेचा ने आरोप लगाया कि जिन मरीज बालकांे पर परीक्षण किया गया, उनका उस काम के लिए पंजीकरण नहीं हुआ था। विधायक ने आरोप लगाया कि उस कंपनी ने डॉक्टरों के विदेशी दौरे को भी प्रायोजित किया था। उन्होंने पूछा कि क्या उन डॉक्टरों ने सरकार से विदेश जाने की अनुमति हासिल की थी। मंत्री ने कहा कि दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मसले को छोड़कर विधायकों ने और किसी जनहित के मसले को नहीं उठाया।
इन्दौर के ही नगर निगम हस्पताल के एक डॉक्टर के घर में लोकायुक्त का छापा पड़ा था और उस छापे में 35 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला। उस डॉक्टर की मासिक आय मात्र 66 हजार रुपए ही है। उतनी बड़ी संपत्ति के पता चलने से यह साबित होता है कि सरकारी अस्पतालों में भारी भ्रष्टाचार है।
विधानसभा के सत्र के दौरान दिग्विजय सिंह छाए रहे और उनके मसले पर सदन का कामकाज लंबे समय तक ठप रहा। जब दिग्विजय सिंह अपने शहर जा रहे थे, तो भाजपा के युवा कार्यकर्त्ताओं ने उन पर हमला किया था। उसके पहले भी उन्हें काला झंडा दिखाया गया था। जब उन्हें काला झंडा दिखाई जा रहा था, तो वे बौखला उठे थे और उन्हें भाजपा के युवा कार्यकर्त्ताओं पर हमला ही बोल दिया था। उन्हें एक भाजपा कार्यकर्त्ता की पिटाई भी कर दी थी। बाद में दिग्विजय सिंह के ऊपर हमला उसके विरोध में ही हुआ था।
विधानसभा में दिग्विजय सिंह के ऊपर हुए हमले का मसला छाया रहा। कांग्रेसी विधायक दिग्विजय सिंह के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शन को मसला बना रहे थे, तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा कार्यकर्त्ता पर किए गए हमले के लिए दिग्विजय सिंह को कोस रहे थे और कह रहे थें कि दिग्विजय सिंह का वह व्यवहार बेहद ही फूहड़ और गैर जिम्मेदाराना था। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे दिग्विजय सिंह हीरों दिखाई पड़ें। दिग्विजय के मसले को उठाकर कांग्रेसी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सदन में कोई काम नहीं हुआ।
कांग्रेसी विधायकों ने दिग्विजय के मसले पर काम रोको प्रस्ताव पेश किया, जिसे सत्ता पक्ष ने तुरत स्वीकार कर लिया। इस पर चर्चा भी हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है और आरएसएस की मनमानी चल रही है। कांग्र्रेसी विधायकों ने आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षा देने में विफल रही। उससे राज्य के 7 करोड़ लोागों को सुरक्षा देने की उम्मी नहीं की जा सकती।
चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बेहद ही गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं और उनके अनेक बयानों को तो कांग्रेस के प्रवक्ता भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर हुए हमले की न्यायिक जांच कराने की मांग को सिरे से नकार दिया और उस मसले पर दो दिनों तक हंगामा होता रहा। (संवाद)
विधानसभा सत्र में दिग्विजय सिंह छाए रहे
कांग्रेस ने राज्य में आरएसएस की सरकार होने का आरोप लगाया
एल एस हरदेनिया - 2011-07-27 09:14
भोपालः मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 12 जुलाई को शुरू हुआ था, जो 22 जूलाई को समाप्त हो गया। इसके बीच के तीन दिन विधानसभा की बैठक नहीं हुई, क्योंकि उन दिनों छुट्टी थी।