देश में कुल मिलाकर 83 मिली-जुली पटसन मिलें हैं, जिनमें 16 लाख मीट्रिक टन माल तैयार किया जाता है। यह उद्योग कृषि-आधारित और श्रम बहुल है और इस क्षेत्र में लगभग 2.48 लाख लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।

पटसन से सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पर्यावरण हितैषी उत्‍पाद है। पटसन को स्‍वर्णिम रेशा कहा जाता है और यह उन सभी मानकों पर खरा उतरता है, जो पैकेजिंग के काम आने वाली चीजों को प्राकृतिक, फिर से इस्‍तेमाल होने वाली, प्राकृतिक रूप से समाप्‍त हो जाने वाली और पर्यावरण हितैषी हैं। पटसन का रेशा प्राकृतिक होता है और यह अब सारी दुनिया में पर्यावरण हितैषी उत्‍पाद के रूप में मंजूर किया जाता है, क्‍योंकि इससे बनी चीजें पर्यावरण अनुकूल हैं और खुद ही समय के साथ क्षय होकर नष्‍ट हो जाती हैं। अब जबकि पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और लोगों का प्राकृतिक उत्‍पादों के प्रति रुझान बढ़ रहा है, पटसन उद्योग का भविष्‍य उज्ज्वल है। भारत सरकार के वस्‍त्र मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले नेशनल जूट बोर्ड ने पटसन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किये हैं। यह बोर्ड उत्‍पादकों, श्रमिकों और निर्यातकों के हित-रक्षण के प्रति सचेष्‍ट है। यह बोर्ड पटसन और पटसन से बनी चीजों के देश में प्रयोग को बढ़ावा देता है और निर्यात की भी व्‍यवस्‍था करता है। इस बोर्ड के लगातार प्रयासों के परिणामस्‍वरूप इससे जुड़ा अनौपचारिक क्षेत्र और उद्यमिता में वृद्धि हुई है और इस क्षेत्र में लोगों को रोजगार के लगातार अवसर मिल रहे हैं।

नेशनल जूट बोर्ड पटसन उत्‍पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए लगातार सक्रिय है। उसकी प्रोत्‍साहक गति‍विधियां बढ़ रही हैं। चेन्‍नई में एक पटसन उत्‍सव आयोजित किया गया है। तमिलनाडु, आंध्रप्रेदश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल, उत्‍तरप्रदेश आदि जैसे विभिन्‍न राज्‍यों से आए हुए करीब 35 संगठन इसमें भाग ले रहे हैं। उन्‍होंने इस प्रदर्शनी में पटसन रेशे मिलाकर तैयार की गई साडियां, पटसन के टाइल्‍स, पटसन की दरियां, वॉल हैंगिंग, पटसन से तैयार हस्‍तशिल्‍प, विभिन्‍न प्रकार के थैले, घरेलू वस्‍त्र, पटसन से तैयार लिखने-पढ़ने की चीजें, उपहार देने की वस्‍तुएं और फुटवियर आदि प्रदर्शित किये हैं। इस प्रदर्शनी में हर शाम एक पटसन फैशन वॉक भी आयोजित किया जाएगा।

त्रिशूर मुख्‍यालय वाले प्रेरणा लाइफस्‍टाइल ने तरह-तरह के थैले और फोल्‍डर तैयार किये हैं और उनके दावे के अनुसार इन्‍हें अनेक कार्पोरेट ग्राहकों को सप्‍लाई किया जाता है। प्रेरणा लाइफस्‍टाइल एक स्‍व-सहायता समूह की पहल है। इस संगठन ने अपने पंडाल में तरह-तरह के थैले, दीवार घडियां और टाइम पीसेज (पटसन से बनें डायल वाले) वाल हैंगिंग और सजावट की वस्‍तुएं प्रदर्शित की हैं। एक और संगठन – अनकापुतुर जूट ग्रोवर्स एसोसिएशन ने तरह-तरह की पटसन रेशे से तैयार की गई साँड़ियाँ प्रदर्शित की हैं, जो महिलाओं को बहुत पसंद आ रही हैं। इस संगठन के सी. शेखर का कहना है कि ये पटसन की साडियां फैशनेबल ही नहीं बल्कि टिकाऊ भी हैं। वारंगल के रिलायंस हैंडलूम क्राफ्ट ने पटसन की दरियां प्रदर्शित की हैं। पलादम नाम के इस संगठन ने तरह-तरह की दरियां, टाइलें आदि प्रदर्शित किये हैं। इसके पंडाल में वॉल हैंगिंग और विभिन्‍न आकारों की ट्रे भी रखी गईं हैं, जिन पर रखकर खाद्य पदार्थ परोसे जा सकते हैं। कोलकाता के किरण बैग नाम के संगठन ने अपने पंडाल में पटसन रेशे से बने फूटवीयर रखे हैं, जो वज़न में हल्‍के ही नहीं बल्कि आकर्षक भी हैं। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्‍या में वह दर्शक आ रहे हैं, जो फैशनेबल वस्‍तुओं के शौकीन होने के साथ पर्यावरण हितैषी दृष्टिकोण भी रखते हैं। प्रदर्शनी पटसन से बने पर्यावरण हितैषी उत्‍पादों के प्रति जागरूकता ही नहीं पैदा कर रही है, बल्कि अनेक घरेलू उन उद्यमियों को भी आकर्षित कर रही है, जो पटसन से बने उत्‍पादों में अपना उद्योग लगाना चाहते हैं।