आगामी 25 नवंबर को मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव होने वाला है। अब उसके ठीक पहले इस तरह की घटना घटित होना शिवराज सिंह चैहान और उनकी पार्टी के लिए एक अशुभ संकेत है। अभी से कुछ महीने पहले शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा की जीत को अधिकांश लोग तय मान रहे थे। इसका एक कारण कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी भी थी।
पर कांग्रेस अब आपसी गुटबाजी से उबर गई है और उसमे ंएकता दिखाई पड़ रही है। कांग्रेसी एकता ने भाजपा की जीत की संभावना को पहले से ही कुछ धूमिल कर रखा था। वैसी हालत में दतिया की यह भगदड़ भाजपा की परेशानी का सबब बन रही है।
भगदड़ के पहले से ही भाजपा के लिए माहौल खराब हो रहा था। उसका कारण था एक के बाद एक सामने आ रहा घोटाला। इन घोटालों से शिवराज सिंह चैहान की विश्वसनीयता खतरे में पड़ रही थी। एक घोटाला तो खान आबंटन में सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने उस आबंटन पर फिलहाल रोक भी लगा दी है।
136 खानों का आबंटन विभिन्न कंपनियों को किया गया था। ये आबंटन 6 अक्टूबर को किए गए थे और 8 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तिथियों की घोषणा की। उस घोषणा के साथ ही चुनावी आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव आचार संहिता लागू किए जाने के ठीक पहले इस तरह के आबटन के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस आबंटन पर फिलहाल रोक लगा दी है।
सरकार से अपना जवाब 4 सप्ताह के भीतर देने को कहा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आबंटन हड़बड़ी में किया गया और वैसा करते समय नियम कायदों का पालन नहीं किया गया। एक आवेदन पर विचार करने मे एक मिनट का भी समय नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार कुल 1100 आवेदन सरकार के पास थे, जिनपर विचार करने के लिए उसने 1100 मिनट भी नहीं दिए। उसका कहना है कि पिछली तारीखों से आबंटन का काम दिखाया गया।
जिन कंपनियों को खाज दिए गए, उनमें से अधिकांश उन लोगों के हैं, जो भाजपा से जुड़े हुए हैं। अखबार के कुछ मालिकों की कंपनियों को भी खान दिए गए। कुछ लोगों का तो कहना है कि मध्यप्रदेश का यह खान घोटाला कर्नाटक के खान घोटाले से भी बड़ा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आबंटन पर रोक लगाए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर अपने आक्रमण तेज कर दिए हैं। वे आक्रमण खासतौर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और खान मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के ऊपर हो रहे हैं।
मेडिकल काॅलेज के दाखिलों में हुए घोटाले ने भी मुख्यमंत्री, उनकी सरकार और उनकी पार्टी को परेशान कर रखा है। ये दाखिले एमपी प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड द्वारा ली गई प्रवेश परीक्षा के आधार पर होते हैं। इस साल और पिछले कुछ और सालों में इसमें भारी धांधली हुई और घूस लेकर प्रवेश परीक्षा के परिणामों को प्रभावित किया गया। ऐसा आरोप लगाया जा रहा है और इससे जुड़े कुछ सबूत भी सामने आए हैं।
एक डाॅक्टर के अनुसार उसने अपने बेटे का दाखिला करवाने के लिए 27 लाख रुपये के घूस दिए थे। प्रवेश में हुई इस धांधली की जांच एक विशेष टास्क फोर्स के जरिए कराई जा रही है। इस फोर्स ने अबतक दो दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में बोर्ड के अनेक अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। बोर्ड के निदेशक पंकज त्रिवेदी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
शिवराज सिंह चैहान इस घोटाले में विपक्ष के हमले का निशाना बन रहे हैं। इसका एक कारण यह है कि उन्होंने शुरू में पंकज त्रिवेदी का बचाव किया था और कहा था कि वे दोषी नहीं हैं, क्योंकि ये सारे मामले उनके कारण ही सामने आए हैं। इन घोटालों के बाद दतिया में मची भगदड़ और उसमें गई सौ से ज्यादा लोगों की जान ने निश्चय ही शिवराज सिंह को मुश्किल मे डाल दिया है। (संवाद)
चुनाव के पहले बढ़ती शिवराज की मुश्किलें
दतिया की भगदड़ और घोटालों से भाजपा परेशानी में
एल एस हरदेनिया - 2013-10-16 05:53
भोपालः एक के बाद एक घोटाले सामने आने के बाद दतिया में पिछले रविवार को मची भगदड़ ने शिवराज सिंह की मुश्किलें बढ़ा दी है। इसमें 100 सम भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और इसके लिए मुख्यमंत्री की प्रशासन क्षमता को जिम्मेदार बताया जा रहा है। कांग्रेसी नेता तो इसके लिए शिवराज सिंह चैहान का इस्तीफा भी मांग रहे हैं।