दिल्ली में आमतौर पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी लड़ाई हुआ करती है। आजादी के बाद से ही दलों दलों ने ही दिल्ली पर बारी बारी से राज किया है, हालांकि कांग्रेस इस बार लगातार 15 वर्षों से दिल्ली पर राज कर रही है, जो एक रिकार्ड है। अनेक कारणों से भारतीय जनता पार्टी विधानसभा के पिछले कुछ चुनाव लगातार हारती रही है।
दिल्ली के साथ साथ 4 अन्य राज्यों की विधानसभाओं के भी चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों की एक खासियत यह रहेगी कि इसमें एक बटन ’’ऊपर में से कोई नहीं’ का भी होगा। ऐसा पहली बार होगा। मतदाता यह भी बता सकेंगे कि उन्हें चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में से कोई पसंद नहीं हैं और वे सभी के खिलाफ वोट डालते हैं। निर्वाचन आयोग मतदाताओं की जागरूकता को बढ़ाने के लिए केन्द्रीय जागरूकता पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति करेगा।
चुनाव का मुख्य मुद्दा महंगाई है। इसके अलावा बिजली की कीमतों को महंगा होना और पानी की आपूर्ति में अनियमितता भी मुख्य चुनावी मुद्दे हैं। भ्रष्टाचार के मसले भी चुनाव पर हावी रहेंगे। यूपीए सरकार के मंत्रियों के खिलाफ घोटाले की खबरों का असर चुनाव पर पड़ेगा। राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटाले की भी खूब चर्चा होगी। इस घोटाले के लिए शीला दीक्षित को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।
इस चुनाव मे दो नये खिलाडि़यों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी होगी। वे हैं- नरेन्द्र मोदी और अरविंद केजरीवाल। नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उनकी लोकप्रियता का लाभ भाजपा उठाना चाह रही है। पिछले दिनों दिल्ली में हुई उनकी जनसभा में भारी जनसैलाब उमड़ा था। यदि उसमें आधा भी भाजपा के पक्ष मंे काम करे, तो इसे दिल्ली चुनाव जीतने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
अरविंद केजरीवाल भी दिल्ली चुनाव में इस बार एक फैक्टर हैं। दिल्ली की जनता उनका पिछले दो सालों से जानती है। अन्ना के नेतृत्व में जनलोकपाल के लिए किए जा रहे आंदोलन में वे एक प्रमुख नेता था। अब अन्ना और उनके रास्ते अलग अलग हो गए हैं। वे चुनावी राजनीति में आ गए हैं और आम आदमी पार्टी बनाकर दिल्ली का चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी ने उन्हें अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर रखा है। उनकी क्या भूमिका इस चुनाव के दौरान होगी, यह देखना दिलचस्प है।
यदि आम आदमी पार्टी नहीं होती, तो भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव जीतना आसान हो जाता, क्योंकि कांग्रेस और सरकार विरोधी वोट उसे एकमुश्त में मिल जाते, पर अरविंद केजरीवाल के कारण ऐसा नहीं हो पाएगा। सरकार विरोधी मतों का एक बड़ा हिस्सा उनके पास जाएगा और इस तरह से भारतीय जनता पार्टी को नुकसान होगा।
पर सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल की पार्टी द्वारा भाजपा को हुए नुकसान से कांग्रेस को फायदा होगा? कांग्रेस भी ऐसा ही समझती है और भारतीय जनता पार्टी भी। पर एक तथ्य यह भी है कि केजरीवाल कांग्रेस का वोट भी भारी पैमाने पर काट करे हैं। पहले माना जाता था कि मध्य वर्ग के लोग ही उनके समर्थक हैं, लेकिन केजरीवाल बिजली, पानी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाते हुए झुग्गियों और अवैध कालोनियों में भी घुस चुके हैं। वे सस्ती बिजली और 700 लीटर प्रतिदिन मुफ्त पानी देने का वायदा कर लोगों को लुभा रहे हैं। चुनाव प्रचार में भी वे कांग्रेस और भाजपा को पीछे छोड़ चुके हैं। इसका कारण यह है कि केजरीवाल के ज्यादातर उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं, जबकि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा अभी बाकी है।
2008 में कांग्रेस का चुनाव जीतना एक चमत्कार से कम नहीं था। कांग्रेस को उस चुनाव में 40 दशमलव 3 फीसदी मत मिले थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 36 दशमलव 8 फीसदी मत मिले थे। बहुजन समाज पार्टी को भी 14 फीसदी मत मिले थे, पर उसके मात्र 3 उम्मीदवार ही जीत सके थे। मतदान मुृबई हमलों के तीन दिन के बाद हुआ था। सच तो यह है कि मतदान के दिन भी ताज होटल में गोलीबारी जारी थी। भाजपा को उम्मीद थी कि उसके कारण उसे पड़े मतों की संख्या कांग्रेसी मतों से ज्यादा होगी, पर वैसा हो नहीं सका और जीत कांग्रेस की ही हुई।
कांग्रेस को उम्मीद है कि दिल्ली में वह चैथी बार अपनी सरकार बना पाएगी। केजरीवाल के कारण वह अपनी जीत को और भी करीब मान रही है, लेकिन यह कहना अभी आसान नहीं है कि केजरीवाल की पार्टी दिल्ली के चुनाव को किस रूप में प्रभावित करेगी। उसके कारण भाजपा को कितना नुकसान होगा और कंाग्रेस को कितना, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। फिलहाल केजरीवाल की पार्टी उन इलाकों मंे भी अपनी पहुंच बना रही है, जो कभी कांग्रेस के सुरक्षित इलाके माने जाते थे। (संवाद)
दिल्ली एक बार फिर बन गई है कुरुक्षेत्र
क्या शीला चैथी बार जीत पाएंगी?
कल्याणी शंकर - 2013-10-25 12:05
आगामी 4 दिसंबर को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। शीला दीक्षित खुद कांग्रेस की जीत के प्रति बहुत आश्वस्त नहीं है, क्योंकि वह तीन बार से लगातार चुनाव जीत रही हैं और रिकार्ड चैथी बार चुनाव जीतना आसान नहीं होता है।