श्री वर्मा ने श्री पेहोचिंस्कि के साथ बातचीत करते हुए कहा, ‘इस्पात के क्षेत्र में भारत-पोलैंड सहयोग के लिए अपार संभावनाएं हैं। कोयले और इस्पात के कारोबार में भारतीय कंपनियां पोलैंड के संगठनों के साथ सहयोग कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश एक दूसरे की विशेषज्ञता से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

इस्पात मंत्री ने भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों के बारे में बोलते हुए कहा, ‘पोलैंड की खनन कंपनियों के पास डीप-कोल माइन्सक के विकास और संचालन के‍ लिए तकनीकी जानकारी है।’ उन्होंने स्थायी एवं पर्यावरण अनुकूल और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी का उपयोग कर भारत में कोकिंग कोयले की खदानों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। यदि पोलैंड की खनन कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ इस ज्ञान को बांटती हैं तो यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा।

श्री पिकोसिंस्कि, एक जीवंत लोकतांत्रिक व्यएवस्था। के तहत भारत में आर्थिक विकास की सराहना की और दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण भागीदारी के बारे में बात की। उन्होंने सूचना प्रोद्योगिकी, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, खनन में भारतीय पेशेवरों के प्रशिक्षण आदि के क्षेत्रों में सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंलने भारतीय कंपनियों द्वारा पोलैंड में किए गए महत्वतपूर्ण निवेश के बारे में भी उल्ले्ख किया और इच्छाद जताई कि ज्यांदा से ज्याहदा कंपनियां इसी तरह का निवेश पोलैंड में करे।

इस्पा्त मंत्री के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल में इस्पाइत मंत्रालय के सचिव जी. मोहन कुमार, इस्पात मंत्रालय के संयुक्ते सचिव यू. पी. सिंह और सेल अध्यक्ष श्री सी. एस. वर्मा शामिल थे।