पर इस बार स्थिति बदल गई है। दिल्ली की दोनों बड़ी पार्टियां एक साथ केजरीवाल और आमा आदमी पार्टी को अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी समझ रही हैं और चुनावी हमले का केन्द्र आम आदमी पार्टी ही है। सच कहा जाय तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा आम आदमी पार्टी ही है।

अरविद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर सबसे पहले विदेशों स ेचंदा लेने के आरोप लगे। इन आरोपों के बाद लगा कि नैतिकता की बात करने वाले केजरीवाल की जुबान पर लगाम लगेगा, पर उनकी आम आदमी पार्टी ने केन्द्र सरकार को जांच कर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट जारी करने और उनकी पार्टी के खिलाफ मुकदमा चलाने की चुनौती दे डाली। वे लोगों को बताते रहे कि उन्होंने विदेशियों से नहीं, बल्कि विदेशों मंे रह रहे अनिवासियों से चंदा लिया है, जो गैरकानूनी नहीं है। सरकार की ओर से सिर्फ जांच की घोषणा हुई और किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगो में संदेश गया कि केजरीवाल सही कह रहे हैं और विदेशी चंदे का आरोप लगाने वाले गलत हैं।

उसके बाद अन्ना के खत का विवाद सामने आया। उस खत के साथ साथ एक सीडी विवाद भी सामने आया। उन दोनेां के कारण केजरीवाल ही चर्चा का केन्द्र बने रहे और यह दिखाने की कोशिश हुई कि आम आदमी पार्टी अन्ना के नाम का उपयोग कर भारी धनराशि इकट्ठा कर चुकी है और आंदोलन के दौरान का रुपया भी बचा रखा है, जिसका इस्तेमाल चुनाव में किया जा रहा है। केजरीवाल ने इसका भी प्रभावी ढंग से खंडन किया और चुनौती दे डाली कि आंदोलन के दौरान इंडिया अगेंस्ट करप्षन के नेता रहे जस्टिस हेगड़े से आंदोलन के दौरान के चंदे और उसके खर्च की जांच करवाई जाय और रिपोर्ट 4 दिनों के अंदर पेश की जाय। वह विवाद अन्ना के इस बयान से समाप्त हुआ कि अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर उनको कोई शक नहीं है।

आम आदमी पार्टी पर तीसरा बड़ा हमला एक स्टिंग आपरेशन के द्वारा हुआ, जिसमें उसके उम्मीदवारों को भ्रष्ट बताया गया था। उस स्टिंग के बाद लग रहा था कि आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता अब बच नहीं पाएगी अथवा उसे अपने अनेक उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हट जाने के लिए कहा जाएगा। पर वैसा करने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि केजरीवाल और उनकी टीम ने उस स्टिंग करने वालों को की गलत सािबत कर दिया। राजनैतिक चातुर्य दिखाते हुए केजरीवाल ने निर्वाचन आयोग से मांग कर दी कि वह मतदान के पहले स्टिंग टेप की जांच करके बता दें कि उनके उम्मीदवारों ने भ्रष्ट तरीका अपनाया यह नहीं। उन्होंने घोषणा कर दी कि यदि आयोग जांच करके किसी उम्मीदवार को भ्रष्ट तरीका अपनाने का दोषी पाता है, तो उस उम्मीदवार को चुनाव मैदान से हटा दिया जाएगा। जिन उम्मीदवारों पर आरोप लगे थे, उन्होने ने भी घोषणा कर दी कि आयोग द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद वे चुनाव मैदान से हट जाएंगे।

आरोपों के बीच आम आदमी पार्टी की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है। पहले यह समझा जाता था कि आम आदमी पार्टी भाजपा के मतों को काटेगी और इससे कांग्रेस को फायदा होगा, लेकिन यह पार्टी अब कांग्रेस के जनाधार को भी खिसका रही है। दक्षिण दिल्ली में कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले एक क्षेत्र में राहुल गांधी की सभा के विफल होने का एक कारण यह भी है। उसके बाद तो राहुल गांधी से दिल्ल्ी के कांग्रेसी उम्मीदवार अपने क्षेत्र में भाषण भी नहीं करवाना चाहते।

केजरीवाल और उनकी पार्टी पर कांग्रेस और भाजपा की ओर से हमले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीके से हो रहे है, लेकिन सभी हमलों के बाद केजरीवाल बेदाग होकर उभर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी स्थिति दिनों दिन मजबूत होती जा रही है। (संवाद)